Report
जेएनयू और डीयू के सैकड़ों प्रोफेसर्स ने दिल्ली चुनाव में भाजपा को जिताने की ली शपथ
दिल्ली विधानसभा चुनाव पूरे उरूज पर है. आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुख्य रूप से मुकाबले की बात कही जा रही है. दोनों ही पार्टियों की कोशिश है कि वे चुनाव जीत जाएं. पार्टियों की ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशश जारी है. कोई नुक्कड़ सभाएं कर रहा है तो कोई सम्मेलन.
नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी हॉल में बीते 24 जनवरी को एक ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) और दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के सैकड़ों प्रोफेसर्स ने हिस्सा लिया. खास बात ये थी कि यहां आए इन प्रोफेसर्स ने दिल्ली चुनाव में भाजपा को जिताने का संकल्प लिया. दो घंटे से ज्यादा वक्त तक चले इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और दिल्ली प्रभारी बैजयंत जय पांडा और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की.
मंच से डूटा अध्यक्ष एवं प्रोफेसर ए.के. भागी ने अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि 8 फरवरी को हमारी खुशी 100 गुणा बढ़ जाएगी, जब दिल्ली में हम चुनाव जीतेंगे. इसके बाद हॉल ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंद्रप्रस्थ कॉलेज की प्रोफेसर चेतना गुप्ता भी इस कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. वे कहती हैं, “उस मीटिंग के बाद से हम लोगों को समझा रहे हैं कि पांच तारीख को जरूर वोट करें. इस बार बदलाव जरूरी है, इसलिए सबको बता रहे हैं कि भाजपा को ही वोट करें. हम अपने लेवल पर मीटिंग कर रहे हैं.”
वे कहती हैं, "मैं एबीवीपी के पूर्वी विभाग में हूं तो इसलिए भी अपने लेवल पर मीटिंग कर रही हूं. मैं इस समय पर चांदनी चौक इलाके में लगी हूं. हम अपने कॉलेज के साथ-साथ दूसरे कॉलेजों के टीचर्स से भी संपर्क कर रहे हैं. हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि अगर बदलाव चाहते हैं तो भाजपा को ही वोट दें. हम टीचर्स को साथ में लेकर भी प्रचार कर रहे हैं क्योंकि हमें 5 और 6 दोनों तारीख में ही वोट करना है.
5 को दिल्ली विधानसभा के लिए और 6 को दिल्ली विश्वविद्यालय के नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) चुनाव के लिए. इसके लिए हम डीयू के टीचर्स से भी संपर्क कर रहे हैं. 24 जनवरी को हम करीब 300 से 350 टीचर्स शामिल हुए थे."
चेतना गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2013 से पढ़ा रही हैं. हालांकि, साल 2023 में उन्हें स्थायी नियुक्ति मिली. वे फिलहाल आईपी कॉलेज में प्राध्यापक हैं. वर्तमान में वे सेवा भारती और राष्ट्रीय सेवा समिति, स्वदेशी जागरण मंच और एबीवीपी के पूर्वी विभाग से जुड़ी हैं. वह आखिर में कहती हैं कि हम ऐसी बैठकें दिल्ली यूनिवर्सिटी में करते रहते हैं जिनमें 5 और 6 दोनों ही तारीख के मुद्दे रहते हैं.
दिल्ली के साथ-साथ डीयू को भी नई दिशा!
इस दौरान मंच का संचालन एबीवीपी से जुड़े भरत खटाना ने किया. खटाना दिल्ली यूनिवर्सिटी में ही असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. वे मंच से कहते हैं, “एक दिन के शॉर्ट नोटिस पर आप लोग आए इसके लिए आभारी हूं. आने वाले समय में दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ-साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव को भी हम एक नई दिशा की ओर लेकर जाएंगे. मैं ऐसी उम्मीद करता हूं."
कार्यक्रम की तस्वीर ट्वीट करते हुए उन्होंने एक्स पर लिखा, “दिल्ली विधानसभा चुनाव के संदर्भ में “लोकमत परिष्कार अभियान” के तहत दिल्ली के प्राध्यापकों का “प्राध्यापक मिलन कार्यक्रम” आयोजित किया गया. मुख्य अथिति के रूप में सुनील बंसल (भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री) और बैजयंत जय पांडा (भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) भी उपस्थित रहे.”
