NL Tippani
गंगोत्री से गंगासागर तक डंकापति का डंका और प्रेस की आज़ादी का बंटाधार
इस हफ्ते बात डंकापति के जलवे की. दरबार कई दिनों बाद सजा था. फ़िज़ा में गर्मियों की बेचैनी फैली हुई थी. गोया कि फाड़ू टाइप गर्मी पड़ रही थी. दबी जुबान में डंकापति के जश्न के चर्चे चल रहे थे और संजय समेत समस्त दरबारी, उनकी ताजा चुनावी सफलता को अह्लादित होकर निहार रहे थे. आर्यावर्त में उनके अश्वमेध का घोड़ा बंगाल से लेकर कामरूप प्रदेश तक निर्बाध दौड़ रहा है.
एक तरफ इनका “जश्न” चल रहा था. तो दूसरी तरफ दरबारी मीडिया के हुड़कचुल्लुओं के जश्न में पूरा स्टूडियो बंगाली-बंगाली हो रखा था.
डंकापति की चुनावी सफलता के जश्न के बीच उनके नेतृत्व में प्रेस की आज़ादी में आर्यावर्त ने एक बार फिर झंडे गाड़ दिए हैं. 180 देशों की लिस्ट में अब हमारा देश गिरते हुए 157वें पायदान पर पहुंच गया है. जिसकी स्थिति अब नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका से भी बदतर है.
देखिए पूरा एपिसोड.
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