किसान संगठनों के "भारत बंद" को हिंदी के बड़े अखबारों ने किया नजरअंदाज!

किसान संगठनों के भारत बंद को देश के बड़े हिंदी अखबारों ने किस तरह दिखाया है. यह जानने के लिए राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होने वाले हिंदी अखबारों के पहले पेज का विश्लेषण.

किसान संगठनों के "भारत बंद" को हिंदी के बड़े अखबारों ने किया नजरअंदाज!
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केंद्र के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार 8 नवंबर को किसान संगठनों ने "भारत बंद" का आह्वान किया था. इस दौरान राजधानी दिल्ली सहित देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे और ट्रेन समेत यातायात को बाधित किया. अखिल भारतीय बंद को अधिकतर विपक्षी दलों और कई ट्रेड यूनियनों का समर्थन भी मिला था. गौरतलब है कि दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान पिछले 11 दिन से कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

किसान संगठनों के इस भारत बंद को देश के बड़े हिंदी अखबारों ने किस तरह दिखाया. ये जानने के लिए हमने राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होने वाले कुछ बड़े हिंदी अखबारों के पहले पेज का विश्लेषण किया.

दैनिक जागरण

अगर दैनिक जागरण की बात करें तो देश का नंबर एक होने का दावा करने वाला यह अखबार देशव्यापी बंद की खबर को पूरी तरह पचा गया. पहले पेज पर अखबार ने भारत बंद की खबर देने की बजाय अमित शाह के साथ हुई किसानों की बैठक को प्राथमिकता दी. “बढ़ा गतिरोध, आज की बैठक टली” शीर्षक से पहले पांच कॉलम में दी गई खबर में किसानों और अमित शाह की बैठक पर तो फोकस रखा ही, साथ ही बीच में दो छोटी खबर भी दीं. जिनका शीर्षक था-‘राजधानी में बंद बेअसर’ और खबर में लिखा कि दिल्ली में इसका कोई असर नहीं हुआ, व्यापारिक प्रतिष्ठान रोज की तरह खुले रहे. ये 20 शब्द लिखकर ‘आगे पेज 5 पर’ लिख दिया. दूसरी खबर का शीर्षक था- ‘अन्य क्षेत्रों में आंशिक असर’ फिर इसके लिए भी पेज 5 पर जाना था. अखबार ने राकेश टिकैत की मीडिया से बात करते हुए एक तस्वीर भी पहले पेज पर लगाई है, जब वे अमित शाह से बात कर निकल रहे थे. इसके अलावा सब-हेड में लिखा- ‘भारत बंद के बाद किसान नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक भी बेनतीजा रही.’ एक छोटी खबर यह भी थी कि कई संगठन कानूनों को बता रहे किसान हितैषी.

यानी पहले पेज पर दैनिक जागरण ने यह बताने की कोशिश की कि भारत बंद का देश में कोई खास असर नहीं हुआ.

अमर उजाला

अमर उजाला

अमर उजाला अखबार का भी कुछ यही हाल रहा. अखबार ने भारत बंद की खबर के बजाय किसानों की अमित शाह के साथ बैठक को ही प्राथमिकता देना उचित समझा. अमर उजाला ने अपने पहले पेज पर बीच में पांच कॉलम की खबर में शीर्षक लिखा- ‘भारत बंद के बाद किसानों की शाह के साथ बैठक बेनतीजा, आज नहीं होगी छठे दौर की बातचीत.’

