Khabar Baazi
ई-वेस्ट के अंडरवर्ल्ड से लेकर महिला संघर्ष को उजागर करती न्यूज़लॉन्ड्री और द न्यूज़ मिनट की पत्रकारिता को सम्मान
साल 2026 की पहली तिमाही खत्म होने को है और पत्रकार अब साल की अगली बड़ी खबर की तलाश में जुट चुके हैं. लेकिन आज दिल्ली में द मीडिया फाउंडेशन के 2025 जर्नलिज़्म अवॉर्ड्स ने पीछे मुड़कर देखने का एक मौका दिया.
न्यूज़लॉन्ड्री और द न्यू़ज़ मिनट की रिपोर्ट्स ने दो प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार हासिल किया. ये ताकीद हुई कि अच्छी पत्रकारिता की स्मृति एक न्यूज़ साइकिल से कहीं लंबी होती है.
निधि सुरेश को जेंडर पर पत्रकारिता के लिए कमला मानेकर अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया. यह अवॉर्ड उनकी उन रिपोर्ट्स की श्रृंखला के लिए था, जिसमें ‘पल्सर’ सुनी के साथ बातचीत शामिल थी- जिसे 2017 में एक प्रमुख मलयालम अभिनेत्री के अपहरण और बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था.
उनकी रिपोर्ट्स में सिस्टर रूथ को चुप कराने की संस्थागत कोशिशों का खुलासा भी शामिल था- वे भारत की पहली नन थीं जिन्होंने एक बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया. इसके अलावा बिंदू अमीनी की कहानी भी शामिल थी, जिन्हें सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के बाद केरल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. साथ ही भारतीय महिला क्रिकेटर दीप्ति शर्मा की एक विस्तृत प्रोफाइल भी इस श्रृंखला का हिस्सा थी.
इस श्रेणी में एकता सोनावने (क्वीरबीट) और तेजस वैद्य (बीबीसी गुजरात) को भी विशेष उल्लेख (स्पेशल मेंशन) के तौर पर सम्मानित किया गया.
न्यूज़लॉन्ड्री में स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट शिवनारायण राजपुरोहित को फियरलेस जर्नलिज़्म 2025 के विश्वनाथ-दिल्ली प्रेस अवॉर्ड में विशेष उल्लेख (स्पेशल मेंशन) के तौर पर सम्मान मिला.
यह सम्मान भारत के ई-वेस्ट अंडरवर्ल्ड पर उनकी तीन भागों वाली खोजी रिपोर्ट्स के लिए दिया गया. इस सीरीज़ में ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग सेक्टर और नियामक ढांचे में बड़ी खामियों को उजागर किया गया. कई संदिग्ध प्लांट्स ने कार्बन क्रेडिट्स या एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) सर्टिफिकेट्स के ज़रिए करोड़ों की कमाई की- जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को अपने वैधानिक दायित्व पूरे करने में मदद मिलती है.
इस श्रेणी में द वायर की सुकन्या शांता को विजेता घोषित किया गया. उनकी रिपोर्ट्स में राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मामलों में दोष स्वीकार करने की असामान्य रूप से अधिक दर पर सवाल उठाए गए.
सनद रहे यह वही पत्रकारिता है जिसमें समय, संसाधन और उस आज़ादी की ज़रूरत होती है, जो किसी कहानी को उसके अंतिम छोर तक ले जा सके.
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