असमानता का नया मॉडल: धनवान दुनिया में पैदा होंगे अत्यधिक गरीब

भारत में अमीर-गरीब की खाई बढ़ी. कोरोना काल के दौरान देश के 84% परिवारों की कमाई घटी, लेकिन अरबपति 102 से बढ़कर 142 हो गए.

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आर्थिक मॉडल से उपजी असमानता

आय और सम्पत्ति की असमानता में भारत दुनिया के तमाम देशों में एक अलग उदाहरण है. उदाहरण के लिए नीचे की 50 प्रतिशत आबादी की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 53,610 रुपए जबकि शीर्ष 10 प्रतिशत व्यक्ति इसका 20 गुना कमाते हैं. इसी तरह देश के शीर्ष एक प्रतिशत लोगों के पास राष्ट्रीय आय के पांचवें हिस्से से अधिक है जबकि निचले 50 प्रतिशत के पास केवल 13 प्रतिशत है जो हाल के दशकों में कम हो रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, “1980 के दशक के मध्य से विनियमन और उदारीकरण नीतियों ने दुनिया में आय और धन असमानता में सबसे अधिक वृद्धि देखी है. समृद्ध अभिजात वर्ग के साथ भारत एक गरीब और बहुत असमान देश के रूप में उभरा है.”

भारत का सम्पत्ति वितरण संकेत देता है कि असमानता तेजी से बढ़ रही है. भारत में एक परिवार के पास औसतन 9,83,010 रुपए की संपत्ति है, लेकिन नीचे के 50 प्रतिशत से अधिक की औसत संपत्ति लगभग नगण्य या 66,280 रुपए या भारतीय औसत का सिर्फ 6 प्रतिशत है.

दुनियाभर में यह आबादी का वह समूह है जो धन से वंचित है या जिनके पास विरासत में पूंजी नहीं है. अमीर देशों के मामले में भी भले ही इस समूह के पास गरीब देशों के समूह की तुलना में अधिक धन है, लेकिन अगर कोई अपने उच्च स्तर के ऋण को समायोजित करता है, तो शुद्ध सम्पत्ति का मान शून्य के करीब होगा.

रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि यह स्थिति विशेष रूप से भविष्य की आय असमानता के स्तर के लिए चिंताजनक है, क्योंकि संपत्ति के स्वामित्व में असमानता का पूंजीगत आय के माध्यम से आय असमानता पर सीधा प्रभाव पड़ता है और अप्रत्यक्ष परिणाम असमान विरासत के माध्यम से होता है.

निजी क्षेत्र में धन का ऐसा संकेंद्रण है कि वे सरकार से अधिक सम्पत्ति और आय रखते हैं. आसानी से समझने के लिए यूं कहें कि सरकारें गरीब हो गई हैं. पिछले चार दशकों में देश तो अमीर बन गए हैं जबकि उनकी सरकारों ने लगातार संपत्ति में गिरावट दर्ज की है. पिछले पांच दशकों में सभी देशों में सार्वजनिक संपत्ति या सरकारों के पास संपत्ति में गिरावट आई है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “सार्वजनिक अभिकरणों के पास सम्पत्ति का हिस्सा शून्य के करीब या अमीर देशों में नकारात्मक है, जिसका अर्थ है कि धन की समग्रता निजी हाथों में है.” 2020 तक अमीर देशों में निजी संपत्ति का मूल्य 1970 के स्तर से दोगुना हो गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “वास्तव में, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय संपत्ति में पूरी तरह से निजी संपत्ति होती है, क्योंकि शुद्ध सार्वजनिक संपत्ति नकारात्मक हो गई है.” चीन और भारत जैसे देशों में जब से उन्होंने विनियमित आर्थिक मॉडल को त्याग दिया और मुक्त बाजार को अपनाया है, निजी सम्पत्ति में वृद्धि अमीर देशों की तुलना में तेज हो रही है.

(डाउन टू अर्थ से साभार)

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