इसके अलावा कई सब-हेड भी दिए हुए थे. जैसे- ‘भारत बंद का रहा मिला जुला असर’ इसे अलग से लाल रंग से हाईलाइट किया हुआ है. इसके अलावा ‘सरकार देगी लिखित प्रस्ताव...कैबिनेट में होगा किसानों की समस्याओं पर विचार’ और ‘सीएम केजरीवाल को किया नजरबंद’, आज राष्ट्रपति से मिलेंगे विपक्ष के नेता. सब हेड से कुछ छोटी खबरें इसी बड़े शीर्षक के नीचे थीं. अखबार ने चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा की गई पानी की बौछारों की फोटो लगाई है. लेकिन खबर के विस्तार में अगर देखें तो सिर्फ मीटिंग पर फोकस किया गया. जैसे- वार्ता बेनतीजा, कानून वापस नहीं लेगी सरकार, एमएसपी का लिखित आश्वासन देने को तैयार. अंत में बंद पर भी थोड़ी चर्चा की गई, जैसे- बंद यूपी समेत ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों में बेअसर रहा, जबकि विपक्षी शासित राज्यों में मिला-जुला रहा. यानी अमर उजाला के मुताबिक भी बंद का देश भर में कोई व्यापक असर नहीं हुआ.

हिंदुस्तान हिंदी

हिंदुस्तान हिंदी

हिंदुस्तान ने खबर का फोकस मीटिंग पर न रखकर बंद पर ही रखा. लेकिन अखबार का कहना है कि बंद का कोई खास असर नहीं दिखा. हिंदुस्तान ने पहले पेज पर 6 कॉलम और आधे पेज पर ‘सड़कों पर सिमटा भारत बंद’ शीर्षक से खबर छापी. खबर में बताया गया कि बंद का मिला-जुला असर रहा. और हरियाणा-पंजाब में इसका असर ज्यादा देखा गया. इसके अलावा, किसान अभी भी अड़े, विपक्ष का हल्ला बोल जैसी छोटी खबरें भी थीं. खबर का लब्बोलुआब था कि ज्यादातर राज्यों में बाजार खुले और बंद सिर्फ सड़कों पर सिमटा नजर आया.

इसी बड़ी हेडिंग के नीचे सब हेड- ‘दिल्ली में मिला-जुला असर, सीमाएं जाम’ से दूसरी खबर भी थी. पहले पैराग्राफ में जहां लिखा कि अधिकतर बाजार खुले रहे और परिवहन सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं. उसके ठीक अगले पैराग्राफ में लिखा कि समितियों के चक्का जाम में शामिल होने की वजह से आजादपुर मंडी सहित सभी मंडियां बंद रहीं. फल-सब्जी आदि की आपूर्ति पर असर पड़ा. और उसके अगले पैराग्राफ में लिखा कि कैब सेवाएं ठप रहीं. साथ ही ऑटो, टैक्सी यूनियन को भी हड़ताल में शामिल बताया.

नवभारत टाइम्स

देश के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप का दावा करने वाले टाइम्स ग्रुप के हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स अखबार ने भी भारत बंद की खबर को छुपाने की पूरी कोशिश की. अखबार ने पहले पेज पर बड़ा शीर्षक दिया- ‘बंद के बाद, नए रास्ते खोलने की कोशिश.’ इसके बाद बहुत से सब हेड भी नीचे लिखे, जिनमें बंद को लगभग असफल बताया गया. एक सब हेड में लिखा था- आम दिनो की तरह चलती रही राजधानी, यूपी: अधिकतर जिलों में सामान्य रहा माहौल.

वहीं ‘दिल्ली-एनसीआर में बाजार खुले...पंजाब-बंगाल-हरियाणा में रोकी ट्रेनें’ अलग सब हेड- के साथ दो फोटो प्रकिशित किए. जिनमें एक में राजधानी दिल्ली की अमीनाबाद मार्किट में खुली दुकानें थीं, फोटो कैप्शन में लिखा था- भारत बंद का असर राजधानी में नजर नहीं आया. तो दूसरी तस्वीर सड़क पर टायर जलाने की थी. कैप्शन था-सबसे ज्यादा असर पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और बिहार में रहा.

एक सब-हेड ‘भारत बंद के बाद किसान नेताओं से अमित शाह की मुलाकात’ के साथ खबर थी. विपक्षी नेताओं के राष्ट्रपति से मिलने की खबर भी थी. बाकी कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे देश में स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की गई.

