NL Tippani
टीवी पत्रकारिता का भुचुनौना युग और निर्मला सीतारमण का मौलिक अर्थशास्त्र
इस हफ्ते टिप्पणी में विस्तार से सुनिए धृतराष्ट्र-संजय संवाद. जहां दिलचस्प अंदाज में बात वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की और साथ में भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा की. संजय ने बताया कि निर्मलाजी मौलिक अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं. धृतराष्ट्र ने टोका मौलिक अर्थशास्त्र क्या बला है. संजय ने जो बताया वह आप भी सुनिए.
निर्मलाजी का मौलिक अर्थशास्त्र कहता है- “यह कहना कि रुपये की कीमत गिर रही है सही नहीं होगा, ऐसे कहिए डॉलर मजबूत हो रहा है. निर्दयाजी का यह मौलिक अर्थशास्त्र बिल्कुल उसी मौलिक ज्ञान का विस्तार है जिसके तहत हमें बताया गया है कि चाकू ने खरबूजे को काटा यह कहना सही नहीं है, यूं कहिए कि खरबूजा नामुराद खुद ही चाकू पर आ गिरा और कट गया. इसी तरह इन दिनों डंकापति न्याय का इकबाल बुलंद करने में लगे हुए हैं.
गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने हैं लिहाजा फिर से नेहरू-पटेल का जिन्न झाड़पोछ कर बोतल से आज़ाद किया जा रहा है. नेहरू को गरियाकर पटेल के गुजरात में चुनावी उल्लू सीधा करने की मंशा है. ज़रा सोचिए कि नेहरू-पटेल के बीच यह नूराकुश्ती कौन करवा रहा है. यह काम इस देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री करवा रहे हैं.
दूसरी ओर भारतीय टेलीविज़न पत्रकारिता के एक महामानव हैं तिहाड़ शिरोमणि. कहने को तो नंबर एक चैनल में पहुंच गए हैं, लेकिन इनका कंटेंट नंबर दो वाला ही चल रहा है. इन्होंने शिद्दत से टेलीविज़न पत्रकारिता को भुचनौना युग में होते हुए सांप्रदायिकता की दलदल में पहुंचाया और वहां से इसे सरकार के चरणों का दास बना दिया. भुचनौना माने भूत, चुड़ैल, नौटंकी और नाग-नागिन. टेलीविजन का यह दौर भुचुनौना युग के नाम से जाना जाता है.
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