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आरएसएस की छवि चमकाने वाली संजय दत्त स्टारर ‘फ्लॉप फिल्म’ पर प्रसार भारती ने खर्च किए 9 करोड़
14 मई, 2026 को दिल्ली में एक फिल्म का प्रीमियर हुआ. खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने फिल्म की स्टारकास्ट के साथ यह फिल्म देखी. अगले दिन 15 मई से यह जनता के लिए सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई. इससे पहले फिल्म का लंबा चौड़ा प्रमोशन हुआ. लेकिन इन सबके बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिली.
हम बात कर रहे हैं. संजय दत्त स्टारर ‘आखिरी सवाल’ की. फिल्म का निर्माण निखिल नंदा और संजय दत्त ने निखिल नंदा मोशन पिक्चर्स और नीम ट्री एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया है. इसके निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग हैं, जिनकी पिछली फिल्म 'पिकासो' को 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘विशेष उल्लेख’ मिला था.
फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद उत्कर्ष नैथानी के हैं, संगीत मोंटी शर्मा का है और गीत कुमार विश्वास ने लिखे हैं. संजय दत्त के अलावा फिल्म में नमाशी चक्रवर्ती, अमित साध, समीरा रेड्डी, नीतू चंद्रा, त्रिधा चौधरी, मृणाल कुलकर्णी, निखिल नंदा, अर्चना अय्यर और बिपिन नाडकर्णी हैं.
फिल्म की कहानी एक युवा शोधार्थी विक्की हेगड़े (नमाशी चक्रवर्ती) और उसके प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) के बीच बहस की है. यह बहस आरएसएस से जुड़े पांच विवादित सवालों पर होती है, जिनमें गांधी की हत्या में उसकी कथित भूमिका, बाबरी मस्जिद विध्वंस और आपातकाल आदि शामिल हैं. फिल्म के प्रमोशन के दौरान पोस्टर्स पर भी यही पांच सवाल थे.
खबरों के मुताबिक फिल्म ने सिनेमाघरों में मात्र 2.45 करोड़ रुपये कमाए. बॉलीवुड हंगामा के बॉक्स-ऑफिस आंकड़े इसे ‘फ्लॉप फिल्म’ की श्रेणी में रखते हैं. बताया जाता है कि इसे बनाने में करीब 30 करोड़ रुपये लगे थे. सामान्य तौर पर यह ऐसा घाटा है जिसकी भरपाई मुश्किल है.
लेकिन प्रसार भारती ने शायद इसे इस नज़र से नहीं देखा.
दरअसल, सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती के ‘कंटेंट सोर्सिंग डिवीज़न’ के दस्तावेज़ों पर गई हमारी नजर बताती है कि जून, 2026 तक प्रसार भारती इस फिल्म पर 4.28 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, और मार्च, 2027 तक 4.65 करोड़ रुपये और खर्च करेगा. इस तरह इस फिल्म पर कुल खर्च 8.93 करोड़ रुपये प्रसार भारती खर्च कर रहा है. वहीं, फिल्म में प्रसार भारती का नाम सह-निर्माता के रूप में दिखता है.
लेकिन प्रसार भारती इस फिल्म से कब जुड़ा? ये पैसे उसने फिल्म निर्माण के लिए दिए हैं या फिर उसके प्रसारण के लिए?
इस बारे में अभी तक प्रसार भारती ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है.
आंकड़े खुद कुछ नहीं बताते
ये दस्तावेज़ अगस्त में प्रसार भारती के वित्त विभाग के कहने पर जमा किए गए थे. जिसमें खर्च और कमाई का ब्योरा है. न्यूज़लॉन्ड्री को पता चला है कि इनका मकसद प्रसार भारती को वित्त वर्ष की आय का अनुमान पक्का करने में मदद देना था.
