दिल्ली विकास प्राधिकरण का दावा है कि ये जमीन उनकी है और यह पूरा इलाका यमुना के बाढ़क्षेत्र में आता है.
दिल्ली के यमुना बाज़ार इलाके में स्थित यमुना घाटों पर 25 जून की सुबह से तोड़फोड़ शुरू हो गई थी. इससे पहले प्रशासन ने लोगों को 23 जून तक अपने घर खाली करने का नोटिस दिया था. नोटिस में कहा गया था कि 24 जून तक सभी परिवार जगह खाली कर दें. साथ ही यह भी लिखा था कि लोग गीता कॉलोनी स्थित रात्रि आश्रयों या दिल्ली के अर्बन शेल्टर होम्स में जाकर रह सकते हैं.
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) का कहना है कि ये जमीन उनकी है और यह पूरा इलाका यमुना के बाढ़क्षेत्र (फ्लड प्लेन) में आता है. प्राधिकरण का दावा है कि ये लोग यहां अतिक्रमण करके रह रहे थे. जिसे अब हटाया जा रहा है. हालांकि, कार्रवाई के दौरान किनारे पर स्थित मंदिर को नहीं हटाया गया है, सिर्फ वहां बनाए घरों को तोड़ा गया है.
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने यमुना बाज़ार के घाटों के पास रहने वाले लोगों को हटाने के लिए बीते मई में नोटिस जारी किया था. यमुना बाज़ार में करीब 32 घाट हैं, जहां लगभग 310 परिवार रहते हैं. इनमें करीब 1100 लोगों की रिहायश है. यहां रहने वाले ज़्यादातर लोगों का रोज़गार यमुना के घाटों पर होने वाली रीति क्रियाओं से जुड़ा है. जिनमें पूजा-पाठ से लेकर फूल और नौका विहार आदि शामिल है.
बीते कई सालों से यहां रहने वाली प्रभा कहती हैं, "अगर आप अचानक किसी से कह देंगे कि घर खाली कर दो तो वह कहां जाएगा? हम इतने सालों से यहां रह रहे हैं. जब बाढ़ आती है, तब सफाई भी हम ही करते हैं. रेखा गुप्ता तो सिर्फ फोटो खिंचवानी आती हैं."
यमुना घाट पांडा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश ने बताया कि सुबह करीब 3 बजे बिजली काट दी गई. इसके बाद पानी की सप्लाई बंद कर दी गई. फिर सुबह ही तोड़फोड़ शुरू कर दी गई.
देखिए यमुना बाजार में डीडीए की कार्रवाई पर ये खास रिपोर्ट.
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