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बधाई स्वीकारने से पहले ही सोशल मीडिया हैंडल बंद किए बीजेपी आईटी सेल के नए कारिंदों ने
भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को सौंप दी है. इसके साथ ही पार्टी के डिजिटल ऑपरेशंस के प्रमुख के तौर पर अमित मालवीय का 10 साल से अधिक लंबा कार्यकाल खत्म हो गया है.
मालवीय पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी भी हैं, जहां हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की. वहीं, म्हास्के पार्टी की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रहे हैं. चुनावी डेटा एनालिसिस में आने से पहले उन्होंने केमिस्ट्री की पढ़ाई और कृषि तथा बागवानी के क्षेत्र में काम किया. वह एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के बोर्ड में भी रह चुके हैं और छत्तीसगढ़ प्रशासन में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके हैं.
भाजपा ने इसी के साथ अपनी सोशल मीडिया यूनिट का भी पुनर्गठन किया है. चार राज्यों से चार कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए गए हैं, महाराष्ट्र से प्रीति गांधी, दिल्ली से शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड से आलोक भट्ट और हरियाणा से अरुण यादव. अनिल बलूनी मीडिया संयोजक के पद पर बने रहेंगे. इन नियुक्तियों से संकेत मिलता है कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ऑनलाइन मशीनरी को और मजबूत तथा विस्तारित करने की कोशिश कर रही है.
बता दें कि प्रीति गांधी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ही तीनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अकाउंट लॉक कर लिए हैं.
डिजिटल टीम में ये बदलाव पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में राष्ट्रीय संगठन में किए जा रहे बदलाव का हिस्सा हैं.
नई सूची में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, राम माधव, बैजयंत पांडा, डी पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, भारती पवार और मनप्रीत सिंह बादल समेत 13 नए उपाध्यक्ष बनाए गए हैं.
आठ महासचिवों की सूची में विनोद तावड़े और सुनील बंसल ही ऐसे चेहरे हैं जिन्हें बरकरार रखा गया है. वहीं स्मृति ईरानी की टीम में वापसी हुई है. उनके साथ त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को भी महासचिव बनाया गया है. बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बने हुए हैं. उनके साथ शिवप्रकाश और सौदान सिंह संयुक्त महासचिव (संगठन) के तौर पर काम करेंगे.
पार्टी ने कई नए सचिवों की भी घोषणा की है. इनमें कविता पाटीदार, के सुरेंद्रन, संदीप पाठक और मनोज तिग्गा शामिल हैं. इन नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियां दी गई हैं.
भाजपा के एक नेता ने नाम नहीं छापने की गुजारिश पर कहा, "उनकी वजह से कई ऐसे इन्फ्लुएंसर्स ने भाजपा से दूरी बना ली थी, जो पहले हमारा कंटेंट शेयर करते थे. कई इन्फ्लुएंसर्स सिर्फ पैसे के लिए नहीं बल्कि विचारधारा की वजह से हमारा कंटेंट शेयर करते हैं. पार्टी के भीतर वह एक पावर सेंटर बन गए थे. उनकी नजदीकियों की वजह से मीडिया संस्थान भी उन्हें काफी प्रमुखता देते थे."
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