हरियाणा में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सड़कों पर किसान, बीजेपी और जेजेपी नेताओं की गांवों में नो एंट्री

मानेसर के कासन में हरियाणा सरकार 1810 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने वाली है. जिसको लेकर तीन महीने से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.

WrittenBy:बसंत कुमार
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सांगवान न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए यह बात स्वीकार करते हैं कि किसानों को 2011 के हिसाब से मुआवजा मिल रहा है. वे कहते हैं, ‘‘किसानों की जमीन का जो अवार्ड सुनाया गया है वो कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सुनाया गया है. किसानों का पक्ष सुनने के बाद ही अवार्ड सुनाया गया है. दूसरी बात यहां के किसान मुख्यमंत्री जी से भी दो बार मिल चुके हैं. सीएम साहब ने भी इनको ऑफर दिया था. (ऑफर क्या था यह सांगवान नहीं बताते) किसान उस ऑफर से संतुष्ट थे लेकिन उसके बाद इनके दिमाग में कुछ और आ गया. तब से ये प्रदर्शन कर रहे हैं.’’

मुआवजे के सवाल पर सांगवान कहते हैं, ‘‘मुआवजा किसानों को पुराने हिसाब से ही दिया जा रहा है. क्योंकि सरकार ने यह जमीन अभी नहीं ली है. 2011 में इसका अधिग्रहण हुआ था. बाद में मामला कोर्ट में चला गया. उसके बाद सरकार अपनी प्रक्रिया पूरा कर अधिग्रहण करेगी.’’

किसानों की जमीन का अधिग्रहण, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत हुआ है या पुराने कानून के तहत. क्योंकि किसानों का आरोप है कि सरकार 1894 एक्ट के तहत जमीन का अधिग्रहण कर रही है. इस पर सांगवान कहते हैं, ‘‘ये किसान सीएम साहब से मिल चुके हैं. उस दौरान सीएम साहब ने कहा कि जो मार्किट रेट हैं, उसके आसपास आपको मुआवजा दिलाने की कोशिश करेंगे. अब समझ से परे है कि ये आंदोलन क्यों कर रहे हैं. इस पूरे विवाद का हल बातचीत से ही निकलेगा.’’

महेंद्र पटवारी इसे गलत बताते हैं. उनके मुताबिक जमीन का अधिग्रहण, 2013 में बने कानून के तहत होना चाहिए. वे कहते हैं, ‘‘इसी आधार पर हम जमीन के अवार्ड को चुनौती सुप्रीम कोर्ट में देंगे.’’

बीजेपी नेताओं से ग्रामीणों में नाराजगी

सिर्फ कासन गांव में नहीं बल्कि आसपास के लगभग 25 गांवों में बीजेपी और जेजेपी के नेताओं के पूर्ण बहिष्कार के बैनर लगे हुए हैं. मंगलवार को पंचायत में बीजेपी नेताओं पर लोगों ने नाराजगी जाहिर की. मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने कहा, बीजेपी की सरकार बनवाने में दक्षिणी हरियाणा ने बड़ी भूमिका निभाई.

कासन के रहने वाले हेमचंद्र यादव कहते हैं, ‘‘हमारे यहां से बीजेपी के विधायक हैं. हमारे सांसद राव इंद्रजीत सिंह बीजेपी से हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं. बगल के जिला फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर बीजेपी के सांसद हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं. बीजेपी संसदीय समिति में शामिल होने वाली सुधा यादव भी हमारे यहां से हैं लेकिन आज हमारी कोई नहीं सुनने वाला है.’’

सिर्फ कासन गांव में नहीं बल्कि आसपास के लगभग 25 गांवों में बीजेपी और जेजेपी के नेताओं के पूर्ण बहिष्कार के बैनर लगे हुए हैं.

पंचायत में आप नेता नवीन जयहिंद, कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अजय यादव समेत दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं ने इस प्रदर्शन को समर्थन दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जबरदस्ती उनसे जमीन नहीं छीन सकती है. अगर वो ऐसा करती है तो अहीरवाल (दक्षिणी हरियाणा) से बीजेपी का एक पार्षद भी नहीं जीत पाएगा.

रेवाड़ी से पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री अजय यादव ने न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहा कि हमारे यहां के युवा सेना में जाते थे या खेती करते थे. अग्निवीर योजना लाकर सरकार ने युवाओं का सेना में जाने का सपना तोड़ दिया और जमीन लेकर खेती से भी दूर करना चाहती है. मैं खट्टर साहब से मांग करता हूं कि वे किसानों की बात सुनें और उनकी मांग के मुताबिक फैसले लें. यह प्रदेश के हित में होगा.’’

जमीन बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रोहतास यादव बताते हैं, ‘‘हम तीन महीने से बैठे हुए हैं. सरकार अगर नहीं मानती तो हम आगे भी बैठेंगे. सरकार बार-बार हमें उजाड़ नहीं सकती है. हम सबके पास मदद के लिए गए पर कोई सुनने वाला नहीं है.’’

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