दैनिक भास्कर

दैनिक भास्कर

दैनिक भास्कर ने जरूर इस खबर को कुछ बैलेंस करने की कोशिश की. पहले पेज पर चार कॉलम की बड़ी खबर के साथ भास्कर ने शीर्षक दिया- ‘दिन में भारत बंद, दिन में किसानों से मिले शाह; ये बैठक भी बेनतीजा.’ इसके अलावा सब-हेड में- ‘देशभर में किसान का बंद शांतिपूर्ण, लेकिन सियासत गुत्थम गुत्था,’ ‘सरकार आज संशोधन का प्रस्ताव देगी, लेकिन किसान कानून वापसी पर अड़े.’ साथ ही भास्कर ने आठ राज्यों का 15-20 शब्दों में छोटा विवरण भी दिया था, जो किसी और अखबार ने नहीं दिया.

इसमें शीर्षक था,...दिनभर, कई जगह ट्रेने रोकीं, नेता हिरासत में. इसके अलावा सिंधु बॉर्डर और जयपुर प्रदर्शन की तस्वीरें भी छापी थीं. इसके अलावा खबर के विस्तार में ये भी लिखा था कि कुछ किसान नेता कह रहे हैं कि मीटिंग की खबर एक दिन पहले क्यों और 40 की जगह 13 किसान नेता क्यों आमंत्रित किए. कुल मिलाकर देखा जाए तो अन्य अखबारों के मुकाबले भास्कर ने बंद की खबर को पहले पेज पर कुछ जगह दी.

राजस्थान पत्रिका

राजस्थान पत्रिका

राजस्थान पत्रिका ने पहले पेज पर काफी अच्छे से भारत बंद को तस्वीर के साथ दिखाया. ऊपर पूरे आठ कॉलम में दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के हाईवे बंद की तस्वीर छापी. इसके नीचे बड़े शीर्षक में लिखा- “किसानों ने दिखाया दम, मिलाजुला ‘भारत बंद’.” इसके बाद लिखे सब हेड में भी- यूपी-एमपी में ट्रेनों को रोका, जयपुर में कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ता भिड़े, आज राष्ट्रपति से मिलेगा विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल, किसानों के समर्थन में युवा जैसे सब हेड भी लिखे हैं. इसके अलावा खबर के विस्तार में बंद को मिला-जुला बताते हुए लिखा कि किसानों ने अपनी ताकत दिखाई है. केजरीवाल की नजरबंदी, जेजेपी से खटपट की खबरें भी पेज पर हैं. अखबार में अमित शाह की मीटिंग का कोई खास जिक्र नहीं किया गया.

इसी के बराबर में ‘प्रमुख राज्यों में यह हाल’ सब हेड के नीचे भारत का मानचित्र बनाकर कुछ राज्यों की स्थिति का विवरण दिया गया था. ये पूरी खबरें ऊपर आधे पेज पर थीं. यानी अगर देखा जाए तो साफ है कि देश के ज्यादातर बड़े हिंदी अखबार किसानों के इस भारत बंद को कहीं न कहीं हल्का कर या असफल दिखाने की कोशिश करते नजर आए.

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किसान संगठनों के इस भारत बंद को देश के बड़े हिंदी अखबारों ने किस तरह दिखाया. ये जानने के लिए हमने राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होने वाले कुछ बड़े हिंदी अखबारों के पहले पेज का विश्लेषण किया.

दैनिक जागरण

अगर दैनिक जागरण की बात करें तो देश का नंबर एक होने का दावा करने वाला यह अखबार देशव्यापी बंद की खबर को पूरी तरह पचा गया. पहले पेज पर अखबार ने भारत बंद की खबर देने की बजाय अमित शाह के साथ हुई किसानों की बैठक को प्राथमिकता दी. “बढ़ा गतिरोध, आज की बैठक टली” शीर्षक से पहले पांच कॉलम में दी गई खबर में किसानों और अमित शाह की बैठक पर तो फोकस रखा ही, साथ ही बीच में दो छोटी खबर भी दीं. जिनका शीर्षक था-‘राजधानी में बंद बेअसर’ और खबर में लिखा कि दिल्ली में इसका कोई असर नहीं हुआ, व्यापारिक प्रतिष्ठान रोज की तरह खुले रहे. ये 20 शब्द लिखकर ‘आगे पेज 5 पर’ लिख दिया. दूसरी खबर का शीर्षक था- ‘अन्य क्षेत्रों में आंशिक असर’ फिर इसके लिए भी पेज 5 पर जाना था. अखबार ने राकेश टिकैत की मीडिया से बात करते हुए एक तस्वीर भी पहले पेज पर लगाई है, जब वे अमित शाह से बात कर निकल रहे थे. इसके अलावा सब-हेड में लिखा- ‘भारत बंद के बाद किसान नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक भी बेनतीजा रही.’ एक छोटी खबर यह भी थी कि कई संगठन कानूनों को बता रहे किसान हितैषी.

