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फेमा उल्लंघन के आरोप: न्यूज़क्लिक पर 120 करोड़ रुपये और पुरकायस्थ पर 64 करोड़ रुपये का जुर्माना
न्यूज़क्लिक चलाने वाली कंपनी पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत 120 करोड़ रुपये और पोर्टल के संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ पर 64 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ईडी का कहना है कि प्रबीर पुरकायस्थ और पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड ने फेमा प्रावधानों का दो मामलों में उल्लंघन किया है. पहला तो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) फंड का कथित रूप गलत प्रतिवेदन (मिस- डायरेक्शन) और दूसरा सेवाओं व निर्यात के गलत घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) देकर.
ईडी के अनुसार, निर्णायक प्राधिकरण (एजुडिकेटिंग अथॉरिटी) ने रिकॉर्ड, सबूतों और नोटिसों के जवाबों की विस्तृत जांच के बाद पाया कि 2018-19 के दौरान करीब 9.59 करोड़ रुपये का एफडीआई कारोबारी गतिविधि की प्रकृति को गलत तरीके से दिखाकर लिया गया. इससे फेमा के तहत तय शर्तों और एंट्री रूट के नियमों को दरकिनार किया गया.
एजेंसी ने कहा कि 2018-19 से 2023-24 के बीच सेवाओं के निर्यात के नाम पर करीब 82.63 करोड़ रुपये की विदेशी रकम प्राप्त हुई, जो फेमा प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया. आरोप है कि निर्यात का गलत वर्गीकरण किया गया और अनिवार्य रिपोर्टिंग तत्वों- जैसे सॉफ्टेक्स फॉर्म जमा करना जैसी शर्तों का पालन नहीं किया गया.
गौरतलब है कि फरवरी, 2021 में ईडी ने न्यूज़क्लिक से जुड़े कई लोगों के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की थी. उस समय न्यूज़क्लिक पर शेयरों का अधिक मूल्यांकन, फंड के कथित डायवर्जन और एफडीआई नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे.
इसके बाद न्यूज़क्लिक ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर ईडी को प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) की कॉपी देने और किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई से संरक्षण देने का निर्देश मांगा था. अदालत ने जून, 2021 में पुरकायस्थ के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, जिसे बाद में बढ़ाया जाता रहा.
इस मामले में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहले आरोप लगाया था कि यह न्यूज़ साइट अमेरिकी टेक उद्यमी नेविल रॉय सिंघम से फंडिंग पाने वाले चीनी प्रचार नेटवर्क का हिस्सा थी. हालांकि, सिंघम ने चार पन्नों के खंडन में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को “भ्रामक” और “संकेतों से भरा हुआ हमला” बताया था.
न्यूज़लॉन्ड्री ने पुरकायस्थ की गिरफ्तारी, न्यूज़क्लिक मामले और उसके प्रभावों पर विस्तार से रिपोर्टिंग की है.
इस बीच, एक अलग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह “अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि को धूमिल होने नहीं दे सकता”. यह टिप्पणी ब्रिटिश-भारतीय लेखिका और एक्टिविस्ट अमृत विल्सन के मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसकी रिपोर्ट बार एंड बेंच ने दी.
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी उस समय की, जब उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में दाखिल रिपोर्ट देखी, जिसमें विल्सन का ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड रद्द करने के कारण बताए गए थे.
2023 में केंद्र सरकार ने विल्सन पर “भारत-विरोधी गतिविधियों” और “देशहित के खिलाफ प्रचार” में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनका ओसीआई कार्ड रद्द कर दिया था. इसके बाद 82 वर्षीय विल्सन ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी.
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