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मोदी के जन्मदिन पर महीने भर होंगे कार्यक्रम, गुजरात ने 9 दिन के आयोजन पर खर्च किए थे 14 करोड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर इस साल भी देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
दिल्ली में राज्य सरकार और बीजेपी ने 'सेवा संकल्प अभियान- जन सेवा ही प्रभु सेवा है' नाम से एक कार्यक्रम की घोषणा की है, जो 17 सितंबर से 18 अक्टूबर तक चलेगा. इस दौरान उद्घाटन, शिलान्यास और सरकार की योजनाओं के प्रचार से जुड़े कार्यक्रम होंगे, जिसके लिए एक पूरा बुकलेट भी प्रकाशित किया गया है. जिसमें दीये जलाने से लेकर रक्तदान करने तक का जिक्र है.
उधर, हरियाणा सरकार ने सेवा संकल्प अभियान के नाम पर हर जिलाधिकारी (उपायुक्त) को 10 लाख रुपये आवंटित किए हैं.
इसी बीच न्यूज़लॉन्ड्री के पास मौजूद एक दस्तावेज से गुजरात में पिछले साल आयोजित एक ऐसे ही कार्यक्रम पर हुए सरकारी खर्च का आंकड़ा सामने आया है.
'विकास सप्ताह' के प्रचार पर 14 करोड़ का खर्च
गुजरात सरकार के सूचना विभाग ने अक्टूबर, 2025 में नौ दिनों तक चले 'विकास सप्ताह' पर 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए थे. यह जानकारी कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आई. यह कार्यक्रम नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 24 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था.
गुजरात सरकार हर साल 7 से 15 अक्टूबर तक 'विकास सप्ताह' मनाती है. मालूम हो कि नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इस दौरान गुजरात की विकास यात्रा और शासन से जुड़े कार्यक्रम, जैसे उद्घाटन और शिलान्यास होता है.
वहीं साल 2024 में गुजरात सरकार ने मोदी के सार्वजनिक जीवन के 23 साल पूरे होने के मौके पर विज्ञापनों पर 8.81 करोड़ रुपये खर्च किए थे. बीबीसी हिंदी को आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, 7 अक्टूबर 2024 को जारी किए गए विज्ञापनों में से एक का शीर्षक 'सफल और सक्षम नेतृत्व के 23 वर्ष ' था. इस राशि को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया पर खर्च किया गया था.
सरकारी उत्सवों की एक लंबी सूची
मोदी सरकार के कार्यकाल में अलग-अलग मौकों और योजनाओं की वर्षगांठ पर भी ऐसे ही अभियान चलाए गए हैं. जैसे 'जीएसटी दिवस', '9 साल, सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण' अभियान, और 'मन की बात' के 100वें एपिसोड से जुड़े देश-विदेश में आयोजित कार्यक्रम. आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और जनधन खातों की उपलब्धियों को लेकर भी अलग-अलग वर्षों में विज्ञापन अभियान चलाए गए. 2026 में मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 4,399 दिन पूरे होने पर भी एक अभियान चलाया गया.
पिछले साल जीएसटी दरों में बदलाव के बाद सरकार ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने वाले विज्ञापन जारी किए और उसके बाद 4 सितंबर से 28 अक्टूबर 2025 तक 'जीएसटी बचत उत्सव' आयोजित किया. राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान पर विज्ञापनों में 22 करोड़ रुपये खर्च हुए. नरेंद्र मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर भी होर्डिंग और विज्ञापन जारी किए गए थे.
साल भर में प्रचार पर 108 करोड़ से ज्यादा खर्च
विज्ञापनों पर खर्च करने में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच जैसे होड़ लगी हुआ है. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद के 11 सालों में सरकार ने प्रचार पर करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च किए. वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तो केंद्र की सरकार से आगे निकल गई. उसने आठ सालों में ही सात हज़ार करोड़ खर्च दिए. उत्तराखंड ने पांच साल में एक हज़ार करोड़ से ज़्यादा खर्च किया है.
गुजरात में भी इस मामले में पीछे नहीं रहा है. विधानसभा में भी अलग-अलग जवाबों में हमें यह जानकारी मिली है.
31 दिसंबर 2025 को समाप्त वर्ष में गुजरात के सूचना एवं प्रसारण विभाग ने विज्ञापनों पर कुल 108.80 करोड़ रुपये खर्च किए. यानी औसतन करीब 29.80 लाख रुपये प्रतिदिन. यह आंकड़ा कांग्रेस विधायक डॉ. किरीटकुमार चिमनलाल पटेल के विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आया. 'विकास सप्ताह' पर खर्च हुए 14.05 करोड़ रुपये इसी कुल प्रचार बजट का हिस्सा थे, हालांकि, विधानसभा के जवाब में 108.80 करोड़ रुपये का प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया के हिसाब से अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया.
विधायक पटेल ने यह भी पूछा था कि सरकारी प्रचार के लिए कितनी एजेंसियों का चयन हुआ और उन्हें कितना भुगतान किया गया. दोनों सवालों के जवाब में सरकार ने 'शून्य' बताया.
गुजरात में सूचना एवं प्रसारण विभाग के मंत्री मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल के पास है. गुजरात में पिछले कुछ वर्षों में विभाग का खर्च लगातार बढ़ा है.
वित्तीय वर्ष 2021-22 में 163.43 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2022-23 में, गुजरात विधानसभा चुनाव वाले साल करीब 87 प्रतिशत बढ़कर 305.37 करोड़ रुपये पहुंच गया.
इस साल औसतन करीब 83.66 लाख रुपये प्रतिदिन खर्च हुए. यह जानकारी लूनावाड़ा से विधायक गुलाबसिंह सोमजीभाई चौहान के सवाल के जवाब में दी गई थी.
सरकारी विज्ञापनों पर हमारी रिपोर्टिंग
न्यूजलॉन्ड्री ने पूरे भारत में सरकारी विज्ञापनों पर होने वाले खर्च के बारे में विस्तार से रिपोर्टिंग की है. हमने पाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014-15 से 2024-25 के बीच विज्ञापनों पर 5,987 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2017-18 से 2024-25 के बीच 6,811.94 करोड़ रुपये खर्च किए. उत्तराखंड में, पांच वित्तीय वर्षों में सरकारी विज्ञापनों पर खर्च 1,001 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित ख़बर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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आप सरकारी विज्ञापनों पर खर्च के बारे में और रिपोर्ट नीचे पढ़ सकते हैं.
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