Report
बुलडोज़र से बैरिकेड तक: तुर्कमान गेट में चप्पे-चप्पे पर तैनात सुरक्षाबल और 'शांति का भ्रम' पैदा करता सन्नाटा!
राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में 6 जनवरी की देर रात दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोज़र कार्रवाई की. इस दौरान एक बारात घर और एक क्लीनिक को तोड़ा गया. हालांकि, इस कार्रवाई में मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. दिल्ली नगर निगम का दावा है कि उसने ये कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के बाद की है.
कार्रवाई के दौरान रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच आक्रोशित भीड़ ने मौके पर तैनात पुलिस बल पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. पथराव में एक एसएचओ सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनका इलाज एलएनजेपी अस्पताल में चल रहा है.
घटना के बाद चांदनी महल थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर पहले दिन पांच और दूसरे दिन छह लोगों को गिरफ्तार किया गया. अभी तक कुल 11 गिरफ्तार आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरों और सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है.
दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (सेंट्रल) निधिन वलसन के अनुसार, मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है. पुलिस ने यह भी दावा किया है कि पथराव में स्थानीय लोगों के साथ कुछ बाहरी तत्व और राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोग भी शामिल थे. सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने और भीड़ को भड़काने वालों की भी पहचान की जा रही है.
एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद के पास की जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा था और संबंधित पक्षों को कार्रवाई से पहले पर्याप्त समय और सूचना दी गई थी. पथराव की वजह मस्जिद तोड़े जाने की झूठी अफवाह बताई जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, एमसीडी के किसी कर्मचारी को इस घटना में चोट नहीं आई.
दूसरे दिन भी मलबा हटाने का काम जारी रहा. इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है. धारा 144 लागू है, बैरिकेडिंग की गई है और सीमित आवाजाही की अनुमति दी गई है.
स्थानीय लोगों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने मस्जिद को नुकसान न पहुंचने की पुष्टि की है, हालांकि, कुछ लोगों ने कार्रवाई की प्रक्रिया और रात में तोड़फोड़ किए जाने पर सवाल भी उठाए हैं. पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और इलाके में किसी तरह का सांप्रदायिक तनाव नहीं है.
बीते पच्चीस सालों ने ख़बरें पढ़ने के हमारे तरीके को बदल दिया है, लेकिन इस मूल सत्य को नहीं बदला है कि लोकतंत्र को विज्ञापनदाताओं और सत्ता से मुक्त प्रेस की ज़रूरत है. एनएल-टीएनएम को सब्स्क्राइब करें और उस स्वतंत्रता की रक्षा में मदद करें.
Also Read
-
Awadh ground report: UP’s swing voters speak, from Mohanlalganj to Ayodhya
-
What this Diwali should teach the Indian retail investor
-
From Sittilingi to Sijimali: The doctor Odisha police arrested over anti-mining agitation
-
How a trust close to BJP got five elephants from Assam for Tamil Nadu temples
-
After Uttarakhand, it’s MP: CM Yadav spent Rs 230 cr to sell a Rs 30 lakh cr ‘MoU’ mirage