यूपी एसआईआर ड्राफ्ट लिस्ट सवाल उठ रहे हैं.
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यूपी एसआईआर: 2003 की सूची वाले नाम 2026 की ड्राफ्ट लिस्ट से गायब

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आ गई है. हालांकि, इस लिस्ट के साथ ही इस प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं. दरअसल, प्रयागराज के पश्चिमी तथा दक्षिणी विधान सभा क्षेत्र में कई लोग परेशान हैं. ड्राफ्ट लिस्ट में उनके नाम शामिल नहीं हैं जबकि उनका दावा है कि उनके नाम एसआईआर का आधार यानि 2003 की वोटर लिस्ट में शामिल थे. 

मालूम हो कि बीते 11 जनवरी से शहर भर में चुनाव आयोग द्वारा ड्राफ्ट सूची से संबंधित आपत्तियों और दावों को दर्ज करवाने के लिए जगह-जगह बूथ लगाए गए हैं.  

न्यूज़लॉन्ड्री जब ऐसे ही दो बूथों पर पहुंचा तो पाया कि तमाम स्थानीय लोगों के परिजनों का नाम 2003 वाली मतदाता सूची में होने के बावजूद 2026 की ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं है. 

इसके अलावा यह प्रक्रिया कई लोगों के लिए रोज़गार के नुकसान का कारण भी बन गई है. आसिफ इक़बाल का कहना है कि वह मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए कई चक्कर लगा चुके हैं और एक चक्कर का मतलब है कि दिन की 700 रुपये की दिहाड़ी से हाथ धोना. वहीं, कुछ बूथ लेवल ऑफिसर भी इस प्रक्रिया को लेकर संतुष्तट नहीं दिखते, वह कहते हैं कि ना तो उन्हें पर्याप्त समय मिला और ना ही ठीक से इस बारे में प्रशिक्षण दिया गया है. 

वहीं, प्रयागराज के संसदीय क्षेत्र फूलपुर, जहां से कभी पंडित जवाहर लाल नेहरू भी चुनाव लड़ते थे, वहां पर काफी संख्या में लोगों के फॉर्म-6 (नया नाम जुड़वाने के लिए) अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. जिसके चलते स्थानीय निवासियों में वोट कटने का डर बना हुआ है

दो महीने से चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया क लेकर लोगों को क्या परेशानियां हैं? इसे लेकर स्थानीय स्तर पर क्या आपत्तियां या दावे सामने आ रहे हैं? कैसे लोग अपना नाम जुड़वाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं?

ये सब जानने के लिए देखिये आकांक्षा कुमार की ग्राउंड रिपोर्ट. 

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