हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट, गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद और राज्य सरकारों द्वारा चुनाव से पहले दी जाने वाली रेवड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर विस्तार से बात हुई.
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने मुसलमानों को दिए जाने वाले जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर रोक लगाई, दिल्ली यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शनों पर एक महीने के लिए लगी रोक, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुआ कहा कि अगर राज्य सरकारें चुनाव से पहले जनता के बीच रेवड़ी बांटती रहेंगी तो उसके पास विकास के लिए धन कहां से बचेगा, एनबीडीएसए ने फ़र्ज़ी खबर चलाने को लेकर ज़ी न्यूज़ पर लगाया जुर्माना, फेमा के नियमों के उल्लंघन के चलते न्यूज़क्लिक के ऊपर 120 करोड़ और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ पर 64 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, एनजीटी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को मिली पर्यवारण से जुडी मंज़ूरी के खिलाफ की गई अपीलों को किया ख़ारिज और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- दिल्ली है गैस चैम्बरै आदि ख़बरें भी हफ्तेभर की सुर्खियों में शामिल हैं.
इस बातचीत में बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी और दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर आभा देव शामिल हुईं. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से स्तंभकार आनंद वर्धन और सह संपादक शार्दूल कात्यायन ने चर्चा में हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “एआई समिट या एआई हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है और इस बीच उच्च शिक्षा के प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस की भूमिका क्या है, वह किस तरह से इसे आगे बढ़ा रहे हैं?”
इस विषय पर आभा कहती हैं, “एआई को लेकर हमारे छात्रों की तैयारी उस ओर होनी चाहिए, लेकिन क्या एआई समिट करने से हम उस मक़ाम पर पहुंच पाएंगे जहां हम जाना चाहते हैं? सरकार ने क्या एआई, मशीन लर्निंग इत्यादि में कोई खास निवेश किया है?”
सुनिए पूरी चर्चा -

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