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पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ एक और एफआईआर, बोले- ‘जैसे फिल्म की स्क्रिप्ट हो’
स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूब चैनल ‘टॉप सीक्रेट’ चलाने वाले अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में एक और मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि उनकी पत्रकारिता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
एक्स पर लगातार कई पोस्ट में उपाध्याय ने दावा किया कि गुरुवार देर रात सात-आठ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे, जबकि वह उस समय घर पर मौजूद नहीं थे. उनका यह भी आरोप है कि पुलिस ने उन्हें एफआईआर की पूरी कॉपी उपलब्ध नहीं कराई.
उपाध्याय के अनुसार, गाजियाबाद में दर्ज नया मामला इस सप्ताह की शुरुआत में शिप्रा मॉल के बाहर हुई कथित रोड रेज और गाली-गलौज की घटना से जुड़ा है. उन्होंने दावा किया कि 18 अगस्त को एक मोटरसाइकिल सवार ने शिप्रा मॉल के पास उनकी कार को टक्कर मार दी थी. इसके बाद उस व्यक्ति ने 112 पर फोन किया और अब एफआईआर दर्ज की गई है.
पत्रकार ने पुलिस से कथित घटना की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की चुनौती दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर फुटेज सामने आया तो पुलिस को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा. उपाध्याय ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘प्लांट किया हुआ’ बताया और इसकी तुलना “बॉलीवुड की एक अच्छी तरह लिखी गई स्क्रिप्ट” से की.
गाज़ियाबाद की एफआईआर में दर्ज जानकारी की न्यूज़लॉन्ड्री स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका.
इस बारे में पूछे जाने पर इंदिरापुरम के एसीपी सूर्यबली मौर्य ने कहा कि अगर उपाध्याय उस समय पुलिस स्टेशन आ जाते, जब पुलिस टीम उन्हें बुलाने गई थी, तो उन्हें एफआईआर की कॉपी दे दी जाती. अब, वे "विधि प्रक्रिया के अनुसार" "न्यायपालिका के ज़रिए" इसे हासिल कर सकते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या पत्रकार को जांच में शामिल होने के लिए कोई नोटिस दिया गया था, तो मौर्य ने कहा कि पुलिस टीम असल में उपाध्याय को बुलाने ही गई थी क्योंकि उनका घर थाने के पीछे ही है. उन्होंने आगे कहा कि पुलिस ने उपाध्याय की कार ज़ब्त कर ली है क्योंकि कथित तौर पर वह कार दुर्घटना में शामिल थी.
हमारी कई कोशिशों के बावजूद उपाध्याय से संपर्क नहीं हो सका. हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कई ट्वीट्स में मामले की जानकारी दी है.
उपाध्याय के मुताबिक, रात करीब 2:45 बजे स्थानीय पुलिस चौकी के प्रभारी ने उन्हें व्हाट्सऐप पर एफआईआर का केवल एक पन्ना भेजा. उनका कहना है कि उस पन्ने पर न तो उनके खिलाफ लगाई गई कानूनी धाराओं का विवरण था और न ही कथित घटना की पूरी जानकारी. जब उन्होंने पूरी एफआईआर मांगी तो पुलिस की ओर से उन्हें, 2025 में लखनऊ में दर्ज एक पुरानी एफआईआर का पन्ना भेज दिया गया.
यह पुरानी एफआईआर भी उपाध्याय के खिलाफ दर्ज हुई थी. उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में एक नीट छात्र की हत्या की रिपोर्टिंग से जुड़ा बताया.
गाजियाबाद पुलिस के एक अधिकारी के साथ अपनी कथित व्हाट्सऐप बातचीत के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उपाध्याय ने पूछा कि उन्हें पुरानी एफआईआर क्यों भेजी गई. उनके मुताबिक, अधिकारी ने जवाब दिया, “यह अपने आप हो गया.” इसके बाद उपाध्याय ने लिखा कि रात में दर्जनों पुलिसकर्मियों के साथ उनके घर आने के बावजूद पुलिस के पास पूरी एफआईआर तक नहीं है.
उन्होंने इस मामले को सीधे भाजपा सरकार से भी जोड़ा. एक पोस्ट में उपाध्याय ने आरोप लगाया कि उनकी रिपोर्टिंग के जरिए सरकार के कथित भ्रष्टाचार को उजागर किए जाने से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ परेशान हैं और कई एफआईआर दर्ज किए जाने के बावजूद उन्हें रोकने में नाकाम रहे हैं. उनका दावा है कि अब पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य उन्हें डराना और रात में हिरासत में लेना है.
उपाध्याय ने यह सवाल भी उठाया कि क्या उन्हें एफआईआर की अधूरी कॉपी जानबूझकर भेजी गई, ताकि उन्हें यह पता न चल सके कि पुलिस ने उनके खिलाफ कौन-सी धाराएं लगाई हैं.
उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक पुराने मामले का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, उस एफआईआर में योगी आदित्यनाथ को ‘भगवान’ बताया गया था और उन्हें ‘विदेशी ताकतों का एजेंट’ करार दिया गया था. न्यूज़लॉन्ड्री ने इससे पहले भी उपाध्याय के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रिपोर्ट की हैं.
इस बीच, कई पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर उपाध्याय के समर्थन में पोस्ट की हैं.
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि योगी सरकार एक एफआईआर के जरिए पत्रकार को “परेशान और चुप” कराने की कोशिश कर रही है. खेड़ा ने कहा कि योगी-मोदी सरकार मंदिर ट्रस्ट को ठीक से संभालने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था तथा चंदे की रक्षा करने में विफल रही है. उनके मुताबिक, अब जब कोई और यह काम कर रहा है तो उसके रास्ते में राज्य की मशीनरी के जरिए बाधाएं खड़ी की जा रही हैं.
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