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कौन हैं पत्रकार सुमी दत्ता, जिन्हें मिला पहला डिजिटल मीडिया पीआईबी मान्यता कार्ड
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 7 फरवरी 2022 को पहली बार डिजिटल मीडिया पत्रकारों को पीआईबी कार्ड देने के लिए गाइडलाइन्स बनाई थीं. इस आदेश के बाद सुमी दत्ता ऐसी पहली पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया पत्रकार नियमों के तहत पीआईबी द्वारा मान्यता मिली है. इससे पहले तक सिर्फ अखबार और टीवी मीडिया के पत्रकारों को ही पीआईबी मान्यता मिलती थी.
सुमी, ऑनलाइन डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म मनीकंट्रोल डॉट काम में बतौर असिस्टेंट एडिटर काम करती हैं. उन्हें करीब 13 साल से ज्यादा पत्रकारिता का अनुभव है. मनीकंट्रोल में आने से पहले वह न्यू इंडियन एक्सप्रेस और द टेलीग्राफ जैसे संस्थानों में काम करती थीं.
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए सुमी कहती हैं कि उन्होंने अप्रैल में पीआईबी कार्ड के लिए फॉर्म भरा था, लेकिन कुछ डॉक्यूमेंट बाकी रह गए थे, जो बाद में जमा किए. उन्होंने बताया, “अब जाकर सितंबर में कार्ड बना है.”
बता दें कि केंद्रीय मीडिया मान्यता कमेटी की इस साल की चौथी बैठक 22 सितंबर को नेशनल इनफार्मेशन सेंटर दिल्ली में हुई थी.
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पत्रकारों को मान्यता देने के लिए 24 सदस्य कमेटी का गठन किया है. इसके अध्यक्ष पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल होते हैं. इस समय पीआईबी के प्रिंसिपल डीजी सत्येंद्र प्रकाश हैं.
सुमी कहती हैं, “न्यू इंडियन एक्सप्रेस से पहले मैंने कुछ समय फ्रीलांस काम किया. उस दौरान ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के लिए लिखा. टेलीग्राफ में काम करने के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भी कवर किया है. अभी हेल्थ और फॉर्मा कवर करती हूं.”
पीआईबी कार्ड पर वह कहती हैं, “डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को मान्यता देने से डिजिटल की विश्वसनीयता बढ़ी है. साथ ही आप डिजिटल को मान्यता दे रहे हैं, ये अच्छी बात है. वैसे भी यह आनलाइन का समय है.”
मान्यता कमेटी के एक सदस्य न्यूज़लॉन्ड्री से कहते हैं, “चौथी मीटिंग के एजेंडे में डिजिटल पत्रकारों में सिर्फ सुमी का ही नाम था. वह सभी कसौटियों को पूरा कर रही थीं, इसलिए उन्हें मान्यता दी गई.”
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी सुमी के नाम की पुष्टि की. उन्होंने कहा अभी तक किसी अन्य डिजिटल पत्रकार को पीआईबी कार्ड नहीं मिला है. अभी तक आधिकारिक रूप से सुमी का नाम पीआईबी की वेबसाइट पर नहीं दिया गया है.
फरवरी में कमेटी के गठन के बाद से अभी तक कुल चार बैठकें हो चुकी हैं. पहली बैठक मार्च, दूसरी बैठक जून, तीसरी बैठक जुलाई और चौथी बैठक सितंबर में हुई. कमेटी के सदस्य बताते हैं, “हर बैठक में सभी कैटेगरी में मिलाकर करीब 50 पत्रकारों को मान्यता दी जाती है.”
बता दें कि डिजिटल मीडिया पत्रकारों के लिए गाइडलाइन वैसे तो फरवरी में ही जारी हो गई थी. लेकिन पहली बार डिजिटल पत्रकारों को मान्यता देने में कई पेचीदगी होने की वजह से यह अमल में अप्रैल से हो पाया.
कमेटी के सदस्य?
केंद्रीय मीडिया मान्यता कमेटी में कुल 24 सदस्य हैं. इसमें ज्यादातर सदस्य टीवी मीडिया से जुड़े हैं. वहीं अलग-अलग एसोसिएशन के सदस्य भी इसके सदस्य हैं. कमेटी का कार्यकाल दो साल का है.
पीआईबी के प्रिंसिपल डीजी के अलावा, सीनियर कैमरामैन और वर्किंग न्यूज़ कैमरामैन एसोसिएशन के महादेव राव, प्रेस एसोसिएशन के आनंद मिश्रा, ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एडिटर्स कॉन्फ्रेंस के पदम मेहता, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष रास बिहारी, ऑल इंडिया स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स फेडरेशन के सुधीर कुमार पांडा कमेटी के सदस्य हैं.
सरकार द्वारा चुने गए सदस्यों में हिंदुस्तान टाइम्स के एग्जीक्यूटिव एडिटर शिशिर गुप्ता, द हिंदू की नेशनल पॉलिटिकल एडिटर निस्तुला हेब्बर, पाञ्चजन्य के एडिटर हितेश शंकर, अमर उजाला के कंसल्टिंग संपादक विनोद अग्निहोत्री, ओपन मैगजीन के कंसल्टिंग एडिटर राजीव देशपांडे, सीएनएन न्यूज़ 18 के अभिताभ सिन्हा, टाइम्स नाउ की एडिटर नविका कुमार, एएनआई की एडिटर स्मिता प्रकाश, स्वतंत्र पत्रकार स्मिता मिश्रा, दैनिक जागरण के नेशनल ब्यूरो चीफ आशुतोष झा, द न्यूज इंडियन के सह संस्थापक रोहन दुआ, एबीपी न्यूज के विकास भदौरिया, वियोन न्यूज़ की पूर्व एडिटर पलकी शर्मा उपाध्याय, इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर शिव अरूर, ऑर्गनाइजर के एडिटर प्रफुल केतकर, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, इंडिया टीवी के देवेंद्र पाराशर और डीडी न्यूज़ के कंसल्टिंग एडिटर अशोक श्रीवास्तव शामिल हैं.
सरकार के नियमों के मुताबिक कमेटी कोई भी फैसला बहुमत के करेगी, साथ ही अगर किसी नाम पर आपत्ति है तो उसे रिकॉर्ड किया जाएगा. मान्यता कमेटी से अगर किसी नाम पर सहमित नहीं बन पाने की स्थिति में उन मामलों को एक पांच सदस्यीय उप समिति को भेजा जाता है. जो उन मामलों की सुनवाई करती है. इस उपसमिति के अध्यक्ष भी पीआईबी के प्रिंसिपल डीजी ही होते है.
समिति के एक सदस्य कहते हैं, “इस कमेटी में ज्यादातर पत्रकार टीवी से जुड़े हुए लोग है. कई बार सीनियर पत्रकार कैटेगरी में अखबारों में छपी कटिंग दिखाने वाले पत्रकारों के नामों पर आपत्ति करते है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को उन अखबारों का नाम ही नहीं पता है. ऐसे में बोलना पड़ता है कि यह अखबार है और चल रहा है.”
साथ ही वह कहते हैं, “कई सदस्य एक बार भी मीटिंग में नहीं आए हैं. सिर्फ नाम के लिए सदस्य बन जाते हैं.”
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