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एनएल चर्चा 302: बेघरों की जान लेती ठंड और शिक्षा की बदहाली बयां करती 'असर' की रिपोर्ट

हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्ते भर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.

     
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इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय दिल्ली में ठंड के कारण मरते बेघर लोग, रिपोर्टर्स कलेक्टिव की एक रिपोर्ट के अनुसार- प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने की राज्यों की टैक्स हिस्सेदारी में कटौती करने की कोशिश और देश में शिक्षा के हालातों पर जारी एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन (असर) की रिपोर्ट- जिसके मुताबिक, देश में 14 से 18 वर्ष की आयु के लगभग 42.7 फीसदी छात्र अंग्रेजी में वाक्य पढ़ने में असमर्थ आदि रहे.

गुलमर्ग (कश्मीर) में जनवरी के पहला सप्ताह तक नहीं हुई बर्फबारी, उड़ान में देरी होने पर यात्री द्वारा पायलट को पीटे जाने और रेलवे टीटी द्वारा एक गरीब यात्री को पीटे जाने के वीडियो हुए वायरल, विश्व आर्थिक मंच के सर्वेक्षण के अनुसार- गलत सूचना और दुष्प्रचार बनेगा आने वाले वक्त में सबसे बड़ी चुनौती और मणिपुर के मोरेह में उग्रवादियों से मुठभेड़ में अब तक 5 लोगों की मौत आदि ख़बरें भी हफ्तेभर तक सुर्खियों में छाई रही.  

इसके अलावा नवंबर में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि घटकर आठ महीने में अपने निचले स्तर (2.4) पर पहुंची, सरकार ने सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च का एफसीआरए लाइसेंस किया रद्द और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान असम में हिमंत बिश्वा सरमा को बताया सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री आदि ख़बरें भी हफ्ते की सुर्खियों में शामिल रहीं. 

वहीं, पाकिस्तान और ईरान ने एक दूसरे के आतंकी ठिकानों पर किए हमले, मध्य प्रदेश में लाडली बहन योजना के लाभार्थियों में गिरावट, शाही ईदगाह के सर्वेक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक और खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचकर हुई 9.5 प्रतिशत आदि ख़बरें भी हफ्ते की अन्य सुर्ख़ियों में शामिल रहीं.

इस हफ्ते चर्चा में सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट के कार्यकारी निदेशक सुनील कुमार आलेडिया शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से मुख्य संपादक रमन किरपाल, हृदयेश जोशी और स्तंभकार आनंद वर्धन ने चर्चा में हिस्सा लिया. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा के प्रमुख विषय दिल्ली में भीषण ठंड से बड़ी संख्या में जद्दोजहद करते बेघर लोग और इससे होती मौतों को लेकर अतुल सवाल करते हैं, “कुछ लोग कंबल बांट कर या अन्य किसी तरीके से मदद करने की कोशिश करते हैं लेकिन जितनी बड़ी संख्या है, उसको लेकर सब कुछ तभी ठीक हो सकता है, जब सरकार इस पर ध्यान देकर बड़े पैमाने पर कोई रोडमैप या ब्लूप्रिंट बनाए. ऐसे में इससे निपटने के क्या तरीके हो सकते हैं और मौजूदा हालात क्या हैं?”

इसके जवाब में सुनील कुमार आलेडिया कहते हैं, “1976 में जनगणना विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में सड़कों पर रहने वाले 19,163 लोगों का सर्वे किया गया और तब 12 शेल्टर होम हुआ करते थे. लेकिन उसके बाद से दिल्ली में कोई सर्वे नहीं किया कि यहां कि सड़कों पर कितने लोग हैं. फिर साल 2000 में एक रिपोर्ट आई कि दिल्ली में 24 हजार बेघर लोग हैं. फिर 2010-11 में जनगणना की एक और रिपोर्ट आती है कि 47 हजार लोग हैं. 2014 में दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड की एक रिपोर्ट आती है कि 16,760 लोग दिल्ली की सड़कों पर हैं. दिल्ली में वर्तमान में 82 स्थायी बिल्डिंग और 110 पोर्टेबल केबिन हैं. फिर जो स्थायी बिल्डिंग थी, उसको भी कम कर दिया गया या किसी विधायक का कार्यालय बना दिया गया या उनको अस्थायी बिल्डिंग में बदल दिया गया. अभी जी-20 के समय 9 शेल्टर होम आधी रात को ही तोड़ दिए गए बिना किसी सूचना के.”          

सुनिए पूरी चर्चा-

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