दिल्ली ऐसे दौर में पहुंच चुकी है, जहां गर्म मौसम की अवधि लगातार बढ़ रही है.
दिनभर की गर्मी झेलने के बाद वो इस उम्मीद में घर लौटते हैं कि रात में कुछ राहत मिलेगी. लेकिन दिल्ली के जेजे क्लस्टरों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए रातें भी तपती हुई गुजरती हैं.
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की एक रिसर्च बताती है कि दिल्ली ऐसे दौर में पहुंच चुकी है, जहां गर्म मौसम की अवधि लगातार बढ़ रही है. औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों में तेजी से वृद्धि हुई है यानी दिन में गर्म हुई धरती रात के समय उतनी तेजी से ठंडी नहीं हो पाती. शहर की रात में ठंडा होने की क्षमता करीब 9 प्रतिशत तक कम हो गई है.
जेजे क्लस्टरों और झुग्गी बस्तियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है. छोटे कमरे, पतली दीवारें, टीन या अस्थायी छतें और संकरी गलियां गर्मी को अपने भीतर कैद कर लेती हैं.
हमने नई सीमापुरी के एक कमरे में दीवारों का तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जबकि कमरे के भीतर ह्यमिडिटी 58 से 60 प्रतिशत तक पहुंच रही थी. ऐसे हालात में लोगों के लिए सो पाना मुश्किल हो जाता है.
नई सीमापुरी के निवासी सनवर कहते हैं, “बहुत गर्मी है. कूलर भी काम नहीं करता. पंखा चलाता हूं तो गर्म हवा आती है. दीवारें भी गर्म हो जाती हैं. सुबह 3-4 बजे तक गर्मी रहती है, तब जाकर लगता है कि हवा थोड़ी ठंडी हुई है.”
वहीं तसली बीबी बताती हैं, “जब बहुत ज्यादा गर्मी हो जाती है, तो मैं दुपट्टा भिगोकर अपने शरीर पर रखकर सोती हूं.”
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर राज्य द्वारा हीटवेव को आपदा के रूप में अधिसूचित किया जाए, तो उससे निपटने के लिए विशेष फंड और राहत उपायों तक पहुंच आसान हो सकती है. हालांकि, दिल्ली में अभी तक हीटवेव को आपदा घोषित नहीं किया गया है.
देखिए ये खास रिपोर्ट.
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