युद्धवीर अपने अभिनय सफर के साथ-साथ कई ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं, जिन पर फिल्मी दुनिया के कलाकार अक्सर चुप रहना पसंद करते हैं.
फिल्म कर्तव्य में अपने किरदार 'हरपाल' से चर्चा में आए अभिनेता युद्धवीर अहलावत सी बेबाकी आज कलाकारों में कम ही देखने को मिलती है.
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर मुंबई की गलियों में तीन दिन तक अनजान लोगों के भरोसे ठिकाना ढूंढ़ना, गुरुद्वारे में रातें गुजारना, थिएटर से शुरुआत करना और फिर ‘सांड की आंख’, ‘लव हॉस्टल’ और ‘कर्तव्य’ जैसी फिल्मों तक पहुंचना युद्धवीर के संघर्ष, धैर्य और लगातार सीखते रहने की कहानी है.
न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी से इस खास बातचीत में युद्धवीर अपने अभिनय सफर के साथ-साथ कई ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं, जिन पर फिल्मी दुनिया के कलाकार अक्सर चुप रहना पसंद करते हैं. वे ‘कर्तव्य’ में हरियाणा की भाषा और संस्कृति के चित्रण को लेकर उठे विवादों पर अपनी राय खुलकर रखते हैं.
युद्धवीर से ये बातचीत सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं रहती. हरियाणा में ऑनर किलिंग की बदलती सामाजिक वास्तविकताओं, अपने बचपन में झेली बुलिंग, पारिवारिक समर्थन और बीएसएफ में रहे अपने पिता के बारे में भी खुलकर बोलते हैं. वे अग्निवीर योजना पर अपनी असहमति जताते हैं, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हैं और राजनीति पर भी बिना लाग-लपेट अपनी राय रखते हैं.
इंटरव्यू के दौरान वे अभिनेता सैफ अली खान, विक्रांत मैसी, सान्या मल्होत्रा और संजय मिश्रा के साथ काम करने के अनुभव साझा करते हैं. वह बताते हैं कि एक कलाकार के लिए 'इनसिक्योर' न होना कितना महत्वपूर्ण है और क्यों उन्हें लगता है कि भारतीय सिनेमा को नकल छोड़कर अपनी मौलिक कहानियों की ओर लौटना चाहिए.
देखिए उनसे ये खास बातचीत.
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