आपके मीडिया का मालिक कौन है: जागरण समूह और भारत के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले दैनिक की कहानी

न्यूज़लॉन्ड्री की यह सीरीज भारत के प्रमुख समाचार संगठनों के स्वामित्व को समझती है.

WrittenBy:पूजा भूला
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वर्तमान में समूह के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण के अलावा इसके पास दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्कार, पंजाबी जागरण, शिक्षा और करियर समाचार के लिए जागरण जोश और जागरण जोश प्लस, संध्या जागरण, साहित्यिक पत्रिका पुनर्नवा और मासिक महिला पत्रिका जागरण सखी हैं. सखी का एक संस्करण दिल्ली से निकलता है. समूह का सुबह का द्विभाषी अखबार आई नेक्स्ट, 18 से 35 साल की उम्र वालों के लिए है, और इसके उत्तर भारत के छोटे शहरों में 13 संस्करण हैं. जेपीएल के साप्ताहिक अंग्रेजी टैब्लॉयड सिटी प्लस के संस्करण तीन शहरों में हैं. साथ ही एमआईएल से प्राप्त प्रकाशनों में मिड-डे, संडे मिड-डे, मिड-डे (गुजराती) के साथ-साथ उर्दू अखबार इंकलाब भी है, जिसके सात शहरों में संस्करण हैं. नई दुनिया चार शहरों में उपलब्ध है.

जब से जागरण ने रेडियो सिटी का अधिग्रहण किया है, यह रेडियो चैनल सात राज्यों के 20 एफएम स्टेशनों से बढ़कर 39 शहरों में पहुंच गया है.

इसके डिजिटल प्रभाग जागरण न्यू मीडिया में मौजूदा प्रकाशनों के ऑनलाइन संस्करणों के अलावा herzindagi.com, vishvasnews.com और onlymyhealth.com शामिल हैं. इसमें पॉडकास्ट, करंट अफेयर्स और अन्य प्रकाशनों के लिए एप भी हैं. जागरण इंटरनेशनल भारत के बाहर जेपीएल के उत्पादों का विपणन करता है.

स्वामित्व

पिछले तमाम वर्षों से जागरण समूह का नेतृत्व और स्वामित्व पूरन चंद्र गुप्ता के परिवार के पास रहा है. पीसी गुप्ता के निधन के बाद उनके बड़े बेटे नरेंद्र मोहन ने पदभार संभाला. उन्हें प्रिंट मीडिया में विदेशी निवेश हेतु सक्रिय रूप से प्रचार करने के लिए जाना जाता है. उनके बाद समूह की बागडोर योगेंद्र मोहन ने संभाली, जो कला और संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं. कानपुर की लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी के पीछे उन्हीं की प्रेरणा थी. वर्तमान में महेंद्र मोहन, समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं. पीसी गुप्ता के तीन और बेटे - देवेंद्र मोहन, धीरेंद्र मोहन और शैलेंद्र मोहन - जेपीएल के पूर्णकालिक निदेशक हैं.

परिवार की अगली पीढ़ी भी समूह में शामिल हो गई है. नरेंद्र मोहन के बड़े बेटे संजय, आज एक पूर्णकालिक निदेशक, सीईओ और साथ ही प्रधान संपादक भी हैं. उनके छोटे बेटे के साथ-साथ अन्य पांच भाइयों के बच्चे भी निदेशक पद पर हैं.

जेपीएल की होल्डिंग कंपनी जागरण मीडिया नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के पास 68.56% शेयर्स हैं, (महेंद्र मोहन और उनके बेटे द्वारा शुरू की गई) वीआरएसएम एंटरप्राइजेज एलएलपी, जो प्रमोटर समूह का हिस्सा है, के पास 0.19% हिस्सेदारी है. परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत शेयरों को मिलाकर, प्रमोटरों और प्रमोटर समूह की कुल हिस्सेदारी 69.41% है.

शेष 30.59% हिस्सेदारी जनता के पास है. सार्वजनिक शेयरधारक संस्थानों में एचडीएफसी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड की 9.62% हिस्सेदारी प्रमुख है. प्रवासी भारतीय और कुछ निगम भी महत्वपूर्ण शेयरधारक हैं.

जेपीएल में परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत हिस्सेदारी नगण्य है, लेकिन चूंकि उनके पास जागरण मीडिया नेटवर्क का 100% हिस्सा है, जो सबसे बड़ा शेयरधारक है, परिवार अप्रत्यक्ष रूप से शेयरों का बड़ा हिस्सा रखता है.

लेकिन जागरण मीडिया नेटवर्क पर किसी एक व्यक्ति का नियंत्रण नहीं है. सारे शेयर, परिवार के 18 सदस्यों के बीच बंटे हुए हैं और व्यक्तिगत मालिकाना हक बहुत कम है. छह भाइयों के परिवारों के बीच विभाजन लगभग बराबर है.

