हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते मणिपुर हिंसा और बंगाल में जारी चुनावों को लेकर विस्तार से बात हुई.
इस हफ्ते की अन्य बड़ी सुर्ख़ियों की बात करें तो राज्यसभा में राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने संविधान के प्रावधानों के तहत खुद को भाजपा में विलय करने का ऐलान कर दिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ऐतिहासिक 93% और तमिलनाडु में 85.13% मतदान दर्ज किया गया. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है, जिसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी और सरकार ने इसे सुरक्षा की बड़ी चूक माना था. दिल्ली के कैलाश हिल्स में वरिष्ठ नौकरशाह की बेटी की बलात्कार के बाद उसके पुराने घरेलू नौकर ने हत्या कर दी. मणिपुर में हालात और जटिल हो गए हैं क्योंकि अब मैतेई-कुकी संघर्ष के बीच नागा और कुकी-ज़ो समुदायों में भी हिंसक झड़पें शुरू हो गई हैं.
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादित पोस्ट साझा कर भारत और चीन को नरक जैसी जगह बताने वाले बयानों का समर्थन करते हुए 'बर्थराइट सिटिज़नशिप' पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी द्वारा I-PAC दफ्तर में ED की रेड के दौरान जाने को 'केंद्र-राज्य विवाद' मानने से किया इनकार, रुपया कमजोर होने के कारण भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में छठे नंबर पर खिसका, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा, मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का 'पंचतत्व आंदोलन' जारी और पूर्व सीजेआई बी.आर. गवई की सपरिवार बागेश्वर धाम पहुंचकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात आदि ख़बरें भी हफ्ते भर सुर्ख़ियों में रहीं.
इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार स्मिता शर्मा और स्वतंत्र पत्रकार रूही तिवारी ने हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से चर्चा में प्रधान संपादक रमन किरपाल, और विकास जांगड़ा शामिल हुए. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूजलॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
राघव चड्ढा के बीजेपी में विलय पर टिप्पणी से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा ज़बरदस्त झटका है और राघव चड्ढा को लेकर बहुत समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे ‘आप’ से दूर जा रहे हैं, आगे कैसे यह राजनीति आकार लेगी और आम आदमी पार्टी इसे कैसे हैंडल करेगी यह देखने वाली बात होगी.”
इस विषय पर रूही कहती हैं, “यह एक रूटीन दल-बदल तो बिलकुल नहीं है क्योंकि पार्टी का एक बड़ा नेता गया है, इसमें समझने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी पहले से ही काफी कमज़ोर है .दिल्ली में हारने के बाद और अरविंद केजरीवाल भी पब्लिक आई से ग़ायब हैं, अरविंद केजरीवाल को देश के अन्य राज्यों में पार्टी को बढ़ाने के बजाए दिल्ली में एक मज़बूत संगठन बनाने की ज़रूरत थी, वे अतिमहत्वकांक्षी हो गए थे, उन्हें दिल्ली पर फोकस करना चाहिए.”
सुनिए पूरी चर्चा -

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