हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते कम वेतन और ख़राब कामकाजी परिस्थितियों को लेकर नोएडा में मज़दूरों के प्रदर्शन और लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक, जिसके अंतर्गत परिसीमन व महिला आरक्षण का मुद्दा भी शामिल है, जिसे लेकर विस्तार से बात हुई.
इसके अलावा सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ और वे ऐसा करने वाले पहले भाजपा नेता बने, दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने नए हलफनामे में जज के बच्चों का नाम लेकर उनके हटने की मांग की, ईडी ने पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में छापेमारी की जिसका स्वामित्व आप सांसद के पास है, नोएडा विरोध प्रदर्शन में अफवाह फैलाने और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के आरोप में 350 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए, नोएडा डीएम ने शांति की अपील करते हुए वेतन वृद्धि के उपायों की घोषणा की, छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 14 लोगों की मौत और 19 घायल हुए और टीसीएस नासिक मामले में आईटी कर्मचारी संगठन ने श्रम मंत्रालय से संपर्क कर पॉश अनुपालन ऑडिट की मांग की आदि ख़बरें भी हफ्ते भर सुर्ख़ियों में रहीं.
इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान सेवानिवृत्त डिप्टी चीफ श्रम आयुक्त अभिजीत कुमार और वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से चर्चा में स्तंभकार आनंद वर्धन और विकास जांगड़ा शामिल हुए. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूजलॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “मज़दूरों की जो मांगे हैं, उसमें सबसे बड़ी मांग न्यूनतम वेतन 20 हज़ार तक करने और कामकाज का समय 8 घंटे तक सीमित करना शामिल है, जो श्रम क़ानून हैं, जिसमें मज़दूरों के अधिकारों की सुरक्षा के सभी प्रावधान हैं लेकिन प्राइवेट सेक्टर जो आज के समय में सबसे ज़्यदा नौकरी दे रहा है वहां इन अधिकारों की सबसे ज़्यादा अनदेखी की जाती है. ऐसा क्यों है?”
इस विषय पर अभिजीत कहते हैं, “श्रम क़ानून में जो प्रावधान हैं, इन्हें लागू करवाने के लिए श्रम विभाग में निरीक्षकों की नियुक्ति होती है ताकि वह समय समय पर अपने अधिकार क्षेत्र का निरीक्षण करें लेकिन जो नया लेबर कोड आया है, उसके तहत निरीक्षक बिना किसी आदेश के स्वयं निरीक्षण नहीं कर सकते.”
सुनिए पूरी चर्चा -

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