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‘हमारी ज़िंदगी वहीं रुक गई’: इंसाफ के इंतजार में गुजरे पांच सालों पर बोले दिल्ली दंगों के अंडरट्रायल परिवार
2020 के ‘दिल्ली दंगों की साज़िश’ के मामले में बीते पांच साल से बंद 7 में से 5 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. कोर्ट ने उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार कर दिया. गौरतलब है कि यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले में अब तक मुक़दमे की औपचारिक सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है.
जिन पांच आरोपियों को ज़मानत मिली है, उन पर 12 कड़ी शर्तें लगाई गई हैं. इनमें दिल्ली एनसीआर से बाहर जाने, मीडिया से बात करने समेत थाने में रिपोर्ट करने जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं. साथ ही आरोपियों को मामले से जुड़ी किसी भी तरह की सार्वजनिक टिप्पणी पर रोक भी लगाई है.
न्यूज़लॉन्ड्री ने सशर्त जमानत पर बाहर आए शिफ़ा उर रहमान, शादाब अहमद और सलीम ख़ान के परिवारों से बात की, ताकि यह समझा जा सके कि बिना ट्रायल के लंबी क़ैद ने बाहर इंतज़ार कर रहे लोगों की ज़िंदगी को कैसे बदल दिया.
शिफा उर रहमान की बीवी नूरैन ने कहा कि 26 अप्रैल 2020 के बाद से जैसी उनकी ज़िंदगी रुक गई. उनकी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा छिन गया. साथ ही वह बताती हैं कि कैसे इस मामले ने उनके परिवार को प्रभावित किया और कैसे उनके दोनों बेटों के लिए भी बीते पांच साल मुश्किल भरे रहे हैं.
वहीं, सलीम ख़ान की बेटी डॉ. सायमा ख़ान अब एक डेंटल क्लिनिक चलाती हैं. वह बताती हैं कि इस मामले ने उन्हें घर की ज़िम्मेदारियां समय से पहले संभालने पर मजबूर कर दिया. सायमा कहती हैं, “तीन महीने तो हमें यह तक नहीं पता था कि वह कहां हैं. गिरफ़्तारी के बाद जब मैंने उन्हें पहली बार देखा तो पहचान ही नहीं पाई.”
गौरतलब है कि 23 से 26 फ़रवरी 2020 के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाक़ों में हिंसा भड़क उठी थी. यह हिंसा नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध और समर्थन में खड़े समूहों के बीच बढ़ते तनाव के बाद हुई थी. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से दो-तिहाई से अधिक मुसलमान थे.
देखिए ये खास रिपोर्ट.
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