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डीसीपी केपीएस मल्होत्रा: जुबैर से लेकर सुशांत सिंह राजपूत तक हाई प्रोफाइल मामलों की जांच करने वाले अधिकारी
27 जून को शाम के करीब 6:45 बजे ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर प्रतीक सिन्हा को बताया गया कि मोहम्मद जुबैर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली पुलिस ने जिस एफआईआर के आधार पर गिरफ्तारी की है वह उस समय तक न तो जुबैर ना ही उनके वकील को दी गई थी.
जुबैर की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने की, जिसके मुखिया है डीसीपी केपीएस मल्होत्रा. डीएएनआईपीएस 2009 बैच के अधिकारी मल्होत्रा को सितंबर 2021 में साइबर सेल का डीसीपी बनाया गया था. डीएएनआईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग दिल्ली, दमन एवं दीव, दादर एवं नगर हवेली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप में होती है.
बताते चले की डीएएनआईपीएस अधिकारी पूर्णकालिक आईपीएस नहीं होते. दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने हमें बताया कि डीएएनआईपीएस के तहत नियुक्ति अधिकारी आईपीएस कैडर के नहीं होते हैं. यह अधिकारी प्रमोशन पाकर अधिकतम ज्वाइंट सीपी के पद तक जा सकते है. ये अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करते हैं.
मोहम्मद जुबैर को दिल्ली पुलिस ने 27 जून, 2020 में दर्ज हुए पॉक्सो के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्हें एक पुराने ट्वीट को लेकर आईपीसी की धारा 153A और 295A के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया.
यह मामला ज़ुबैर के चार साल पुराने एक ट्वीट से जुड़ा है. इतने पुराने मामले में गिरफ्तारी पर केपीएस मल्होत्रा कहते हैं, “समय से फर्क नहीं पड़ता, सिर्फ रीट्वीट करने से कोई पुराना से पुराना ट्वीट नया हो जाता है. पुलिस की कार्रवाई उसी समय पर निर्भर है जब मामला हमारे संज्ञान में आया.”
दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर अरुण कुमार इस मामले में शिकायतकर्ता हैं. उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर में दी गई जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग के दौरान कुमार को ‘हनुमान भक्त’ नाम से ट्विटर हैंडल मिला, जिसने मोहम्मद जुबैर के ट्वीट पर सवाल उठाया था.
जिस हनुमान भक्त ट्विटर हैंडल की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है वह हैंडल बुधवार को बंद हो गया.
एक दिन की हिरासत के बाद मंगलवार को पटियाला हाऊस कोर्ट में जुबैर की पेशी हुई जहां कोर्ट ने उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.
एनसीबी से साइबर सेल तक का सफर
जून 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद मचे कोहराम में ड्रग्स एंगल की बात सामने आई थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में जुलाई में केस दर्ज कर जांच की. इसमें कथित तौर पर ड्रग्स के लेनदेन की बात सामने आई. इसे आधार बनाकर अगस्त, 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने एक केस दर्ज किया. तत्कालीन एनसीबी डीजी राकेश अस्थाना ने दिल्ली और मुंबई के अधिकारियों को मिलाकर एक टीम बनाई. इस टीम की कमान केपीएस मल्होत्रा को दी गई जो उस वक्त डिप्टी डायरेक्टर थे.
मल्होत्रा की टीम ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को सुशांत सिंह मामले में काफी दिनों की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था. एक महीने जेल में रहने के बाद रिया को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी.
सुशांत सिंह की मौत में कथित तौर पर ड्रग के इस्तेमाल की बातें सामने आने के बाद मल्होत्रा ने कई फिल्म कलाकारों से पूछताछ की थी. इस जांच की जद में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह आदि आए थे. हालांकि एनसीबी को इन अभिनेत्रियों के खिलाफ कुछ खास नहीं मिला.
एनसीबी की इन कार्रवाईयों ने देशभर का ध्यान फिल्म उद्योग की ओर खींचा था. साथ ही टेलीविज़न मीडिया ने भी इन कार्रवाईयों को लेकर बेसिर-पैर की कवरेज की थी. तब टीआरपी की अंधी दौड़ में रिपोर्टिंग का निम्न स्तर देखने को मिला था.
महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने मुंबई एनसीबी के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के खिलाफ एक पूर्व एनसीबी अधिकारी का पत्र शेयर किया था.
इस पत्र में पूर्व अधिकारी ने कहा था कि वानखेड़े और केपीएस मल्होत्रा ने अभिनेत्रियों के खिलाफ फर्जी केस दर्ज कर उनसे पैसों की उगाही की है. अधिकारी ने आरोप लगाया था कि दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह जैसी अभिनेत्री के खिलाफ केस दर्ज कर उनसे करोड़ों रुपए की उगाही की गई. हालांकि इस आरोप पर बाद में ज्यादा कुछ सामने नहीं आया.
एनसीबी के प्रमुख के तौर काम करने के बाद गुजरात कैडर के अधिकारी राकेश अस्थाना को अगस्त 2021 में दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बना दिया गया. अस्थाना की नियुक्ति के एक महीने बाद केपीएस मल्होत्रा को भी एडिशनल डीसीपी आर्थिक अपराध शाखा से हटाकर कमिश्नर सचिवालय में डीसीपी-1 के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया.
इसके एक महीने बाद यानी की सितंबर, 2021 में उन्हें साइबर सेल का डीसीपी नियुक्त कर दिया गया. इस तरह एक महीने में मल्होत्रा का एडिशनल डीसीपी के पद से डीसीपी के पद पर प्रमोशन हो गया.
