Video
तलवारें, नारे और ‘हिंदू राष्ट्र’: अल्पसंख्यकों के खिलाफ ‘धार्मिक युद्ध’ का आह्वान करने वाले ‘महाराज’
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि नफरती भाषण के मामलों में पुलिस को स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए. लेकिन इसके बावजूद, हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है. सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज़्ड हेट (सीएसओएच) की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में नफरती भाषणों की संख्या बढ़कर 1,318 तक पहुंच गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1,165 था.
नफरती भाषण फैलाने वाले इस नेटवर्क में एक नाम मधुराम शरण शिवा का भी है, जो खुद को ‘महंत’ या ‘सन्यासी’ बताते हैं. शिवा कानपुर स्थित शिव शक्ति अखाड़ा के संस्थापक हैं. इस महीने की शुरुआत में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह से जुड़े एक सम्मेलन में शिवा ने मुसलमानों पर नौकरियां 'छीनने' और त्योहारों के दौरान हिंदुओं को परेशान करने का आरोप लगाया. इस दौरान उन्होंने हिंदुओं से हथियारों की ट्रेनिंग लेने की अपील की.
शिवा ने ‘अधर्मियों’ को संरक्षण देने वालों और अपने बच्चों को मिशनरी स्कूलों में भेजने वालों को ‘गद्दार’ करार दिया और अंततः ‘अधर्मियों’ के खिलाफ युद्ध और उनके 'समूल नाश' को ही समाधान बताया.
न्यूज़लॉन्ड्री ने हाल ही में नोएडा के एक तीन-सितारा होटल में शिवा से मुलाकात कर बातचीत की. भगवा पहने शिवा, तलवार और कटार के साथ होटल के कमरे में मौजूद थे.
2001 से आरएसएस से जुड़े रहे और हाल के वर्षों में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता रहे शिवा को उनके अनुयायी ‘महाराज जी’ कहते हैं. अक्टूबर 2024 में उन्होंने शिव शक्ति अखाड़ा की स्थापना की, जिसे हथियारबंद हिंदू सन्यासियों का एक समूह बताया जाता है.
इसके बाद से शिवा और अन्य हथियारबंद ‘सन्यासियों’ ने अब तक 200 से अधिक रैलियां निकाली हैं. इन रैलियों में हिंदुओं से ‘धार्मिक युद्ध’ की तैयारी के लिए हथियार उठाने और ‘हिंदू राष्ट्र’ की स्थापना का आह्वान किया गया है.
इन सभाओं में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ आर्थिक बहिष्कार और हिंसा की बातें भी की गईं, साथ ही यह दावा किया गया कि हिंदू डर में जी रहे हैं और खतरे में हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में शिवा ने अपने नारे ‘शस्त्रमेव जयते’ (हथियारों से ही विजय मिलती है) को समझाते हुए कहा कि 'सिर्फ वही लोग अपने सच को साबित कर सकते हैं जो पर्याप्त रूप से शक्तिशाली हों.'
जब उनसे पूछा गया कि अगर उनके अनुयायियों द्वारा उठाए गए हथियार किसी अपराध या हत्या में इस्तेमाल होते हैं तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, तो उन्होंने कहा, 'उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी.'
उत्तर प्रदेश में शिवा की रैलियां जिला प्रशासन की अनुमति से आयोजित की गई हैं और कई जगहों पर इन्हें पुलिस सुरक्षा भी मिली है. स्थानीय अधिकारियों और नेताओं द्वारा इस हथियारबंद ‘सन्यासी’ का अभिनंदन भी किया गया है.
न्यूज़लॉन्ड्री ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर सहित कई पुलिस अधिकारियों से यह जानने के लिए संपर्क किया कि शिवा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई है या नहीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
हालांकि, मधुराम शरण शिवा इस विशाल नफरती नेटवर्क का सिर्फ एक हिस्सा हैं, जो धर्म का इस्तेमाल कर देश के सामाजिक ताने-बाने को और कमजोर करने का काम कर रहा है.
देखिए ये वीडियो.
Also Read
-
4 tests, 1 question: Did SIR shape Bengal outcome?
-
East India’s Hindutva turn may fuel a new era of India-Bangladesh hostility
-
Congress-DMK split: How Rahul-Stalin bonhomie collapsed over Vijay’s rise
-
Press freedom index puts focus on newsrooms telling India’s hardest stories
-
Beyond anti-incumbency: What Kerala’s verdict says about the LDF