दस्तावेजों के मुताबिक ‘कंटेंट सोर्सिंग डिवीज़न’ का 2026-27 का कुल बजट लगभग 280 करोड़ रुपये है. इसमें से जून तक 55.96 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे और मार्च 2027 तक करीब 223 करोड़ रुपये और खर्च होंगे. यानी एक अकेली फिल्म ‘कंटेंट सोर्सिंग डिवीज़न’ के पूरे साल के खर्च का लगभग तीन प्रतिशत है.
गौरतलब है कि इसी वित्त वर्ष में प्रसार भारती ने 59 हॉलीवुड फिल्मों के अधिकार कुल 15 करोड़ रुपये में खरीदे हैं, यानी करीब 25 लाख रुपये प्रति फिल्म. जबकि ‘आखिरी सवाल’ की कीमत इससे कहीं ज़्यादा है.
हालांकि, किसी फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने को उसकी पूरी कमाई की कहानी मान लेना ठीक नहीं होगा. बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों में अक्सर वह कॉरपोरेट समझौते, लाइसेंसिंग डील और ओटीटी से मिलने वाली रकम शामिल नहीं होती, जो किसी फिल्म की कुल कमाई और मुनाफे की तस्वीर को बदल सकती हैं. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. अगर फिल्म के निर्माताओं को दूसरे माध्यमों से अपनी लागत वसूल करने की उम्मीद थी, तो फिर यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि सार्वजनिक प्रसारक के 8.93 करोड़ रुपये इस पूरी व्यवस्था में किस काम के लिए लगाए गए थे.
फिल्म, और वह माहौल जिसमें इसे लॉन्च किया गया
13 मई को दिल्ली में हुए प्रीमियर में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और कुमार विश्वास पहुंचे. आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले एक अलग विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुए. यह सब आरएसएस के शताब्दी समारोह के आसपास दिख रहे एक बड़े सिलसिले का हिस्सा रहा. इसके इतर सूचना के अधिकार (आरटीआई) जवाब से पता चला कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इसके लिए प्रिंट विज्ञापनों पर 76.13 लाख रुपये खर्च किए.
वैसे निर्माता निखिल नंदा सार्वजनिक रूप से राजनीतिक तौर पर सक्रिय दिखते हैं. वे अक्सर आरएसएस से जुड़े संगठन राष्ट्रीय सेवा भारती और आरएसएस का मुखपत्र माने जाने वाले ‘ऑर्गनाइज़र’ या ‘पांचजन्य’ की सामग्री साझा करते रहे हैं. जिसमें इनके क संपादकों के पोस्ट भी शामिल हैं.
इसके अलावा नंदा, ऋषि बागरी का कंटेंट भी सोशल मीडिया पर शेयर करते नजर आते हैं. जैसे कि यह एक पोस्टर, जिसमें बॉलीवुड अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की तस्वीरें लगाकर झारखंड के छात्र प्रदर्शनों पर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाया गया था. जिसे पोस्ट करते हुए नंदा ने लिखा कि ‘‘बॉलीवुड पूरी तरह उन वामपंथियों के हाथों बिक चुका है जो उसे फंड करते हैं’’ और इंडस्ट्री की "नेपो-गैंग" की "सफाई" ज़रूरी है.
नंदा, अक्सर कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने वाली सामग्री भी पोस्ट करते हैं. वहीं 2018 में शिकागो में छठे वार्षिक वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूएचईएफ) में नंदा ने अगले दशक में भारत की दोहरे अंकों की जीडीपी वृद्धि की भविष्यवाणी की थी और इसे असली ‘हिंदू विकास दर’ बताया था. डब्ल्यूएचईएफ खुद को आर्थिक रूप से सफल हिंदुओं, यानी व्यापारियों, बैंकरों, तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों और उद्योगपतियों का जमावड़ा बताता है.
