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जयललिता के 'भतीजे' से तिहाड़ जेल के बादशाह तक: सुकेश चंद्रशेखर के कई रूप
5 दिसंबर 2021 को अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज दुबई के लिए उड़ान भरने को तैयार थीं. तभी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि प्रवर्तन निदेशालय ने उनके नाम एक लुक-आउट सर्कुलर जारी किया है.
ईडी के अधिकारियों ने पहले फर्नांडीज से मुंबई हवाई अड्डे पर पूछताछ की और बाद में वह दिल्ली के ईडी कार्यालय में भी पेश हुईं. ईडी ने उनसे शेखर रत्न वेला नाम के व्यक्ति के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछताछ की, जो फर्नांडीज से यह कहकर मिले थे की वह तमिल चैनल सन टीवी के मालिक हैं और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के भतीजे हैं.
वेला ने फर्नांडीज को नौ लाख रुपए की पर्शियन बिल्ली, 52 लाख रुपए का घोड़ा, हीरे के आभूषण और डिजाइनर कपड़े (अन्य कई चीज़ों के अलावा) उपहार में दिए थे. वह उनके लिए निजी जेट की व्यवस्था भी करता था. उसने कथित तौर पर फर्नांडीज को बताया कि वह ऑस्कर विजेता अभिनेता लियोनार्डो डिकैप्रियो का दोस्त है और एक हॉलीवुड प्रोडक्शन में फर्नांडीज को डिकैप्रियो के साथ भूमिका दिलाने की कोशिश भी कर रहा है.
लेकिन समस्या यह थी कि फर्नांडीज से बड़ी-बड़ी बातें करने वाला व्यक्ति जयललिता का भतीजा नहीं था. वह सन टीवी का मालिक नहीं था और न ही वह डिकैप्रियो को जानता था. और उसका नाम वेला नहीं, बल्कि सुकेश चंद्रशेखर था.
चंद्रशेखर की उम्र 32 साल है और उसके खिलाफ 32 आपराधिक मामले हैं. दिसंबर 2021 के अंत में चंद्रशेखर ने अपने वकील के जरिए मीडिया को एक पत्र जारी किया.
"मुझे किसी को कोई सफाई नहीं देनी है, लेकिन साथ ही यह भी आवश्यक है कि मेरी बात सार्वजनिक हो," चंद्रशेखर ने 20 दिसंबर, 2021 को लिखे पत्र में कहा. उसने कहा कि फर्नांडीज के साथ उसका रोमांटिक संबंध था (जबकि फर्नांडीज ने ईडी को बताया कि चंद्रशेखर ने उन्हें धोखा दिया था). चंद्रशेखर ने कहा कि उसने फर्नांडीज को जो उपहार दिए थे वह 'सामान्य चीजें थीं जो प्रेमी एक दूसरे को देते हैं'.
यही नहीं, दंत चिकित्सक से अभिनेत्री और फिर उद्यमी बनीं चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉल को सितंबर 2021 में उनके पति के कारनामों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
चंद्रशेखर ने अपने खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी और हवाला के आरोपों से भी इनकार किया. उन्होंने लिखा, 'मैंने कॉरपोरेट लॉबिंग से 100 करोड़ कमाए हैं. मुझे किसी को धोखा देने या ठगने की कोई जरूरत नहीं है."
फिर भी, दिसंबर 2021 में ईडी द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार, चंद्रशेखर ने खुद को शीर्ष सरकारी अधिकारी बताकर जून 2020 से अगस्त 2021 के बीच, रैनबैक्सी के पूर्व प्रोमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ रुपए से अधिक ऐंठ लिए थे- जबकि तब वह तिहाड़ जेल में था.
'विनम्र व्यवहार'
15 जून 2020 की सुबह अदिति सिंह को एक फोन आया. एक महिला ने उनसे बात करना चाहा और जब उन्होंने पुष्टि की कि वह अदिति सिंह बोल रही हैं, तो एक आदमी लाइन पर आया. उसने खुद को अनूप कुमार बताया और अदिति से कहा कि वह विधि सचिव है. उसने कहा कि उसके पास अदिति के पति, रैनबैक्सी के पूर्व प्रोमोटर शिविंदर सिंह की मदद करने के लिए सर्वोच्च अधिकारियों के आदेश हैं, जो (उनके भाई मलविंदर सिंह के साथ) अक्टूबर 2019 से जेल में हैं.
उसने कहा कि सरकार अदिति के पति को जेल से बाहर निकालने में मदद करना चाहती है क्योंकि उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में काम किया है और सरकार महामारी के दौरान उनके साथ काम करने की इच्छुक है. कुमार ने अदिति से यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनकी बातचीत सुन रहे हैं, इसलिए उन्हें 'विनम्रता से व्यवहार करना' चाहिए.
कुमार ने उसी दिन अदिति को दोबारा फोन किया. इस बार उसने अभिनव नाम के एक व्यक्ति से अदिति का परिचय कराया और कहा कि वह उसका संयुक्त सचिव है. कॉलर-आइडेंटिफिकेशन एप ट्रू कॉलर पर कुमार का नंबर प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार पीके मिश्रा के नाम से आ रहा था.
अदिति ने अपने पति की ओर से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में महामारी के दौरान मदद की गुहार लगाई थी, इसलिए 'विधि सचिव' के कॉल पर उन्हें संदेह नहीं हुआ.
फिर शुरू हुई पैसों की मांग.
