Khabar Baazi
आनंद बाजार पत्रिका के पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने की मांग
बंगाली भाषा के प्रमुख अखबार आनंद बाजार पत्रिका की संपादक और रिपोर्टर समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को लेकर पत्रकारिता संगठनों ने निंदा की है.
मालूम हो कि कोलकाता के बोवबाजार पुलिस थाने में आनंद बाजार पत्रिका (एबीपी) की एडिटर ईशानी दत्ता रॉय, चीफ रिपोर्टर सोमा मुखर्जी और संपादकीय टीम के अन्य सदस्यों के खिलाफ बीते 28 अगस्त को ये एफआईआर दर्ज की गई.
इंडियन विमेन्स प्रेस कॉर्प्स और प्रेस एसोसिएशन ने तत्काल इस मामले को वापस लेने की मांग करते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है.
यह मामला शास्त्री महाराज की शिकायत पर दर्ज हुआ है. शिकायत में अखबार की एक रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए ‘गेरुआ तांडव’ शब्द पर आपत्ति जताई गई थी. 21 अगस्त को प्रकाशित यह रिपोर्ट जादवपुर विश्वविद्यालय में हुए हिंसक टकराव से संबंधित थीं.
दोनों पत्रकार संगठनों ने कहा कि पत्रकारों का काम ऐसे तथ्यों को सामने लाना है, जो कुछ लोगों को असहज या आपत्तिजनक लग सकते हैं. उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बढ़ती घटनाओं को लोकतंत्र और स्वतंत्र प्रेस के लिए चिंताजनक बताया.
संगठनों के मुताबिक, शिकायत में यह भी पूछा गया कि ‘गेरुआ तांडव’ शब्द किसने प्रस्तावित किया, किसने इसे मंजूरी दी और रिपोर्ट के संपादन एवं हेडलाइन तय करने में कौन-कौन शामिल थे. आईडब्ल्यूपीसी और प्रेस एसोसिएशन ने इसे पत्रकारों को निशाना बनाने और उनके पेशेवर काम को डराने की कोशिश बताया.
मालूम हो कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक सभा में अखबार से इस शब्द के इस्तेमाल पर माफी मांगने को कहा था. साथ ही उन्होंने इसके लिए ‘सुवेंदु तांडव ’ या ‘एबीवीपी तांडव’ जैसे वैकल्पिक शब्द सुझाए थे.
दोनों संगठनों ने राज्य सरकार से पत्रकारों को डराने या दबाने के लिए एफआईआर जैसे कानूनी साधनों के इस्तेमाल से बचने और एबीपी के पत्रकारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर तत्काल वापस लेने की मांग की है.
उधर, मकतूब मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार दोपहर को दक्षिणपंथी समूह के कुछ लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में एबीपी ऑफिस के बाहर की दीवार को भगवा रंग से रंग दिया.
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