एक 'विशेष धन्यवाद'
फिल्म अगस्त में प्रसार भारती के ओटीटी प्लेटफॉर्म 'वेव्स' पर आई. प्री-रोल में सबसे पहले निखिल नंदा मोशन पिक्चर्स का नाम था, फिर प्रसार भारती और फिर नीम ट्री एंटरटेनमेंट. इसके अलावा प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी और गीतकार कुमार विश्वास को ‘विशेष धन्यवाद’ दिया गया. अजीब बात यह है कि फिल्म के ट्रेलर में प्रसार भारती का ज़िक्र कभी नहीं था. गौरतलब है कि ऐसी व्यवस्थाएं आमतौर पर जगजाहिर होती हैं.
उल्लेखनीय है कि प्रसार भारती अपने ‘कंटेंट सोर्सिंग डिवीज़न’ के जरिए तमाम कंटेंट हासिल करता है. इसके लिए वह अपनी कंटेंट सोर्सिंग पॉलिसी, 2024 के तहत सामग्री हासिल करता है, जिसका अध्याय 6 फीचर फिल्मों की सोर्सिंग के बारे में बताता है.
यहां फिल्म की सोर्सिंग के लिए छह श्रेणियां तय हैं. कमीशनिंग, खरीद, रेवेन्यू शेयर मोड, लाइसेंस फीस, प्रायोजित और निःशुल्क. साथ ही इनमें आपस में कोई बदलाव नहीं हो सकता.
कमीशनिंग का मतलब है नई फिल्म का निर्माण, जिसके लिए प्रसार भारती पूरा या आंशिक बजट देता है, और इसमें सह-निर्माण की साफ गुंजाइश रखी गई है. दूसरे छोर पर लाइसेंस फीस है, जिसमें प्रसार भारती अपनी अधिसूचित दर पर गैर-विशिष्ट स्ट्रीमिंग अधिकार खरीदता है. फिल्म ‘आखिरी सवाल’ पर इनमें से कौन-सी श्रेणी लागू होती है, इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं है.
इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने फिल्म के निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग से संपर्क किया. उन्होंने इस बारे कोई जानकारी देने से इनकार करते हुए निर्माता से संपर्क की बात कही. हमने प्रोडक्शन हाउस से सम्पर्क किया तो प्रोडक्शन हाउस से जुड़े एक सूत्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रसार भारती ने यह पैसा केवल स्ट्रीमिंग अधिकार खरीदने के लिए दिया है.
हालांकि, हमारे सूत्र का दावा कि प्रसार भारती ने केवल प्रदर्शन के अधिकार (स्ट्रीमिंग राइट्स) हासिल किए हैं, वह फिल्म के क्रेडिट रोल से मेल नहीं खाता. जहां प्रसार भारती सह-निर्माता के तौर पर शामिल है.
वहीं, निखिल नंदा ने सौदे के बारे में ख़बर प्रकाशित किए जाने तक हमारे सवालों का जवाब नहीं दिया.
गौरतलब है कि कंटेंट सोर्सिंग पॉलिसी में कहीं नहीं है कि लाइसेंस फीस के बदले सह-निर्माता का क्रेडिट ज़रूरी या स्वीकार्य हो और अगर यह अधिकारों की खरीद थी, तो प्रसार भारती ने ऐसी फिल्म की स्ट्रीमिंग के लिए लगभग 9 करोड़ रुपये दिए जो सिनेमाघरों में पहले ही पिट चुकी थी, जबकि उसी साल 59 हॉलीवुड फिल्मों के अधिकार मात्र 15 करोड़ रुपये में हासिल किए हों.
वेव्स के अलावा लायंसगेट पर भी रिलीज हुई फिल्म
‘आखिरी सवाल’ 14 अगस्त से लायंसगेट प्ले नाम के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी स्ट्रीम हो रही है. ‘लायंसगेट प्ले’ अमेज़न प्राइम वीडियो, एयरटेल एक्सस्ट्रीम प्ले और एप्पल टीवी के ज़रिए उपलब्ध है. यानी जिस फिल्म के लिए प्रसार भारती ने पैसा लगाए, वह उन दर्शकों के लिए भी उपलब्ध है, जो शायद कभी 'वेव्स' खोलेंगे ही नहीं.