इस कार्यक्रम में टीचर्स को बोला गया कि वे लोग अपने इलाके में भाजपा के लिए प्रचार करें. यहीं पर हमारी मुलाकात सरस्वती कॉलेज के एक टीचर से हुई. उन्हें मुनिरका इलाके में प्रचार करने की जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे ही अन्य टीचर्स को भी अलग-अलग इलाकों में प्रचार करने की जिम्मेदारी मिली है.
सहायक प्रोफेसर हर्ष गोयल ने एक्स पर लिखा- दिल्ली में भजपा की सरकार बनानी है यही हमारा संकल्प है.
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने पीएम मोदी को टैग करते हुए एक्स पर लिखा कि नई दिल्ली में प्राध्यापक मिलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की.
एनडीएमसी और भाजपा कनेक्शन
एनडीएमसी के अध्यक्ष आईएएस अधिकारी केशव चंद्रा हैं. वहीं, उपाध्यक्ष कुलजीत चहल हैं, जो भाजपा के नेता हैं. उनसे पहले सतीश उपाध्याय थे. वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे. फिलहाल मालवीय नगर से चुनाव लड़ रहे हैं.
बता दें कि भारतीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव रोहित चहल भी यहां मौजूद रहे. कुलजीत चहल उनके चाचा हैं. रोहित की मौजूदगी में ही इस कार्यक्रम को अंजाम दिया गया.
कार्यक्रम की शुरुआत में वह गेट पर खड़े थे. धीरे-धीरे टीचर्स का जुटान हो रहा था. टीचर्स से बात करते हुए वह कहते हैं कि 350 टीचर्स की सूची है. हालांकि, हमने 500 लोगों का खाना बनाया है. चिंता की कोई बात नहीं है. जितने ज्यादा से ज्यादा हो जाएं उतना अच्छा है.
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
आचार संहिता के दौरान किसी भी कार्यक्रम के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत होती है. जब निर्वाचन आयोग के संयुक्त निदेशक अनुज चांडक से हमने इस कार्यक्रम की अनुमति को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी कार्यक्रम की इजाजत डीओ से लेनी होती है.
वे बताते हैं, "हमारा एक सुविधा पोर्टल है, जिसमें पार्टी कैंडिडेट्स वगैरह जिसको भी अनुमति लेनी है तो वहां पर अप्लाई करते हैं. लेकिन इसके लिए आपको डीओ से पता करना पड़ेगा."
इसके बाद हमने स्थानीय डीओ निशांत बौद्ध से संपर्क किया. उनके दफ्तर ने यह बात स्वीकार तो की कि अनुमति उनके यहां मिलती है लेकिन इस कार्यक्रम की अनुमति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.
गाजर का हलवा और यथास्थिति की अपील
कार्यक्रम की समाप्ति के दौरान मंच का संचालन कर रहे भरत खटाना ने जोर देकर कहा कि बिना भोजन किए यहां से कोई नहीं जाएगा. इसके बाद खाने की स्टॉल पर लोगों की भीड़ लग गई.
रंग बिरंगी लाइट की रोशनी में प्रोफेसर एक दूसरे से अपना परिचय करते हुए नंबर शेयर कर रहे थे. एक दूसरे को भाई साब- भाई साब, जो कि आरएसएस की परंपरा भी है, से संबोधित कर रहे थे. खाना परोस रहे हर वेटर के सिर पर भाजपा चुनाव चिन्ह वाली टोपी और गले में गमछा था. एक प्रोफेसर के बहुत ज्यादा फोर्स करने पर हमें भी यहां थोड़ा भोग लगाना पड़ा.
खुले आसमान के नीचे लगे इन स्टॉल में गाजर का हलवा, गोल गप्पे, डोसा, पावभाजी और आलू टिक्की थे.
हमने कई अन्य प्रोफेसर्स से भी संपर्क किया. इनमें ज्यादातर ने इस बारे में कोई भी बात करने से मना कर दिया. उनका कहना था कि हम इस मामले में सामने आएंगे तो फिर हमें टारगेट किया जाएगा. अभी जैसे चल रहा है वैसे चलने दीजिए.
Also Read
-
India’s media problem in 2 headlines: ‘Anti-women’ opposition, ‘mastermind’ Nida Khan
-
Indian firms dumped Rs 1,000 crore of unapproved opioid pills into West Africa’s drug crisis
-
Deleted despite documents: Inside West Bengal’s ‘political’ SIR
-
Appellate tribunals or a black hole? Where the Bengal SIR goes to bury a ‘second chance’
-
SP youth leader Pooja Shukla on women’s bill, SIR and battle for 2027