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एनएल सारांश: राम मंदिर पर शंकराचार्यों और कांग्रेस का इनकार कितना सही, कितना गलत
पिछले कुछ दिनों से मीडिया में अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर मची रार पर चर्चा हो रही है. एक तरफ अयोध्या धाम और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को भव्य कवरेज मिल रही है. वहीं, दूसरी तरफ चार शंकराचार्यों की आपत्ति को नेपथ्य में भेजने की तैयारी है. वहीं, राम मंदिर मुद्दे को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ तो ऐसा माहौल निर्मित किया है जिसमें उसकी स्थिति आगे कुआं पीछे खाई वाली हो गई है.
भाजपा और आरएसएस द्वारा कब्जाए गए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा आयोजन में कांग्रेस को निमंत्रण पत्र भेजकर घेरा गया. इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि अयोध्या जाने न जाने को लेकर धर्मसंकट में फंसी कांग्रेस के लिए बचने की एक राह खुल गई.
दरअसल, देश की सिद्ध पीठों के चार शंकराचार्यों ने अयोध्या में होने वाले इस भव्य दिव्य रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से इनकार कर दिया. एक शंकारचार्य ने तो बहुत ही कड़े शब्दों में यहां तक कह डाला कि अगर वो चले गए तो सोचने वाली बात ये होगी कि उसके बाद मोदी जी का क्या स्थान होगा?
अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शंकराचार्यों की नाराजगी और कांग्रेस के न्योते अस्वीकार करने पर देखिए ये सारांश.
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