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तथ्यों को ‘जूते की नोक’ पर रखकर डिबेट करते डीडी एंकर अशोक श्रीवास्तव के ‘सावरकर प्रेम’ का वीडियो वायरल
जनता के पैसे से चलने वाले दूरदर्शन के चैनल डीडी न्यूज के वरिष्ठ एंकर अशोक श्रीवास्तव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें श्रीवास्तव कांग्रेस नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ काफी अमार्यादित और घटिया भाषा का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं. उन्होंने राहुल गांधी को ‘सावरकर की चप्पल की धूल’ जैसा अपमानजनक संबोधन दिया. श्रीवास्तव ने यह भाषा एक चुने हुए लोकसभा सदस्य के खिलाफ व्यक्तिगत हमला बोलते हुए की.
उधर, वीडियो वायरल होने के बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दूरदर्शन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. उन्होंने श्रीवास्तव के खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान कार्यकर्ताओं का कहना था कि दूरदर्शन करदाता यानि जनता के पैसे से चलने वाला चैनल है. ऐसे में श्रीवास्तव की भाषा कतई स्वीकार्य नहीं है.
बाद में दिल्ली पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया.
विवाद बढ़ने पर अशोक श्रीवास्तव भी पीछे हटते नहीं दिखे. श्रीवास्तव ने कांग्रेस नेता श्रीनिवास को जवाब देते हुए लिखा, “सुनो श्रीनिवासन, विपक्ष के नेता और उनके चमचे मेरे शो में आकर स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के लिए अगर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करेंगे तो उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब मिलेगा.”
श्रीवास्तव ने कब की टिप्पणी?
उल्लेखनीय है कि अशोक श्रीवास्तव ने ये टिप्पणी अपने 10 मार्च के शो ‘दो टूक’ में की थी. उस दिन श्रीवास्तव राहुल गांधी के युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लेकर दिए गए एक बयान पर चर्चा कर रहे थे. विडंबना ये है कि कांग्रेस की ओर से कोई प्रवक्ता या नेता औपचारिक तौर पर इस चर्चा में शामिल नहीं था. यहां सैय्यद जव्वाद का परिचय कांग्रेस समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर कराया गया. जैसे कि इसी चर्चा में रोहित सिंह एक राजनीतिक विश्लेषक तौर पर बैठे थे लेकिन स्क्रीन पर उनका नाम बार-बार राष्ट्रीय संयोजक, युवा चेतना के तौर पर लिखा गया. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अशोक यादव और भाजपा से तुहिर सिन्हा इस चर्चा में शामिल थे.
श्रीवास्तव ने यह चर्चा राहुल गांधी के एआई समिट में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लेकर दिए गए बयान पर की. शो की शुरुआत में ही श्रीवास्तव ने जिस अंदाज में बहस की जमीन तैयार की, उसने पूरे कार्यक्रम का रुख तय कर दिया.
अशोक श्रीवास्तव ने चर्चा की शुरुआत में कहा, “एआई सम्मेलन जिसमें दुनिया भर के लोग आए थे. भारत के लिए तालियां बजा रहे थे. वहां नंगई करने वाले दंगाई जो थे, उनके समर्थन में उतर कर कुटिलता से मुस्कुराने वाले नेता प्रतिपक्ष को क्या कहा जाए?...”
यानी बहस शुरू होने से पहले ही फैसला लगभग सुनाया जा चुका था.
इसके बाद उन्होंने सबसे पहले सैय्यद जव्वाद को मौका दिया और उनसे पूछा- "कौन सा काम था, जो यूथ कांग्रेस वालों ने कर दिया? जिसको राहुल गांधी इशारा कर रहे थे, कौन सा काम हो गया?"
तब सैय्यद जव्वाद ने कहा कि भाजपा ने जो चाइनीज़ कुत्ते के जरिए एआई समिट में झूठ का पुलिंदा बनाया था. उसको बेकनकाब कर दिया.
श्रीवास्तव कुत्ता शब्द पर आपत्ति जताते हैं. वह कहते हैं, “मेरा बस एक अनुरोध है कि शब्दों की मर्यादा रखते हुए आप चाइनीज रोबोट कह देते तो अच्छा रहता. चाइनीज़ कुत्ता कह रहे हैं तो पता नहीं लोग क्या-क्या कल्पना कर लेते हैं.”
चीन के कुत्ते से दार्शनिक के ‘फर्जी कथन’ तक
इसके बाद चीन के कुत्ते से होते हुए श्रीवास्तव को चीन का एक दार्शनिक याद आ जाता है. श्रीवास्तव कहते हैं, “ जव्वाद जी, आपने चाइनीज़ कुत्ता बहुत कहा तो… मुझे चीन के एक दार्शनिक और रणनीतिकार एक सेनापति का एक कोट याद आया. चीन के बड़े दार्शनिक और रणनीतिकार, इन्होंने क्या कहा? अब इसका अर्थ जो है देश समझ ले. इसका अर्थ है- एन इविल मैन विल बर्न हिज ऑन नेशन टू द ग्राउंड टू रूल ओवर द ऐशेज़.”
