हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते गिग वर्कर्स की हड़ताल के बाद ऑनलाइन कंपनियों के 10 मिनट के वादे पर सरकार ने दिए रोक लगाने के निर्देश और अमेरिका द्वारा विश्वभर में फैलाई गई अनिश्चितता को लेकर विस्तार से बात हुई.
इसके अलावा महाराष्ट्र में बीएमसी के चुनाव, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए जारी किया नोटिस और ईडी के अफसरों पर की गई एफआईआर पर लगाई रोक, तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी टीवीके के कार्यक्रम में हुई पिछले साल भगदड़ के मामले में पार्टी अध्यक्ष विजय से की सीबीआई ने पूछताछ, डेनमार्क की महिला बैडमिंटन खिलाड़ी मिया ब्लिचफेल्ट और विश्व के तीसरे नंबर के बैडमिंटन प्लेयर डेनमार्क के एंडरसन एंटोनसेन ने भारत में होने वाले बैडमिंटन टूर्नामेंट से यहां की ख़राब हवा के चलते नाम लिया वापस, शक्सगाम घाटी में चीन की ओर से चल रहे निर्माण कार्यों पर भारत ने जताई आपत्ति, मध्यप्रदेश के बैतूल ज़िले में मदरसा बनाने की अफवाह के चलते प्रशासन ने चलाया एक निर्माणाधीन स्कूल पर बुलडोज़र, सिंगापुर पुलिस ने बताया कि गायक ज़ुबिन गर्ग अपने निधन के समय बेहद नशे में थे और पानी में जाने से पहले लाइफ सेविंग जैकेट पहनने से मना कर दिया, ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और अमेरिका द्वारा 75 देशों के लिए वीज़ा सेवाएं निलंबित आदि ख़बरें भी हफ्तेभर की सुर्खियों में शामिल हैं.
इस बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार कल्लोल भट्टाचार्य और डॉक्टर आकृति भाटिया शामिल हुईं. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से सह संपादक शार्दूल कात्यायन और विकास जांगड़ा ने चर्चा में हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “अमेरिका का जो रुख है अभी, शीत युद्ध के बाद से इतना अनिश्चित और इतना असुरक्षित दुनिया ने कभी महसूस नहीं किया, इस समय हम अपने को पाते हैं अमेरिका ने ग्रीनलैंड में एंट्री कर ली है, रूस तीन साल से यूक्रेन से लड़ रहा है, दूसरी तरफ ताइवान है, ऐसे में दुनिया किस ओर जा रही है?”
इस विषय पर कल्लोल कहते हैं, “सबसे महत्वपूर्ण बात जो हमें याद रखनी चाहिए कि हम जिन देशों की बात कर रहे हैं यह लोकतांत्रिक देश हैं, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप कोई जंग फ़तेह करके नहीं बल्कि एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीत कर आए हैं, फिर आखिर ऐसा क्या हो गया कि लोकतांत्रिक देश तानाशाही प्रवृति की ओर बढ़ रहे हैं. और इन अधिनायकवादी रुझानों को लोकतंत्र का सपोर्ट हासिल है. यह बहुत कुछ मिलता है हिटलर के साथ, हिटलर भी चुनाव जीतकर आए थे.”
सुनिए पूरी चर्चा -

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