नरेंद्र मोहन की पत्नी और बच्चों के पास कुल 17.65 प्रतिशत शेयर हैं. योगेंद्र मोहन के परिवार के पास 17.64 फीसदी, महेंद्र मोहन व परिवार के पास 14.11 फीसदी, धीरेंद्र मोहन व परिवार के पास 16.17 फीसदी, देवेंद्र मोहन व परिवार के पास 16.19 फीसदी और शैलेंद्र मोहन व परिवार के पास जेएमएन में 16.19 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

गुप्ता परिवार राजनीति में भी सक्रिय रहा है. नरेंद्र मोहन उत्तराखंड से भाजपा के राज्यसभा सांसद थे, जिन्हें लालकृष्ण आडवाणी अपना निजी मित्र मानते थे. उनकी मृत्यु के एक साल बाद 2003 में उनकी स्मृति में सरकार द्वारा एक डाक टिकट जारी किया गया था. गौरतलब है कि उनके पिता की स्मृति में डाक टिकट इसके नौ साल बाद जारी किया गया.

महेंद्र मोहन भी 2006 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर यूपी से राज्यसभा सांसद चुने गए थे. इस उद्योग के कई निकायों के महत्वपूर्ण पदों पर भी गुप्ता परिवार का कब्ज़ा है.

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इसके निदेशकों में पूर्व अध्यक्ष और जेएलएल के कंट्री हेड (जोन्स लैंग लासाल) अनुज पुरी, प्रसिद्ध पीआर एजेंसी परफेक्ट रिलेशंस के संस्थापक दिलीप चेरियन, आईआईएम अमृतसर की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य जयंत डावर, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड के पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष रवि सरदाना, जीएफएल, आईनॉक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और कई अन्य उद्योगों में निदेशक शैलेंद्र स्वरूप और आईपीजी मीडिया ब्रांड्स इंडिया के सीईओ व ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के निदेशक शशिधर सिन्हा जैसे कुछ प्रमुख नाम शामिल हैं.

आय का लेखा-जोखा

समूह के प्रिंट और डिजिटल राजस्व को, संयुक्त वित्तीय स्टेटमेंट्स में साथ दिखाया गया है. महामारी के बाद राजस्व में गिरावट के बावजूद यह विभाग तगड़ा मुनाफा कमा रहा है. वित्तीय वर्ष 2022 में जेपीएल की प्रिंट और डिजिटल आय, 2019 में 1,903 करोड़ रुपए की तुलना में 29 प्रतिशत कम है. लेकिन तब भी 2019 के मुकाबले, 31 प्रतिशत गिरावट के बावजूद मुनाफा 288 करोड़ रुपए है.

2019 से 2020 तक, रेडियो के राजस्व में 24 प्रतिशत और मुनाफे में 50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. दो साल से लगातार घाटा हो रहा है. कंपनी को 2021 में 64.80 करोड़ रुपए और 2022 में 42 करोड़ रुपए का घाटा हुआ.

समूह के अन्य संभावित आय स्रोतों में मार्केटिंग सेवाओं से प्राप्त राजस्व शामिल हो सकता है, क्योंकि जेपीएल के वित्तीय विवरण में कहा गया है कि कंपनी की अन्य गतिविधियों में आउटडोर विज्ञापन व्यवसाय, इवेंट मैनेजमेंट, सक्रियण व्यवसाय और डिजिटल व्यवसाय शामिल हैं.

यहां भी राजस्व में घाटा हुआ, जो 2020 में 120 करोड़ रुपए से घटकर 2021 में 56.65 करोड़ रुपए हो गया. लेकिन 2022 में इसमें सुधार भी हुआ और राजस्व बढ़कर 98 करोड़ रुपए हो गया. इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2021 में 10 करोड़ के नुकसान को पाटते हुए इसने वित्तीय वर्ष 2022 में 2.5 करोड़ रुपए का मुनाफा दिखाया है.

जेपीएल की सहायक कंपनियां मिडडे इनफोमीडिया लिमिटेड (एमआईएल), म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड (एमबीएल), लीट ओओएच मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, एक्स-पर्ट पब्लिसिटी प्राइवेट लिमिटेड और एमएमआई ऑनलाइन लिमिटेड हैं. जेपीएल की जीडी-गुप्ता-परिवार द्वारा संचालित जागरण पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड में 25.71 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जागरण प्रकाशन (एमपीसी) प्राइवेट लिमिटेड में 32.14 प्रतिशत हिस्सेदारी है साथ ही जेपीएल के पास दोनों में 50 प्रतिशत मतदान का अधिकार है.

प्रकाशन के समय, जागरण प्रकाशन लिमिटेड की कुल मार्केट वैल्यू 1724 करोड़ थी.

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