यानी पहले पेज पर दैनिक जागरण ने यह बताने की कोशिश की कि भारत बंद का देश में कोई खास असर नहीं हुआ.

अमर उजाला

अमर उजाला

अमर उजाला अखबार का भी कुछ यही हाल रहा. अखबार ने भारत बंद की खबर के बजाय किसानों की अमित शाह के साथ बैठक को ही प्राथमिकता देना उचित समझा. अमर उजाला ने अपने पहले पेज पर बीच में पांच कॉलम की खबर में शीर्षक लिखा- ‘भारत बंद के बाद किसानों की शाह के साथ बैठक बेनतीजा, आज नहीं होगी छठे दौर की बातचीत.’

इसके अलावा कई सब-हेड भी दिए हुए थे. जैसे- ‘भारत बंद का रहा मिला जुला असर’ इसे अलग से लाल रंग से हाईलाइट किया हुआ है. इसके अलावा ‘सरकार देगी लिखित प्रस्ताव...कैबिनेट में होगा किसानों की समस्याओं पर विचार’ और ‘सीएम केजरीवाल को किया नजरबंद’, आज राष्ट्रपति से मिलेंगे विपक्ष के नेता. सब हेड से कुछ छोटी खबरें इसी बड़े शीर्षक के नीचे थीं. अखबार ने चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा की गई पानी की बौछारों की फोटो लगाई है. लेकिन खबर के विस्तार में अगर देखें तो सिर्फ मीटिंग पर फोकस किया गया. जैसे- वार्ता बेनतीजा, कानून वापस नहीं लेगी सरकार, एमएसपी का लिखित आश्वासन देने को तैयार. अंत में बंद पर भी थोड़ी चर्चा की गई, जैसे- बंद यूपी समेत ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों में बेअसर रहा, जबकि विपक्षी शासित राज्यों में मिला-जुला रहा. यानी अमर उजाला के मुताबिक भी बंद का देश भर में कोई व्यापक असर नहीं हुआ.

हिंदुस्तान हिंदी

हिंदुस्तान हिंदी

हिंदुस्तान ने खबर का फोकस मीटिंग पर न रखकर बंद पर ही रखा. लेकिन अखबार का कहना है कि बंद का कोई खास असर नहीं दिखा. हिंदुस्तान ने पहले पेज पर 6 कॉलम और आधे पेज पर ‘सड़कों पर सिमटा भारत बंद’ शीर्षक से खबर छापी. खबर में बताया गया कि बंद का मिला-जुला असर रहा. और हरियाणा-पंजाब में इसका असर ज्यादा देखा गया. इसके अलावा, किसान अभी भी अड़े, विपक्ष का हल्ला बोल जैसी छोटी खबरें भी थीं. खबर का लब्बोलुआब था कि ज्यादातर राज्यों में बाजार खुले और बंद सिर्फ सड़कों पर सिमटा नजर आया.

इसी बड़ी हेडिंग के नीचे सब हेड- ‘दिल्ली में मिला-जुला असर, सीमाएं जाम’ से दूसरी खबर भी थी. पहले पैराग्राफ में जहां लिखा कि अधिकतर बाजार खुले रहे और परिवहन सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं. उसके ठीक अगले पैराग्राफ में लिखा कि समितियों के चक्का जाम में शामिल होने की वजह से आजादपुर मंडी सहित सभी मंडियां बंद रहीं. फल-सब्जी आदि की आपूर्ति पर असर पड़ा. और उसके अगले पैराग्राफ में लिखा कि कैब सेवाएं ठप रहीं. साथ ही ऑटो, टैक्सी यूनियन को भी हड़ताल में शामिल बताया.

