हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते बढ़ती डिजिटल सेंसरशिप और कार्रवाई के दायरे में आए सरकार की आलोचना करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर विस्तार से बात हुई.
इसके अलावा राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र बल विधेयक ध्वनि मत से हुआ पास, विदेशी अंशदान अधिनियम लोकसभा में विपक्षी दलों के विरोध के कारण नहीं हो सका पेश, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में लगे अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का दिया आदेश, भारत की आबादी की गिनती के लिए 30 लाख अधिकारी एक साल तक करेंगे काम, भारत इस समय कर रहा है सबसे गंभीर गैस संकट का सामना, घरेलू एयरलाइन्स के ईंधन की कीमतों में भी हुई बढ़ोत्तरी, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उप नेता पद से हटाने और पार्टी के कोटे से बोलने की अनुमति न देने के लिए कहा, टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भारतीय जनता पार्टी का सदस्यता ली, बिहार के नालंदा में एक महिला के साथ सार्वजानिक रूप से छेड़छाड़ और बलात्कार के प्रयास का मामला सामने आया और अमेरिका ने ईरान के तेहरान और कर्ज़ को जोड़ने वाले पुल को उड़ाया आदि खबरें की इस हफ्ते की सुर्खियां बनीं.
इस बार चर्चा में बतौर मेहमान मोलिटिक्स इंडिया के संपादक नीरज झा, मीडिया नामा के फाउंडर और पत्रकार निखिल पाहवा और वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी शामिल हुए. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से सह संपादक शार्दूल कात्यायन और आनंद वर्धन ने चर्चा में हिस्सा लिया. वहीं, न्यूजलॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “सरकार की मीडिया पर निगरानी बढ़ती जा रही है, सूचना प्रौद्योगिकी कानून में संशोधन को लेकर भी बहुत सी चिंताएं हैं और इसके तहत केवल सूचना मंत्रालय नहीं बल्कि कई अन्य मंत्रालयों को यह अधिकार होगा कि वे आदेश दे सकते हैं, अब सवाल यह उठता है कि यह नए कानून पिछली बार के बदलावों से कितने अलग और ज़्यादा चिंताजनक क्यों हैं.”
इसके जवाब में निखिल कहते हैं, “सेंसरशिप का एक इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है जिसकी वजह से आज हमें समय-समय पर दिखता है कि लोगों के अकाउंट्स बंद किए जा रहे हैं, पोस्ट डिलीट हो रहे हैं और यह किसी एक लॉ के तहत नहीं हुआ. यह धीरे धीरे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया गया है.”

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