हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा के इस अंक में 'रिक्यूज़ल विवाद' पर विस्तार से बात हुई, जिसमें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने आबकारी मामले से हटने से इनकार कर दिया और जवाब में अरविंद केजरीवाल ने उनकी कोर्ट में पेश होने से मना कर दिया. इसके अलावा ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर चिंताओं पर भी विस्तार से बात हुई.
इस हफ्ते की अन्य बड़ी सुर्ख़ियों की बात करें तो दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कार्ति चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई एफआईआर रद्द करने की याचिका से खुद को अलग किया, गुजरात नगर निगम चुनावों में भाजपा ने किया सभी 15 सीटों पर कब्जा, चुनावी मैदान में एग्जिट पोल्स ने असम-बंगाल में भाजपा और दक्षिण में डीएमके व यूडीएफ की जीत का अनुमान जताया, सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर नए निर्देश देने से इनकार करते हुए एक अन्य मामले में दुष्कर्म पीड़िता को 30 हफ्ते के गर्भपात की अनुमति देकर 'शारीरिक स्वायत्तता' के अधिकार को बरकरार रखा, राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार परियोजना को 'विनाशकारी अपराध' बताया है, जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज डूबने से 9 पर्यटकों की मौत, देश के विभिन्न राज्यों में आंधी-बारिश के कारण हादसों में 32 लोगों ने जान गंवाई, अन्य घटनाक्रमों में, श्रीलंका में 110 किलो गांजे के साथ 22 बौद्ध भिक्षुओं की गिरफ्तारी, मणिपुर में 12 अवैध बंकरों का ध्वस्तीकरण और ओडिशा में एक बुजुर्ग द्वारा बैंक के बाहर बहन के अवशेष ले जाने की झकझोर देने वाली खबरें प्रमुख रहीं.
इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान प्रोफ़ेसर फैज़ान मुस्तफ़ा और वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से चर्चा में स्तंभकार आनंद वर्धन और विकास जांगड़ा शामिल हुए. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूजलॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा मामले से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “न्यायिक विमुखता यानी रिक्यूज़ल का कांसेप्ट है क्या जिसमें यह पूरी स्थति खड़ी हुई और अब अरविंद केजरीवाल ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया है और कहा है कि वे सत्याग्रह का रास्ता अपनाएंगे?”
इस विषय पर फैज़ान कहते हैं, “यह रिक्यूज़ल का लॉ जो सुप्रीम कोर्ट ने डेवेलप किया था अब कोर्ट खुद उसके खिलाफ जा रहा है. अक्सर न्यायाधीश जब रेक्यूज़ कर रहे हैं वह भी सवाल खड़े करता है और जब नहीं रेक्यूज़ कर रहे हैं उसपर भी प्रश्नचिह्न है. इस मामले में दोनों पक्षों ने न्यायिक प्रणाली को नुकसान पहुंचाया है.”
सुनिए पूरी चर्चा-

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