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32 करोड़ गोलियां, 60 कंपनियां… और सवालों में सिस्टम: टैपेंटाडोल का पूरा सच
नीदरलैंड्स स्थित ओपन-सोर्स मीडिया प्लेटफॉर्म बेलिंगकैट की संपादकीय तौर पर स्वतंत्र रूप से प्रकाशित खोजी रिपोर्ट भी आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.
ये कहानी है एक छोटी सी गोली टैपेंटाडोल की. आईवी मॉर्फीन से 5 गुणा ताकतवर ये दवा है, दर्द निवारक के तौर पर इस्तेमाल की जाती है. बीते तीन सालों में इस दवा ने तहलका मचा दिया है.
साल 2023 से 2025 के बीच टैपेंटाडोल की 32 करोड़ से ज़्यादा गोलियां भारत से निर्यात की गईं. जिनकी अनुमानित कीमत 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा है. ये गोलियां अफ्रीका के देशों जैसे घाना, सिएरा लियोन, सेनेगल, बेनिन तक पहुंची लेकिन इनमें से कई देशों ने इस दवा को मंज़ूरी ही नहीं दी थी फिर भी गोलियों की खुराक वहां पहुंचती रही और इसका असर भी दिखा.
सामने आया कि ये गोलियां भारत की 60 से ज्यादा कंपनियों ने निर्यात की हैं. जबकि कागजों पर अनुमति सिर्फ दो कंपनियों को है. तो फिर भारत में वो कौन था जिसने टैपेंटाडोल के निर्यात को मंजूरी दी?
न्यूज़लॉन्ड्री को अपनी पड़ताल में चौंकाने वाला और भी बहुत कुछ मिला है. जैसे किसी कंपनी ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था दवा का गलत इस्तेमाल हो रहा है तो किसी कंपनी का पूरा रिकॉर्ड ही सवालों के घेरे में है या कहिए ये वो कंपनी थी, जो असल में थी ही नहीं.. सवाल तो ये भी है कि क्या कोई इसे रोकने वाला था? और अगर था तो वो चुप क्यों था?
न्यूज़लॉन्ड्री के प्रत्युष दीप की ये खोजी रिपोर्ट आपके इन सब सवालों का जवाब देगी. खास बात, ये रिपोर्ट पूरी तरह मुफ्त है.
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