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“अगर पुलिस अपना काम करती तो मेरा नाम FIR में नहीं होता”- मोहम्मद दीपक
एक जिम मालिक पार्किंसन रोग से पीड़ित, 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार को बचाने के लिए तब आगे आ गया जब कुछ लोग उनसे उनकी दुकान के नाम से “बाबा” शब्द हटाने की मांग कर रहे थे. इसके बाद अब जिम मालिक दीपक कुमार कश्यप पुलिस एफआईआर, धमकियों और अपने जिम के बाहर जमा भीड़ का सामना कर रहा है.
दरअसल, उत्तराखंड का कोटद्वार इस समय पुलिस की कड़ी निगरानी में है. कई पुलिस अधिकारियों को बार-बार फोन करने और उनसे गुजारिश करने के बाद ही न्यूज़लॉन्ड्री को शहर में एंट्री की अनुमति मिली. पुलिस ने प्रवेश नहीं देने का तर्क यह दिया कि जब हालात अब सुधर चुके हैं तो दिल्ली मीडिया को कोटद्वार आने की क्या ज़रूरत है.
हकीकत क्या है यह जानने के लिए हमने दीपक कुमार कश्यप से मुलाकात की. जिन्हें अब लोग “मोहम्मद दीपक” के नाम से जानते हैं. यह वही नाम है जो उन्होंने 26 जनवरी को हिंदुत्व संगठनों के कार्यकर्ताओं को चुनौती देते हुए खुद को बताया था.
भीड़ का सामना करते हुए दीपक का वीडियो वायरल होने के बाद 31 जनवरी को बजरंग दल के समर्थक उनके जिम के बाहर जमा हो गए. इसके बाद धमकियों का सिलसिला शुरू हुआ और कई एफआईआर दर्ज की गईं. इनमें एक एफआईआर दीपक के खिलाफ भी है. इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
दीपक का कहना है कि पुलिस घंटों तक मूकदर्शक बनी रही, जबकि भीड़ उनके परिवार को गालियां दे रही थी और डराने-धमकाने का माहौल बना रही थी. जिन लोगों ने यह सब किया, उनके नाम और जानकारी देने के बावजूद उनकी शिकायत पर दर्ज एफआईआर में केवल अज्ञात लोगों का ज़िक्र किया गया है.
दीपक कहते हैं, “अगर पुलिस अपना काम ठीक से कर रही होती, तो मेरे खिलाफ कभी एफआईआर दर्ज ही नहीं होती."
इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तारूढ़ भाजपा की चुप्पी को लेकर दीपक कहते हैं कि यह बेहद दुखद है, खासकर तब जब एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.
अपने जन्मदिन के दिन दीपक हनुमान मंदिर जाने की तैयारी कर रहे थे. उसी देवता का नाम लेकर वे लोग खुद को उनका अनुयायी बताते हैं, जो आज उन्हें निशाना बना रहे हैं.
वे कहते हैं, “मुझे समझ नहीं आता कि वे खुद को हनुमान का भक्त कैसे कहते हैं. मैं भी हनुमान का भक्त हूं, लेकिन मैं उस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करता, जैसी वे करते हैं.”
देखिए पूरा वीडियो-
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