साइबर सेल में नियुक्त मल्होत्रा की टीम ने कई सारे केस सॉल्व किए हैं. इस साल एक जनवरी को गिटहब पर ‘बुल्ली बाई’ एप के जरिए मुस्लिम महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी का मामला सामने आया था. पांच जनवरी को यह केस साइबर पुलिस के ‘इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स’ इकाई (आईएफएसओ) को ट्रांसफर कर दिया गया. और अगले ही दिन यानी की छह जनवरी को पुलिस ने बुल्ली बाई एप मामले के मुख्य आरोपी और मास्टमाइंड नीरज बिश्नोई को असम के जोरहाट से गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तारी के वक्त डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने कहा था, “गिटहब से बुल्ली बाई मामले में कोई जानकारी नहीं मिली. वहीं मुंबई पुलिस ने जो गिरफ्तारी की है वह ट्विटर पर गिटहब एप को लेकर ट्वीट करने वालों को ट्रैक करके किया है. जबकि हमने बुली बाई मामले में एप पर सोर्स कोड लिखने वाले को गिरफ्तार किया है.”
इस गिरफ्तारी के बाद आईएफएसओ ने इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था. उस वक्त मल्होत्रा की टीम की काफी तारीफ हुई थी. आईएफएसओ ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर दिए गए बयान के बाद बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज किया है. साथ ही कथित तौर पर नफरत, अफवाहें फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में नेताओं और पत्रकार सबा नकवी के खिलाफ भी केस दर्ज किया है.
आईएफएसओ ने हाल फिलहाल में मोहम्मद ज़ुबैर के अलावा भी कई हाईप्रोफाइल मामले दर्ज किए हैं. एक्टिविस्ट दिशा रवि, सुल्ली डील एप, आनलाइन प्लेटफॉर्म क्लब हाउस एप पर मुस्लिम महिलाओं को गाली देने वाले युवाओं के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच की.
उत्कृष्टता पदक और हाईप्रोफाइल केस
केपीएस मल्होत्रा ने अपने करियर में कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच की है. एक महत्वपूर्ण केस उनके जीवन में तब आया जब उन्होंने कतर की जेल में एक फर्जी केस में बंद भारतीय दंपत्ती को छुड़ाकार वापस भारत पहुंचाया. इसके लिए उन्हें साल 2021 में केंद्रीय गृह मंत्री पदक से सम्मानित किया गया था.
एनसीबी में नियुक्ति के दौरान कतर की जेल में कई साल से ड्रग्स के एक झूठे मामले में बंद भारतीय मुस्लिम दंपत्ति की बेगुनाही साबित करके उन्हें भारत ले आए थे. कतर में भारतीय उच्चायुक्त ने भी इसमें उनकी मदद की थी.
मल्होत्रा के नेतृत्व में तकनीक का उपयोग कर, साइकोट्रोपिक पदार्थों के पहले डार्कनेट विक्रेता, भारत का पहला एथेरियम खनन रिंग और भारत का पहला साइबर आंतक के मामले का भंडाफोड़ किया गया है.
क्राइब ब्रांच में काम करने के दौरान मल्होत्रा ने पेट्रोलियम मंत्रालय व प्राकृतिक गैस (एमओपीएनजी) के गोपनीय सरकारी दस्तावेज लीक मामले की जांच भी की थी. उनकी अगुवाई में ही दिल्ली क्राइम ब्रांच ने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत फर्जी एडमिशन कराने वाले गैंग का पर्दाफाश किया था.
रेप के आरोपी आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं को भी मल्होत्रा की टीम ने ही गिरफ्तार किया था. नारायण साईं को दिल्ली पुलिस करीब दो महीनों से ढूढ़ रही थी.
मल्होत्रा हाल ही में न्यूज 18 पर साइबर सुरक्षा को लेकर हुए एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. किसी पुलिस अधिकारी के नजरिए से यह अचरज वाली बात थी. वहां उन्होंने दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के कामकाज के बारे में जानकारियां दी थी.
वह दिल्ली पुलिस के कार्यक्रम आस्क मी एनीथिंग कार्यक्रम में वो लोगों को साइबर सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब देते हैं.
मल्होत्रा अंडमान निकोबार में भी एनसीबी में काम कर चुके है. साल 2016 का गृह मंत्रालय का एक पत्र है जिसमें मंत्रालय नोटिस जारी कर उन्हें तत्काल प्रभाव से अंडमान निकोबार में ज्वाइन करने के लिए कहा गया था. साथ ही कार्रवाई करने की भी बात कहीं गई है.
नोटिस में कहा गया था कि, “मल्होत्रा को पहले 28.10.2014 को दिल्ली से अंडमान निकोबार ट्रांसफर किया गया, जिसके बाद 23.02.2016 को फिर से ज्वाइन करने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया. जिसके बाद 4 अप्रैल 2016 को फिर से ट्रांसफर आर्डर आया और तुंरत ज्वाइन करने के साथ-साथ अंडमान निकोबार से फाइल भेजने के लिए कहा गया.”
केपीएस मल्होत्रा के बारे में एक पूर्व पुलिस अधिकारी कहते हैं, “वह बहुत तेज तर्रार अधिकारी हैं और अपना काम करना जानते है.”
दिल्ली में क्राइम बीट कवर करने वाले नेशनल चैनल के एक सीनियर रिपोर्टर कहते हैं, “मल्होत्रा अच्छे अधिकारी है. बाइट के लिए या कुछ जानने के लिए फोन करने पर जवाब देते है. आसानी से उपलब्ध होते हैं. राकेश अस्थाना के साथ उनकी नजदीकी है. इसी कारण एनसीबी से वह वापस दिल्ली पुलिस में आ गए और उन्हें साइबर सेल का डीसीपी बना दिया गया.”
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