वोटर लिस्ट पर चली एसआईआर की कैंची, लोगों का दावा- पीढ़ियों से रह रहे, ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं

जाहिदपुर जैसे एक गांव से ही 1800 से ज्यादा वोट कट जाने के बाद से न सिर्फ राजनीतिक पार्टियां बल्कि पहले से मतदाता के तौर पर दर्ज लोग भी परेशान नजर आए. 

WrittenBy:अनमोल प्रितम
Date:
   

उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद पहली ड्राफ्ट सूची जारी कर दी है. इसके बाद पहले से मतदाता सूची में मौजूद करीब 2 करोड़ 89 लाख मतदाता कम हो गए है यानि उनके वोट अब कट गए हैं. 

इतनी बड़ी संख्या में वोट कट जाने के बाद से न सिर्फ राजनीतिक पार्टियां बल्कि पहले से मतदाता के तौर पर दर्ज लोग भी परेशान हैं. हालांकि, अभी यह ड्राफ्ट है और जिन लोगों के नाम इसमें शामिल नहीं हैं वो अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं. चुनाव आयोग की ओर से इसके लिए फिलहाल एक महीने का वक्त दिया गया है. 

उत्तर प्रदेश का मेरठ उन जिलों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में बाहर हैं. जानकारी के मुताबिक, जिले के कुल 6 लाख 65 हजार 647 मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आया है.

चुनाव आयोग का तर्क है कि जिन वोटरों के नाम इस सूची में जगह नहीं बना पाए हैं, वो या तो मृत हैं या फिर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं या फिर बूथ लेवल अधिकारी उन तक पहुंच नहीं पाए यानि अनट्रेसेबल हैं. हालांकि, चुनाव आयोग के दावों के उलट हमें कुछ लोग ऐसे भी मिले जो जिंदा भी हैं और उसी पते पर रह भी रहे हैं. साथ ही उनके परिवार में कुछ लोगों के नाम इस सूची में जगह बना पाए हैं लेकिन उनका नाम शामिल नहीं है. 

मेरठ के जाहिदपुर में हमें कुछ ऐसे ही मतदाता मिले. जिनका नाम इस ड्राफ्ट सूची में नहीं है जबकि उनका दावा है कि वो पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं. 

ऐसे ही एक बुजुर्ग अशरफ खान कहते हैं, “मैं करीब 70 साल का हो गया हूं और हमेशा से वोट देते आया हूं. यहां तक कि लोकसभा चुनाव में भी मैंने वोट किया लेकिन फिर भी मेरा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है.”

हालांकि, अशरफ के उनके परिवार के बाकी सदस्यों का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में है लेकिन उनका नहीं है. अशरफ का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में भी है, जिसे चुनाव आयोग ने एक प्रमुख आधार बनाया हुआ है. 

हालांकि, ऐसे अशरफ अकेले नहीं हैं बल्कि जाहिदपुर गांव में कुछ और लोग भी हैं. एस आई आर से पहले इस गांव में कुल 6096 वोटर थे लेकिन अभी केवल 4279 वोट बच्चे यानि 1817 वोट काट दिए गए हैं. 

देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट. 

बीते पच्चीस सालों ने ख़बरें पढ़ने के हमारे तरीके को बदल दिया है, लेकिन इस मूल सत्य को नहीं बदला है कि लोकतंत्र को विज्ञापनदाताओं और सत्ता से मुक्त प्रेस की ज़रूरत है. एनएल-टीएनएम को सब्स्क्राइब करें और उस स्वतंत्रता की रक्षा में मदद करें.

Also see
article imageराहुल का ‘हाइड्रोजन बम’: हरियाणा में 5 तरीकों से हुई वोट चोरी, 25 लाख फर्जी वोटर का दावा
article imageस्पेशल इंटेसिव रिवीजन: वोटर लिस्ट से गायब होने का डर!

Comments

We take comments from subscribers only!  Subscribe now to post comments! 
Already a subscriber?  Login


You may also like