वह आगे कहते हैं, “क्योंकि चीन की चर्चा चली तो चीन से यह भी सीखना चाहिए, जो सुन त्ज़ु ने कहा. चीन के दार्शनिक ने कहा कि जो एक खलनायक होता है ना.. वो अपने ही देश को जला देता है और अपने देश को जलाकर उस देश की राख पर जो है, वह शासन करना चाहता है. यह चीन के कुत्ते ने नहीं, चीन के दार्शनिक ने कहा. और यह किस खलनायक के संदर्भ में आज कहां फिट हो सकता है, यह देश की जनता तय करेगी, मैं तय नहीं करूंगा.”
उल्लेखनीय है कि चीन के जिस दार्शनिक सुन त्ज़ु के कथन का डीडी के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने हवाला दिया. वह उनका कथन है ही नहीं. 2020 के बाद से उनके नाम से जरूर इंटरनेट पर प्रचारित किया गया है. इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यह लेख पढ़िए.
इसके बाद श्रीवास्तव भाजपा प्रवक्ता से गलगोटिया के चाइनीज़ रोबोट को अपना बताने वाले दावे पर सवाल करते हैं. जिसके बाद भाजपा प्रवक्ता कहते हैं कि सरकार का ये काम नहीं है कि वो सभी उत्पादों की जांच करे. श्रीवास्तव पलट कर कोई सवाल नहीं पूछते और हां में हां मिलाते दिखते हैं. भाजपा प्रवक्ता यहां तक कह जाते हैं कि गलगोटिया का सरकार से कोई लेना देना नहीं हैं. गलगोटिया तो यूपीए के वक्त आया था.
इसके बाद सैय्यद जव्वाद इस पर सवाल उठाते हैं और पूछते हैं कि गलगोटिया के रोबोट को लेकर फिर किस दावे के साथ कैबिनेट मंत्री तक ट्वीट और रीट्वीट कर रहे थे.
हालांकि, भाजपा प्रवक्ता के इस दावे में ज्यादा दम नहीं है कि गलगोटिया का भाजपा सरकार से कोई संबंध नहीं है. न्यूज़लॉन्ड्री पर प्रतीक गोयल की यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे बीते सालों में गलगोटिया ने भाजपा सरकार के साथ संबंधों को कायम रखते हुए तरक्की की सीढ़ियां चढ़ी हैं.
इसके अलावा गलगोटिया यूनिवर्सिटी और चीनी रोबोट विवाद के बारे में जानने के लिए यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं. गलगोटिया विवाद में असल में किसे दोषी माना जाए. इस बारे में संपादक मनीषा पांडे का यह लेख भी पठनीय है.
हिंदी के सुधी पाठकों को संपादक अतुल चौरसिया की यह तीखी टिप्पणी भी गलगोटिया विवाद पर स्मरण कराई जाती है. जो असल में पूरे विवाद को कायदे से समेटती है.
“राहुल गांधी साहब को यह ज्ञान एंटायर पॉलिटिकल साइंस की डिग्री लेने वाले जो लोग हैं, जो नाली में से गैस बनाते हैं. और, जब बादल होते हैं तो बादलों के बीच राडार जो है, वो हवाई जहाज को पकड़ नहीं पाता है, तो ये ज्ञान वहां से आता है.”सैय्यद जव्वाद
सावरकर का जिक्र और राहुल गांधी का अपमान
बहस आगे बढ़ती है तो अशोक श्रीवास्तव इशारों में गलगोटिया के पीछे कांग्रेस का ही हाथ बताने लगते हैं. वह आगे कहते हैं कि केरल में राहुल गांधी का बयान है कि एआई रोबोटिक्स और मॉडर्न टेक्नोलॉजी में भारत मेजर प्लेयर नहीं है.
श्रीवास्तव एआई समिट के समर्थन में आए फिनलैंड और फ्रांस के नेताओं के बयानों के हवाले से समिट की सफलता की घोषणा करते हैं. साथ ही वह चैट जीपीटी के फाउंडर के बयान को भी पढ़ते हैं और पूरे भावावेश में ये साबित करने की कोशिश करते हैं कि राहुल गांधी का भारत की एआई तकनीक पर दिया बयान सही नहीं है. वह सवाल करते हैं, “राहुल गांधी को यह सब ज्ञान कहां से आ रहा है?”
इस सवाल के जवाब में सैय्यद जव्वाद उनकी चुटकी लेते हुए कहते हैं, “राहुल गांधी साहब को यह ज्ञान एंटायर पॉलिटिकल साइंस की डिग्री लेने वाले जो लोग हैं, जो नाली में से गैस बनाते हैं और, जब बादल होते हैं तो बादलों के बीच राडार जो है वो हवाई जहाज को पकड़ नहीं पाता है, ये ज्ञान वहां से आता है.”
इस चुटकी पर श्रीवास्तव भड़क जाते हैं और कहते हैं, “पीएम की आड़ में क्यों छुप रहे हैं. सीधा बोलिए.”
इसके बाद दोनों के बीच थोड़ी देर तीखी नोक-झोंक होती है. और सैय्यद जव्वाद कहते हैं, “राहुल गांधी के ज्ञान की जूते की धूल की नोक के बराबर भी नहीं है. राहुल गांधी का सामना कोई कर पाता है सदन में?”
जव्वाद की इस बात पर श्रीवास्तव पूरी तरह भड़क जाते हैं और जवाब में जो कुछ कहते हैं, उसी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह राहुल गांधी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करते हैं.
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