उत्तर प्रदेश: ‘‘समय पर सीएमओ का रेफरल लेटर मिल गया होता तो मेरे पिता जिंदा होते’’

सीएमओ द्वारा रेफरल लेटर मिलने के बाद ही कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की प्रक्रिया बन रही इलाज में बाधा. समय से लेटर नहीं मिलने से कई मरीजों का इलाज के बगैर हुई मौत.

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उत्तर प्रदेश: ‘‘समय पर सीएमओ का रेफरल लेटर मिल गया होता तो मेरे पिता जिंदा होते’’
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स्वप्निल रस्तोगी और विदित श्रीवास्तव से प्रोफेसर अनुज कुमार (बदला नाम) थोड़े भाग्यशाली हैं. सरकारी कर्मचारी होने के कारण ये अपना नाम नहीं बताते हैं. इनकी सास के साथ वो सब हुआ जो स्वप्निल के पिता और विदित की नानी के साथ हुआ. बेड नहीं मिलने की स्थिति में वो घर पर ही रहीं और इलाज कराती रहीं. जबकि खुद सीएमओ के कार्यालय ने उन्हें गंभीर मरीज की कैटेगरी में रखा था. टेस्ट के तीन दिन बाद जब बेड मिला तो कुमार की सास ने खुद ही जाने से इंकार कर दिया क्योंकि वो लगातार टेलीविजन पर अस्पतालों की बदहाल तस्वीरें देख रही थीं. आज भी उनका इलाज घर में ही चल रहा है. अभी वो निगेटिव नहीं हुई हैं.

कुमार कहते हैं, ‘‘काफी महंगा ऑक्सीजन खरीदकर लाना पड़ रहा है. सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है.’’

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान इस व्यवस्था की जमकर आलोचना करते हैं. वे कहते हैं, ‘‘सीएमओ के नाम का संस्थान कब का बर्बाद हो चुका है. ऐसे में उसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने का क्या मतलब है. हर बड़े अस्पताल में चीफ मेडिकल सुप्रीटेंडेट होता है. उसे क्यों न जिम्मेदारी दे दी जाए? आप ऐसा कर सकते हैं कि 100 बेड वाले अस्पताल की जिम्मेदारी सीएमओं को दे सकते हैं और उससे ज़्यादा के जो अस्पताल है वो खुद से तय करेंगे. इससे सीएमओं पर भी दबाव कम होगा.’’

इस व्यवस्था की कमी को लेकर लगातार आलोचना होती रही. जिसके बाद ऐसी खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश सरकार इसमें बदलाव कर हर अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने जा रही है.

रॉयटर्स इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया, ‘‘सरकार इस सप्ताह सीएमओ रेफरल व्यवस्था को समाप्त करने की योजना बना रही है. इसकी जगह पर हर कोविड अस्पताल में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. यही अधिकारी तय करेंगे की मरीज को भर्ती करने की जरूरत है या नहीं.''

न्यूजलॉन्ड्री ने इस संबंध में जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश सूचना प्रमुख नवनीत सहगल से संपर्क किया लेकिन वे व्यस्त थे, उन्होंने बाद में बात करने के लिए कहा. हमने उन्हें दोबारा फोन किया लेकिन बात नहीं हो पाई. हमने इस संबंध में उन्हें सवाल भेज दिए हैं. साथ ही अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को भी सवाल भेजे हैं लेकिन रिपोर्ट लिखे जानेतक उनका कोई जवाब नहीं आया है. जवाब आने पर इस खबर में शामिल कर लिया जाएगा.

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