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5 साल बाद सीबीआई ने खोज निकाले फैजान के ‘हत्यारे’, दिल्ली पुलिस के दो जवानों पर आरोप
सीबीआई ने आखिरकार उस पहेली की गुत्थी सुलझा दी है, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान 23 वर्षीय मुस्लिम युवक फैज़ान की मौत हुई थी. आरोप है कि दिल्ली पुलिस के दो पुलिसकर्मियों ने फैज़ान को पीटा और उसे वंदे मातरम् और राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. अदालत के रिकॉर्ड बताते हैं कि इस मामले में सीबीआई को “पर्याप्त सबूत” मिले हैं.
उल्लेखनीय है कि 2024 में न्यूज़लॉन्ड्री ने खुलासा किया था कि मामले की शुरुआत में ही सबूतों से छेड़छाड़ हुई थी और फैज़ान की मेडिकल-लीगल रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां थीं. कई गवाहों के बयान एक ही सच की ओर इशारा करते थे कि करदंपुरी में तैनात कुछ पुलिसकर्मी हमले के लिए जिम्मेदार थे और उन्होंने ही 24 फरवरी 2020 को उसे अस्पताल पहुंचाया था. ड्यूटी चार्ट से भी तस्वीर साफ होने के बावजूद, दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा ‘हेट क्राइम’ कहे गए इस मामले में किसी पुलिस अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था.
बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. सीबीआई ने 6 अगस्त 2024 को आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 148 (हथियारबंद दंगा), 149 (साझा मकसद) और 302 (हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज की थी.
बुधवार को सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए विशेष सीबीआई अदालत ने कहा, “जांच अधिकारी द्वारा इकट्ठा किए गए साक्ष्यों के आधार पर हेड कॉन्स्टेबल रविंदर कुमार और कॉन्स्टेबल पवन यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री है जिससे आईपीसी की धारा 323, 325 और 304(II) साथ में धारा 34 के तहत अपराध का संज्ञान लिया जा सके.”
गौरतलब है कि धारा 323 स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, धारा 325 गंभीर चोट पहुंचाने और धारा 304(II) उस स्थिति में लगती है जब आरोपी को यह पता हो कि उसका कृत्य मौत का कारण बन सकता है, लेकिन हत्या की सीधी मंशा साबित न हो. वहीं, धारा 34 सामूहिक रुप आपराधिक कृत्य करने से संबंधित है. अदालत ने दोनों पुलिसकर्मियों को 24 फरवरी को अगली सुनवाई पर उपस्थित होने का आदेश दिया है.
मालूम हो कि यह मामला उस वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें फैज़ान समेत पांच लोग सड़क पर घायल हालत में पड़े दिखते हैं, जबकि दिल्ली पुलिस के कुछ जवान उन्हें राष्ट्रगान गाने के लिए कहते और बीच-बीच में लाठियों से मारते नजर आते हैं. फैज़ान की 26 फरवरी 2020 को अस्पताल में मौत हो गई थी. उसे 24 फरवरी को कथित हमले के बाद ज्योति नगर थाने ले जाया गया था और अगले दिन रिहा किया गया.
जुलाई, 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए मामला सीबीआई को सौंप दिया था. यह याचिका फैज़ान की मां किस्मतुन ने दायर की थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की मौत “दिल्ली पुलिस के हाथों” हुई.
24 जुलाई 2024 के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था, “इस मामले में कानून के रखवाले ही उसके उल्लंघन के आरोपी हैं, और जांच भी वही एजेंसी कर रही है जिससे आरोपी जुड़े हैं. यह स्थिति विश्वास पैदा नहीं करती… जांच में कई अनियमितताएं दिखी हैं, इसलिए जांच का स्थानांतरण जरूरी है, ताकि प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भरोसा कायम हो सके.”
हाईकोर्ट में पेश फैज़ान के कथित ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ के अनुसार, “पुलिस ने उसे मुस्लिम होने के कारण पीटा और अपमानित किया. बाद में पुलिस उसे और अन्य लोगों को सफेद पुलिस जिप्सी में जीटीबी अस्पताल ले गई… वहां डॉक्टरों ने पुलिस के निर्देश पर ही जांच और इलाज किया. उसके सिर और कान पर टांके लगाए गए. इसके बाद पुलिस उसे ज्योति नगर थाने ले गई.”
फैज़ान की मां की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में पैरवी करने वाली वकील और सामाजिक कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने सीबीआई की चार्जशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जांच में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के नाम सामने नहीं लाए गए.
उन्होंने कहा, “पांच साल दस महीने बाद एक हेट क्राइम में चार्जशीट दाखिल हुई है, जहां वायरल वीडियो में पांच या उससे ज्यादा वर्दीधारी पुलिसकर्मी मुस्लिम युवकों को बेरहमी से पीटते और राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करते दिखते हैं. वीडियो साफ दिखाता है कि दो से ज्यादा पुलिसकर्मी हमले में शामिल थे, लेकिन सीबीआई बाकी नामों का पता नहीं लगा सकी.”
ग्रोवर ने ज्योति नगर थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए. उनके अनुसार, “पहले हमले के बाद फैज़ान को 24 घंटे से ज्यादा समय तक ज्योति नगर थाने में गैरकानूनी हिरासत में रखा गया और तब छोड़ा गया जब उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी. अपराध का यह दूसरा हिस्सा फिर से नजरअंदाज कर दिया गया है. यह केवल दो आरोपियों के खिलाफ देरी से और आधी-अधूरी कार्रवाई है.”
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला था.
मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित ख़बर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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