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हरियाणा: मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, और फाइल ही गुम हो गई
हरियाणा में चुनाव की घोषणा हो चुकी है. ऐसे में वहां भ्रष्टाचार की क्या स्थिति है? भाजपा का दावा है कि उनके शासन में भ्रष्टाचार में कमी आई है. क्या ऐसा हुआ है? आंकड़ों और लोगों से बात करने पर ऐसा तो नहीं लगता है.
हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि 1 जनवरी 2015 से 30 नवंबर 2023 तक हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के 1536 मामले दर्ज किए हैं.
खट्टर द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भ्रष्टाचार निरोध ब्यूरो ने इस बीच 1140 तो हरियाणा पुलिस ने कुल 396 मामले दर्ज किए. कुल मिलाकर भ्रष्टाचार के 1536 मामले दर्ज हुए हैं. यानि हर दो दिन में एक भ्रष्टाचार का मामला हरियाणा में दर्ज हुआ.
इस दौरान सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचार के मामले फरीदाबाद से सामने आए. कुल 134. अगर टॉप 5 जिलों की बात करें तो फरीदाबाद के बाद 132 मामलों के साथ गुरुग्राम दूसरे नंबर पर है. 105 मामलों के साथ सोनीपत तीसरे तो 101 मामलों के साथ हिसार चौथे नंबर पर है. वहीं, मनोहर लाल खट्टर का गृह जिला और सीएम सिटी कहे जाने वाले करनाल, 83 मामलों के साथ 5वें नंबर पर है.
विभागवार दर्ज हुए भ्रष्टाचार के मामलों की बात करें तो सबसे ज्यादा मामले पुलिस विभाग के खिलाफ दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा 366 है. दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग (245 मामले), तीसरे नंबर पर बिजली विभाग (130 मामले) और चौथे नंबर पर शिक्षा विभाग है, जहां 51 मामले दर्ज हुए हैं. इसमें से कई शिकायतें आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भी हुई हैं.
प्रदेश की बीजेपी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति कितनी सजग है, इस बात का अंदाजा साल 2016 में बीजेपी विधायक ज्ञानचंद गुप्ता द्वारा दी गई शिकायत से होता है. उन्होंने साल 2015 में पंचकूला में हुए 13 प्लॉटों के आवंटन में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला उठाया.
2019 तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ. हरियाणा में बीजेपी की सरकार दोबारा बनी. ज्ञानचंद गुप्ता ने फिर इस मामले को उठाया और सीएम खट्टर से सीबीआई की जांच की मांग की. जिसके बाद जून, 2020 में खट्टर ने मामला सीबीआई को सौंप दिया.
आगे क्या हुआ होगा? सीबीआई ने कार्रवाई की होगी? या कुछ और हुआ होगा. जानने के लिए देखिए ये वीडियो रिपोर्ट.
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