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कामरा की याचिका पर केंद्र का जवाबः 5 जुलाई तक अधिसूचित नहीं होगी फैक्ट चेक यूनिट
कॉमेडियन कुणाल कामरा की ओर से संशोधित आईटी नियमों को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी याचिका पर जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया कि वह 5 जुलाई तक अपनी फैक्ट चेक यूनिट को अधिसूचित नहीं करेगी.
केंद्र सरकार की ओर से गत 6 अप्रैल को अधिसूचित किए गए संशोधनों में कहा गया कि सोशल मीडिया और अन्य मध्यस्थ कंपनियों को सरकारी फैक्ट चेक यूनिट द्वारा गलत समझे जाने वाली सामग्री को हटाना होगा.
दरअसल, फैक्ट चेक यूनिट अगर केंद्र सरकार या उसके कामों से संबंधित किसी जानकारी या सूचना को गलत, भ्रामक और झूठा घोषित करती है तो मध्यस्थ कंपनी को उसे प्रदर्शित, प्रसारित, प्रकाशित, अपलोड, स्टोर या अपडेट करने की अनुमति नहीं होगी. जो मध्यस्थ कंपनी इस नियम का पालन नहीं करेगी उसे भारत में कानूनी रूप से काम करने की अनुमति नहीं होगी.
कुणाल की याचिका पर सुनवाई से पूर्व गुरुवार को जस्टिस जीएस पटेल और जस्टिस नीला गोखले की पीठ के समक्ष, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने मामले को 8 जून के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. जिसका कामरा के वकील डेरियस खंबाटा और आरती राघवन ने विरोध करते हुए तर्क दिया कि इस दौरान अधिसूचना लागू हो सकती है.
हालांकि, अदालत ने कहा कि “जब तक अधिसूचित नहीं होती” तब तक फैक्ट चेक यूनिट द्वारा नियम लागू नहीं हो सकते हैं. कोर्ट अब मामले में अगली सुनवाई 8 जून को करेगा.
अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, फैक्ट चेक यूनिट प्रेस सूचना ब्यूरो की होगी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बताया था कि संशोधन में इसका उल्लेख नहीं है. उन्होंने प्रेस को यह भी आश्वासन दिया था कि नए दायित्व केवल बीच की कंपनी पर लागू होंगे मीडिया पर नहीं हालांकि पत्रकार उनकी इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते. पत्रकार ऐसा क्यों समझते हैं और इसे सेंसरशिप क्यों मानते हैं, ये जानने के लिए न्यूज़लॉन्ड्री की यह रिपोर्ट पढ़िए.
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