जैसे-जैसे हम पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जैसे बाहरी इलाकों की ओर बढ़ते हैं, वहां बस स्टॉप्स पर सुविधाएं कम होती दिखाई देती हैं.
दिल्ली सरकार के हीट वेव एक्शन प्लान में यात्रियों को राहत देने के लिए बसों और बस स्टॉप्स पर पीने के पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है. हालांकि, हमने जिन बसों और बस स्टॉप्स को देखा, उनमें से ज़्यादातर जगहों पर पीने के पानी की सुविधा नहीं थी.
जिन बसों में हमने सफर किया, उनमें कहीं भी पीने के पानी की सुविधा नहीं मिली. वहीं, जब तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच रहा है, तब यात्रियों के लिए पानी और छाया जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहद जरूरी हो जाती हैं..
पब्लिक फोरम के मुताबिक, दिल्ली में सर्वे किए गए हर 6 में से 1 बस स्टॉप पर निर्धारित बस शेल्टर नहीं है. दिल्ली के लगभग 5,000 बस स्टॉप्स में से 230 का सर्वे किया गया, जिसमें पाया गया कि 17 प्रतिशत बस स्टॉप्स पर उचित शेल्टर मौजूद नहीं हैं. थर्मल कैमरे में भी देखा गया कि सतह का तापमान काफी ज्यादा रहता है. कुछ जगहों पर यह 65 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है.
जैसे-जैसे हम पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जैसे बाहरी इलाकों की ओर बढ़ते हैं, वहां बस स्टॉप्स पर सुविधाएं कम होती दिखाई देती हैं. कई जगहों पर न तो शेल्टर हैं, न रूट की जानकारी, और न ही पीने के पानी की व्यवस्था. सेंट्रल दिल्ली के कई बस स्टॉप्स पर बेहतर शेल्टर, स्मार्ट पैनल और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं देखने को मिलीं. हालांकि, वहां भी पानी की व्यवस्था दिखाई नहीं दी.
कनॉट प्लेस पर लगभग एक घंटे से बस का इंतजार कर रहे यात्री चरण सिंह ने कहा, "यहां खड़े रहने के लिए कोई सुविधा नहीं है. हम काफी देर से इंतजार कर रहे हैं और इस गर्मी में बहुत परेशानी हो रही है."
ग्रीनपीस के कैंपेनर आजिक भट्ट ने कहा, "जैसे-जैसे हम दिल्ली के बाहरी इलाकों की ओर जाते हैं, बस स्टॉप्स पर सुविधाएं कम होती जाती हैं. वहां कंक्रीट की सतह ज्यादा है, जो गर्मी को सोखती भी है और वापस छोड़ती भी है. इसी वजह से सतह का तापमान काफी बढ़ जाता है."
वहीं, इस मामले पर हमने दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (डीटीआईडीसी) को भी संपर्क किया है. हालांकि, ख़बर प्रकाशित होने तक हमारे सवालों का जवाब नहीं आया है.
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
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