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आईपीएल सट्टा घोटाला: ज़ी मीडिया ने धोनी द्वारा उठाए गए 17 सवालों के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का किया रुख
ज़ी मीडिया ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की और उसे नौ साल पहले ज़ी न्यूज़ के खिलाफ दायर मानहानि के मुक़दमे के संबंध में एमएस धोनी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के निर्देश देने वाले एक आदेश को रद्द करने की मांग की.
यह आदेश पिछले साल नवंबर में पारित किया गया था.
2014 में धोनी ने मानहानि मुकदमे में आरोप लगाया गया था की ज़ी न्यूज़ ने उन्हें आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले से जोड़ने वाली झूठी खबरों को प्रसारित किया था. ज़ी के अलावा मुकदमे में पत्रकार सुधीर चौधरी और आईपीएल अधिकारी संपथ कुमार को नामजद करते हुए धोनी ने 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी. एमएस धोनी उस समय चेन्नई सुपरकिंग के कप्तान थे और आईपीएस संपथ कुमार ने इस घोटाले की जांच की थी.
बार और बेंच के अनुसार, उच्च न्यायालय ने ज़ी न्यूज़ और अन्य को "अपमानजनक बयान देने" से रोकने के लिए एक अंतरिम निषेधाज्ञा दी थी. ज़ी और उसके समूह ने फिर अदालत में अपने लिखित बयान दर्ज कराये थे, जिसके बाद धोनी ने एक और आवेदन दायर किया जिसमें आरोप लगाया गया कि कुमार के लिखित बयान में मानहानि के और उदाहरण हैं.
इसके बाद पिछले साल जुलाई में, मद्रास उच्च न्यायालय ने धोनी को "17 सवालों का एक सेट" के साथ ज़ी मीडिया से पूछताछ की अनुमति दी थी, क्योंकि धोनी ने आरोप लगाया था कि ज़ी का लिखित बयान "साधारण था और इसमें सटीक प्रतिक्रियाएं शामिल नहीं थीं". ज़ी ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया कि इस अनुमति को रद्द कर दिया जाए. हिंदू के अनुसार, मीडिया कंपनी ने कहा कि धोनी "अपने खिलाफ सबूत को जानने की कोशिश कर रहे थे."
बार और बेंच ने बताया कि ज़ी की अपील को नवंबर में खारिज कर दिया गया था और इसलिए उसने कल उच्च न्यायालय में एक और अपील दायर की, जिसमें कहा गया कि आदेश में "अनुचितता" और "तंग करने की प्रवृत्ति" की कल्पना शामिल नहीं थी. मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी.
सट्टेबाजी और जुआ भारत में गंभीर मुद्दे हैं लेकिन लगता है कि बीसीसीआई कानून की अपनी व्याख्या करता है. 2021 में आईपीएल के खिलाड़ियों पर बोली लगाने के आयोजन में जीतने वाली बोली बीसीसीआई के बेस प्राइस से 60 से 250 प्रतिशत तक ज्यादा थी और नए टीम मालिकों में एक अंतरराष्ट्रीय जुआ कंपनी भी शामिल है.
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