हरियाली बढ़ाने के उनके प्रयासों ने उन्हें “जंगल उगाने वाले बाबा” के रूप में पहचान दिलाई है. वो खुद को गार्डनर बताते हुए कहते हैं कि जगंल उगाना किसी के बस में नहीं है.
पेड़ हैं तो सांस है, और सांस है तो इंसान है. लेकिन विकास के नाम पर जिस तरह से पेड़ों की कटाई हो रही है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ रही है. मौसम का चक्र बिगड़ रहा है. बारिश समय पर नहीं हो रही और इसका असर खेती-किसानी पर भी दिखाई दे रहा है. सरकारें हर साल करोड़ों पौधे लगाने का दावा करती हैं, लेकिन उनमें से कितने पौधे जीवित बचते हैं, यह हमेशा सवालों के घेरे में रहता है. उत्तर प्रदेश सरकार ने एक दिन में करोड़ों पौधे लगाने का दावा किया लेकिन समय-समय पर ऐसी खबरें भी सामने आती हैं कि बड़ी संख्या में पौधे कुछ ही दिनों में सूख गए.
इसी भारत में एक ऐसा शख्स भी है, जिसने अपना जीवन पेड़ों को समर्पित कर दिया. उनका दावा है कि वह तीन करोड़ से अधिक पीपल के पौधे लगा चुका है. जिसके चलते लोग उन्हें ‘पीपल बाबा’ कहने लगे हैं. आखिर कौन हैं पीपल बाबा? पेड़ लगाना उनके जीवन का उद्देश्य कैसे बना? वे क्यों कहते हैं कि “पेड़ मेरे लिए संख्या नहीं, रिश्ता हैं”? यह रिश्ता क्या है? सरकारी वृक्षारोपण अभियानों की सच्चाई क्या है? पौधा लगाना मुश्किल है या उसे जीवित रखना?
देखिए उनसे हमारी ये खास बातचीत.
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