प्रसार भारती कंटेंट इसलिए खरीदता है ताकि 'वेव्स' के पास फिल्मों और कार्यक्रमों का ऐसा संग्रह बने जो दर्शकों को किसी और प्लेटफॉर्म पर न मिले यानि एक्सक्लूसिव कंटेंट हो. लेकिन 'आखिरी सवाल' के मामले में ऐसा होता नहीं दिखता. यहां प्रसार भारती ने फिल्म में पैसा लगाया, फिर वही फिल्म कहीं ज़्यादा दर्शकों तक पहुंच रखने वाले प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म पर भी आ गई, और प्रसार भारती को बदले में कोई साफ फायदा मिलता नज़र नहीं आता.
लायंसगेट प्ले ने इस फिल्म के स्ट्रीमिंग अधिकार के लिए दी गई रकम के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया.
गिरती आय
प्रसार भारती में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. न्यूज़लॉन्ड्री ने बीते दिनों भी एक ऐसे ही मामले पर रिपोर्ट की थी. जब साल 2022 में अमित शाह ने 75 एपिसोड का ‘स्वराज: भारत के स्वतंत्रता संग्राम की समग्र गाथा’ नाम से एक डॉक्यू-ड्रामा लॉन्च किया. इसे कॉन्टिलो पिक्चर्स ने 47 लाख रुपये प्रति एपिसोड की लागत पर बनाया, जो बाद में जीएसटी कर सहित लगभग 55.46 लाख रुपये और पूरी सीरीज़ के लिए करीब 41.59 करोड़ रुपये का खर्च बैठता है. इसके अलावा प्रचार पर प्रसार भारती ने 9.19 करोड़ रुपये खर्च किए. जिसकी पुष्टि आरटीआई से हुई. इस ‘डॉक्यू-ड्रामा’ की शोध समिति में भाजपा और आरएसएस के सदस्य थे.
एक अधिकारी ने दावा किया था कि प्रसार भारती ने इसके डिजिटल अधिकार 25 करोड़ रुपये में बेचने की कोशिश की, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला तो इसकी मांग घटाकर 15 करोड़ रुपये की गई. हालांकि, फिर भी खरीदार ढूंढना मुश्किल ही रहा.
असल में यहां राजस्व का सवाल भी उठता है. वित्त वर्ष 2024-25 में प्रसार भारती का कुल राजस्व 9.46 फीसदी घटकर 1,643.35 करोड़ रुपये रह गया. डिजिटल ऑपरेशंस से 2.90 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जो इसी वेव्स प्लेटफॉर्म का हिस्सा है. पिछले वित्त वर्ष में यह 2.23 करोड़ रुपये था. वहीं, दूरदर्शन का कमर्शियल राजस्व 30.89 फीसदी घटकर 256.74 करोड़ रुपये रह गया. इसी वित्तीय विवरण पर रिपोर्ट करते हुए एक्सचेंज फॉर मीडिया ने इस साल का घाटा 573 करोड़ रुपये बताया था.
8 फरवरी, 2026 को जारी एक सर्कुलर में प्रसार भारती ने कथित तौर पर फिल्मों और कार्यक्रमों के प्रस्ताव स्वीकार करने का अपना पुराना तरीका बंद कर दिया. इसके बजाय सभी प्रस्तावों को अब एक ही पोर्टल- वेव्स बाजार के जरिए भेजने की व्यवस्था की गई. इसमें पे-पर-व्यू कंटेंट के लिए एक नई नीति भी थी. हालांकि, यह नीति कथित तौर पर मौजूदा 2024 की नीति के तहत ही लागू की गई थी.
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस मामले पर प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी से संपर्क किया. इसके अलावा, एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी), कंटेंट सोर्सिंग डिविजन, डीपी सिंह और दूरदर्शन की महानिदेशक (डीजी) रीना सोनावल कौली से भी फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई और व्हाट्सऐप पर सवाल भेजे गए. रिपोर्ट लिखे जाने तक इनमें से किसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला.
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