हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष के दायरे से भारत में गहराते ऊर्जा संकट और बीते हफ्ते में देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए तीन हादसों पर विस्तार से बात हुई.
इसके अलावा अमेरिका-इजऱायल से संघर्ष में इरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की हवाई हमले में मौत, खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद यूरोप में गैस की कीमतें 35 प्रतिशत तक बढ़ीं, पाकिस्तान द्वारा काबुल के एक अस्पताल पर किए हवाई हमले में 400 लोगों की मौत और 250 के घायल होने की सूचना, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी जगह पर प्रार्थना या सभा करने वालों को सुरक्षा मुहैया कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 25 सभी धर्मों को पूजा के लिए एकत्र होने का अधिकार देता है आदि खबरें भी इस हफ्ते की सुर्खियां बनी.
हफ्ते की अन्य सुर्खियों की बात करें तो इस हफ्ते देश की कई जगहों से आग लगने की ख़बरें आईं. जैसे दिल्ली के पालम, ओडिशा के कटक और मध्य प्रदेश के इंदौर में अलग-अलग कारणों से हादसे हुए. जिनमें कुल 26 लोगों की मौत हो गई. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया, निर्वाचन आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की घोषणा की और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एनएसए के तहत उनकी हिरासत रद्द होने के बाद रिहा हुए.
इस बातचीत में बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद् हृदयेश जोशी ने हिस्सा लिया. वहीं, न्यूज़लॉन्ड्री टीम से प्रधान संपादक रमन किरपाल, सह संपादक शार्दूल कात्यायन और विकास जांगड़ा ने चर्चा में हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “युद्ध का दायरा फैल रहा है. अब यह संघर्ष सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक-दूसरे देश की तेल आपूर्ति ढांचों को निशाना बनाने लगा है. ऐसे में भारत, जो इस युद्ध में सीधे को कहीं शामिल नहीं है लेकिन परोक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है, उसके लिए ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के नजरिए से आप कैसे देखते हैं?”
इस विषय पर हृदयेश कहते हैं, “ऊर्जा सुरक्षा की बात करें तो हम अपनी खपत का एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं. इसके साथ ही बीते 12-15 सालों में हमारी खपत भी कई गुणा तक बढ़ी है. इसलिए भारत की निर्भरता भी विदेशों पर बढ़ती जा रही है. ”
सुनिए पूरी चर्चा -

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