NL Charcha
एनएल चर्चा 230: गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा और पाकिस्तान में बाढ़
एनएल चर्चा के इस अंक में कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे और उनके समर्थन में कांग्रेस के अन्य नेताओं के पलायन, एनसीआरबी 2021 की रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का गुजरात दंगों और बाबरी मस्जिद से जुड़े सभी मामलों को बंद करने का आदेश, पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़, आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संविधान बेंच का गठन, नोएडा में गिराया गया सुपरटेक का ट्विन टावर और अर्थशास्त्री अभिजीत सेन का निधन जैसे विषयों का जिक्र हुआ.
चर्चा में इस हफ्ते वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई, पत्रकार हृदयेश जोशी और न्यूज़लॉन्ड्री के सह-संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. संचालन कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
अतुल ने चर्चा की शुरुआत कांग्रेस पार्टी की स्थिति से की. अतुल कहते हैं, “जो पांच पन्नों का पत्र गुलाम नबी आजाद ने लिखा है, मुझे लगता है वह मूर्खता का बंडल बन गया है. 50 साल के राजनीतिक इतिहास में उन्हें जो मिलना चाहिए था, वह सब मिला. चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया, केंद्रीय मंत्री बने, मुख्यमंत्री बने.”
उन्होंने हृदयेश से पूछा कि आप गुलाम नबी आजाद की जो कांग्रेस पार्टी में यात्रा रही और उनके इस्तीफे में लगाए गए आरोपों को कैसे देखते हैं?”
जवाब देते हुए हृदयेश कहते हैं, “पिछले 8 साल में नरेंद्र मोदी के आने के बाद 49 में 39 चुनाव कांग्रेस पार्टी हारी है. कांग्रेस पार्टी में नेता इतने मुखर होकर बोल रहे हैं तो इसके पीछे का कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व अथॉरिटी खो चुका है. सवाल है कि अगर इन नेताओं को लगता है कि राहुल गांधी सुनते नहीं हैं, तो जब चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी का यह व्यवहार है, तो जब पार्टी सत्ता में थी उस समय उनका कैसा व्यवहार रहा होगा? तब क्यों इन नेताओं को वह व्यवहार स्वीकार्य था, जो आज नहीं आ रहा है?”
रशीद कहते हैं, “जो राजनीतिक लॉयल्टी होती है उसमें बदलाव आता है. यह लॉयल्टी धर्म जैसी नहीं है जो हमेशा बनी रहती है. जब कांग्रेस चुनाव जीत रही थी तब सब कुछ सही था, लेकिन जब वह चुनाव हारने लगी तब सब सवाल उठाने लगे. नेहरू-गांधी परिवार के जो भी सदस्य राजनीति में रहे वह कभी असफल नहीं हुए. क्योंकि राहुल गांधी चुनाव जीत नहीं पा रहे हैं तो कांग्रेस पार्टी को समझ नहीं आ रहा है वह कैसे इस पर जवाब दे. जिन लोगों को कांग्रेस में मौका मिल रहा है वह कुछ समय बाद दूसरे राजनीतिक पार्टी में चले जाते हैं.”
वह आगे कहते हैं, “गुलाम नबी आजाद ने जो चिट्ठी में लिखा की राहुल गांधी मैच्योर नहीं है. जबकि खुद कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने ही उन्हें महासचिव और उपाध्यक्ष बनाने की बात राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा था. राहुल के नेतृत्व पर सवाल तब उठने शुरू हुए, जब 2014 से कांग्रेस पार्टी चुनाव हारने लगी. लेकिन तब उनका बचाव करने वाले गुलाम नबी आजाद अब इस्तीफा देकर लगातार चैनलों को इंटरव्यू दे रहे हैं.”
शार्दूल कहते हैं, “कांग्रेस के जो नेता जा रहे हैं या जो विद्रोह कर रहे हैं, उनकी कोई जमीनी पकड़ नहीं है. तो इनके जाने से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता. दूसरा, अगर इतनी दिक्कतें थीं तो पहले कुछ क्यों नहीं कहा, पार्टी क्यों नहीं छोड़ी? क्योंकि यही चापलूस का स्वभाव है. कांग्रेस के विषय में हम कई बार चर्चा कर चुके हैं. जब उनको क्रिटिसाइज करेंगे तो लोग आपको बीजेपी के पक्ष में बोलने का आरोप लगाते हैं, वैसे ही अगर आप आलोचना नहीं करें तो लोग कहेंगे कि आप कांग्रेस के चमचे हैं. पर अब गांधी परिवार को यह समझना होगा कि भले ही आज कांग्रेस को उनकी जरूरत है, लेकिन यह पार्टी उनकी नहीं है. यह देश की पार्टी है. इसलिए कांग्रेस को स्ट्रक्चरल बदलाव तो अपने अंदर में लाने ही होंगे.”
इस विषय के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा में विस्तार से बातचीत हुई. साथ में पाकिस्तान में आई बाढ़ पर भी बातचीत हुई. पूरी बातचीत सुनने के लिए हमारा यह पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
00:00:00 - 00:04:10 - इंट्रो और जरूरी सूचना
00:04:10 - 00:12:40 - हेडलाइंस
00:12:40 - 00:48:41 - गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा और कांग्रेस
00:48:41 - 01:03:58 - पाकिस्तान बाढ़
01:03:58 - 01:06:18 - चर्चा लेटर
01:06:18 - 01:10:53 - अभिजीत सेन का निधन
01:10:53 - सलाह और सुझाव
पत्रकारों की राय, क्या देखा, पढ़ा और सुना जाए
शार्दूल कात्यायन
टर्निंग ऑयल इनटू सॉल्ट किताब - अैन कोरिन व गल लुफ्त
आपका दिमाग जलवायु परिवर्तन को क्यों नहीं समझ पाता? - डीडब्ल्यू डॉक्यूमेंट्री
बाबा रामदेव और पतंजलि के साम्राज्य को लेकर एनएल सारांश
हृदयेश जोशी
लेट्स टॉक अबाउट: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय - न्यूज़लॉन्ड्री पॉडकास्ट
रशीद किदवई
गुजरात बीजेपी विधायक द्वारा ‘संस्कारी रेपिस्ट’ को लेकर दिए गए बयान पर मोजो स्टोरी का इंटरव्यू
अतुल चौरसिया
परमाणु बम की छाया में- किताबः हरजेन्द्र चौधरी और मिकि यूइचिरो
***
***
प्रोड्यूसर- रौनक भट्ट
एडिटिंग - उमराव सिंह
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह
Also Read: कांग्रेस की नई मीडिया टीम: टीम नई, तेवर नई
Also Read
-
Hey Cockroaches, while you were protesting, Godi-Jeevis were eating Melody 🪲 TV Newsance 343
-
Hafta 590: The Norway question that shook Modi’s tour and Press Freedom
-
CJP can endure the meme cycle. But can it articulate what kind of India it’s fighting for?
-
Your favourite viral column might have been written by AI. Now what?
-
A trail of grief, little accountability: The Marion Biotech story after 68 children deaths