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अडाणी-हिंडनबर्ग मामले पर सुप्रीम कोर्ट: 'क्या सेबी को अब पत्रकारों का अनुसरण करना चाहिए?'
सुप्रीम कोर्ट ने अडाणी समूह के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, हिंडेनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट में अडाणी समूह द्वारा अपने शेयरों की कीमतें बढ़ाने के आरोप सामने आए थे. जिसके बाद इनकी जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं. इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुरक्षित रख लिया.
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान सेबी पर अपना भरोसा जताया. हालांकि, वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि सेबी की अब तक की जांच "विश्वसनीय नहीं" है. मालूम हो कि अडाणी मामले की जांच सेबी ही कर रही है.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "सेबी एक वैधानिक निकाय है. जिसे विशेष रूप से शेयर बाजार में हेरफेर की जांच करने का काम सौंपा गया है. क्या किसी अदालत के लिए बिना किसी ठोस आधार के यह कहना उचित है कि हमें सेबी पर भरोसा नहीं है?"
मुख्य न्यायधीश ने यह भी कहा कि सेबी "अखबार में छपी किसी बात" के आधार पर नहीं चल सकता. “मुझे नहीं लगता कि आप किसी समाचार पत्र, चाहे गार्जियन हो या फाइनेंशियल टाइम्स, में लिखी गई किसी बात को ईश्वरीय सत्य मान सकते हैं. हम यह नहीं कह रहे हैं कि हमें उन पर संदेह है, लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि यह वैधानिक नियामक को बदनाम करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. क्या सेबी को अब पत्रकारों का अनुसरण करना चाहिए?”
इस बीच, भूषण ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेबी, "अपनी पूरी शक्ति" के साथ भी "प्रासंगिक दस्तावेज़" क्यों नहीं हासिल कर सकी, जबकि पत्रकार ऐसा कर सकते हैं. “इतने सालों तक उन्हें ये दस्तावेज़ कैसे नहीं मिले? ओसीसीआरपी, द गार्जियन आदि ने दिखाया है कि अडाणी शेयरों में निवेश करने वाली इनमें से अधिकांश ऑफशोर कंपनियों को विनोद अडाणी द्वारा नियंत्रित किया गया है.”
न्यूज़लॉन्ड्री ने इससे पहले रिपोर्ट किया था कि ओसीसीआरपी द्वारा प्राप्त और गार्जियन एवं फाइनेंशियल टाइम्स के साथ साझा किए गए दस्तावेजों में 2013 और 2017 के बीच चार अडाणी कंपनियों द्वारा कथित स्टॉक हेरफेर के बारे में संकेत हैं. इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए यह रिपोर्ट पढ़ें.
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