एनसीआर के भट्ठा मालिकों का कहना है कि कोयले के ताप से ईंट की क्वालिटी बेहतर होती है और मार्केट में कीमत भी ज़्यादा मिलती है.
दिल्ली-एनसीआर में कोयले के औद्योगिक इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है. कोयले पर यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2023 से लागू है. सिर्फ थर्मल पावर प्लांट्स को कम-सल्फर कोयले के इस्तेमाल की छूट है.
गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक धुएं का भी है. इसके बावजूद कई भट्ठों में आज भी कोयले का इस्तेमाल हो रहा है.
याद हो कि बीते दिसंबर से जनवरी तक दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक हो गई थी. ऐसे में कोयले के इस्तेमाल पर अगर रोक प्रभावी रूप से लागू नहीं होती है तो इसका असर हमें हवा पर भी देखने को मिलेगा.
लेकिन क्या वजह है कि रोक के बावजूद ईंट-भट्ठों पर कोयले का इस्तेमाल हो रहा है. इसी वजह को समझने के लिए हमने गाज़ियाबाद के कुछ भट्ठों का दौरा किया.
इस दौरान एक ईंट-भट्ठा संचालक ने कहा, “बड़ी संख्या में मजदूर इस उद्योग पर निर्भर हैं. अगर पूरी प्रक्रिया बिजली या गैस पर चलने लगेगी तो सिर्फ 5-6 लोगों की ही ज़रूरत रह जाएगी और काफी लोग बेरोजगार हो जाएंगे."
इसके अलावा एनसीआर के भट्ठा मालिकों का कहना है कि कोयले के ताप से ईंट की क्वालिटी बेहतर होती है और मार्केट में कीमत भी ज़्यादा मिलती है.
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
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