नवभारत टाइम्स

देश के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप का दावा करने वाले टाइम्स ग्रुप के हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स अखबार ने भी भारत बंद की खबर को छुपाने की पूरी कोशिश की. अखबार ने पहले पेज पर बड़ा शीर्षक दिया- ‘बंद के बाद, नए रास्ते खोलने की कोशिश.’ इसके बाद बहुत से सब हेड भी नीचे लिखे, जिनमें बंद को लगभग असफल बताया गया. एक सब हेड में लिखा था- आम दिनो की तरह चलती रही राजधानी, यूपी: अधिकतर जिलों में सामान्य रहा माहौल.

वहीं ‘दिल्ली-एनसीआर में बाजार खुले...पंजाब-बंगाल-हरियाणा में रोकी ट्रेनें’ अलग सब हेड- के साथ दो फोटो प्रकिशित किए. जिनमें एक में राजधानी दिल्ली की अमीनाबाद मार्किट में खुली दुकानें थीं, फोटो कैप्शन में लिखा था- भारत बंद का असर राजधानी में नजर नहीं आया. तो दूसरी तस्वीर सड़क पर टायर जलाने की थी. कैप्शन था-सबसे ज्यादा असर पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और बिहार में रहा.

एक सब-हेड ‘भारत बंद के बाद किसान नेताओं से अमित शाह की मुलाकात’ के साथ खबर थी. विपक्षी नेताओं के राष्ट्रपति से मिलने की खबर भी थी. बाकी कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे देश में स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की गई.

दैनिक भास्कर

दैनिक भास्कर

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इसमें शीर्षक था,...दिनभर, कई जगह ट्रेने रोकीं, नेता हिरासत में. इसके अलावा सिंधु बॉर्डर और जयपुर प्रदर्शन की तस्वीरें भी छापी थीं. इसके अलावा खबर के विस्तार में ये भी लिखा था कि कुछ किसान नेता कह रहे हैं कि मीटिंग की खबर एक दिन पहले क्यों और 40 की जगह 13 किसान नेता क्यों आमंत्रित किए. कुल मिलाकर देखा जाए तो अन्य अखबारों के मुकाबले भास्कर ने बंद की खबर को पहले पेज पर कुछ जगह दी.

राजस्थान पत्रिका

राजस्थान पत्रिका

राजस्थान पत्रिका ने पहले पेज पर काफी अच्छे से भारत बंद को तस्वीर के साथ दिखाया. ऊपर पूरे आठ कॉलम में दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के हाईवे बंद की तस्वीर छापी. इसके नीचे बड़े शीर्षक में लिखा- “किसानों ने दिखाया दम, मिलाजुला ‘भारत बंद’.” इसके बाद लिखे सब हेड में भी- यूपी-एमपी में ट्रेनों को रोका, जयपुर में कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ता भिड़े, आज राष्ट्रपति से मिलेगा विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल, किसानों के समर्थन में युवा जैसे सब हेड भी लिखे हैं. इसके अलावा खबर के विस्तार में बंद को मिला-जुला बताते हुए लिखा कि किसानों ने अपनी ताकत दिखाई है. केजरीवाल की नजरबंदी, जेजेपी से खटपट की खबरें भी पेज पर हैं. अखबार में अमित शाह की मीटिंग का कोई खास जिक्र नहीं किया गया.

इसी के बराबर में ‘प्रमुख राज्यों में यह हाल’ सब हेड के नीचे भारत का मानचित्र बनाकर कुछ राज्यों की स्थिति का विवरण दिया गया था. ये पूरी खबरें ऊपर आधे पेज पर थीं. यानी अगर देखा जाए तो साफ है कि देश के ज्यादातर बड़े हिंदी अखबार किसानों के इस भारत बंद को कहीं न कहीं हल्का कर या असफल दिखाने की कोशिश करते नजर आए.

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