पहले अभिनव ने अदिति को भारतीय जनता पार्टी के कोष में 20 करोड़ रुपए का योगदान करने के लिए कहा. धीरे-धीरे रकम बड़ी होती गई. जून 2020 से अगस्त 2021 के बीच, अदिति ने अभिनव को 200 करोड़ रुपए से अधिक देने के लिए परिवार की बचत को समाप्त कर दिया. कभी-कभी पैसे दुबई या हॉगकॉग के जरिए ट्रांसफर करने पड़ते थे.
जैसे-जैसे समय बीतता गया, अदिति को लगने लगा कि अभिनव उन्हें परेशान कर रहा है और अपने चंगुल में फसाने की कोशिश कर रहा है.
“अगर मैं उसकी कॉल को अनदेखा करती तो वह मेरे परिवार को फोन करना शुरू कर देता था और मेरे जवाब देने तक फोन करता रहता था. मैं बेहद परेशानी में थी और भावनात्मक रूप से इतनी अस्थिर और नाजुक हो चुकी थी कि दो मौकों पर मुझे जान देना उसका सामना करने से कहीं बेहतर लगा. अगर मैं फोन पर रोती और यह सब खत्म करने के लिए भीख मांगती, तो वह बेरहमी से कहता कि वह मुझे न तो जीने देगा और न ही मरने देगा और यह कि वह भगवान है और मुझे उसके समर्थन के लिए उसका आभारी रहना चाहिए, अन्यथा मेरे पति, परिवार और मेरे खिलाफ और भी कई मामले दर्ज कर दिए जाएंगे,” अदिति ने बताया.
इस बीच अदिति के पति के खिलाफ मामले में कोई सकारात्मक प्रगति नहीं हुई और उन्हें यह स्पष्ट हो गया कि वह जबरन वसूली के रैकेट में फंस गई है.
6 अगस्त, 2021 को अदिति ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. दो दिन बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सुकेश चंद्रशेखर उर्फ बालाजी को गिरफ्तार कर लिया. चंद्रशेखर अपनी पहचान विधि सचिव अनूप कुमार के रूप में कराया करता था.
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह थी कि चंद्रशेखर ने हश्ड नामक एप पर अन्य फोन नंबर बनाकर और टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके इस ठगी को अंजाम दिया था. और यह सब उसने उसी स्थान पर रह कर किया था जहां अदिति के पति भी थे- तिहाड़ जेल.
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के मुताबिक चंद्रशेखर को जेल में पूरी बैरक दी गई थी. क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरा फुटेज से पता चलता है कि उसने जेल अधीक्षक के कक्ष का उपयोग नियमित से अधिक समय तक किया. कुछ जेल अधिकारियों को बाद में चंद्रशेखर के सहयोगियों के रूप में पहचाना गया.
चंद्रशेखर की जांच के दौरान अधिकारियों ने खुलासा किया कि यह स्व-घोषित लाबीस्ट भारत के सबसे अमीर ठगों में से एक था.
‘उसके व्यक्तित्व से अप्रभावित रहना कठिन है’
जब चंद्रशेखर को जानने वाले लोग उसके बारे में बात करते हैं, तो ऐसा लगता है कि वह कहानियों के किसी पात्र के बारे में बात कर रहे हैं. एक स्कूल ड्रॉपआउट किशोर जिसे बाइक और कार रेसिंग का शौक था (अफवाह है कि रेसिंग के दौरान एक दुर्घटना में उसकी एक उंगली कट गई थी). उसने कई शहर बदले और बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोयंबटूर, मुंबई में ठाट से रहा, इनमें से अधिकतर शहरों में उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
चंद्रशेखर के परिचित उसकी बुद्धिमत्ता, महत्वाकांक्षा और महंगे आभूषण जैसे समृद्धि के प्रतीकों के प्रति उसका आकर्षण याद करते हैं. ईडी की जांच के दौरान पता चला कि चेन्नई में चंद्रशेखर के पास समुद्र तट पर कीमती बंगला था और रोल्स रॉयस घोस्ट, लेम्बोर्गिनी उरुस और बेंटले बेंटायगा सरीखी 16 लग्जरी कारें थीं.
"उसका व्यक्तित्व आकर्षक और जीवंत है. वह आठ अलग-अलग भाषाएं बोल सकता है. वह परिपक्व, चतुर और जानकार है. उसके व्यक्तित्व से अप्रभावित रह पाना कठिन है,” एक व्यक्ति ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए न्यूज़लॉन्ड्री को बताया.
चंद्रशेखर का जन्म एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था जो मूल रूप से मदुरै के पझंगनाथम गांव के रहने वाला था. छोटी उम्र से ही चंद्रशेखर गरीबी से बाहर निकलने का सपना देखा करता था. उसका परिवार बेंगलुरु में एक छोटा सा व्यवसाय चलाता था और परिचितों को याद है कि कैसे किशोरावस्था में चंद्रशेखर उन स्कूली साथियों से ईर्ष्या करते थे जिनके पास अपनी बाइक थी, जबकि उसके पिता ने उसे एक पुराने स्कूटर पर स्कूल छोड़ा करते थे.
17 साल का होते-होते चंद्रशेखर पहली बार गिरफ्तार हो चुका था और उसने स्कूल छोड़ दिया था. एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने उन्हें बेंगलुरू विकास प्राधिकरण अधिगृहीत भूमि दिलाने और निर्माण के लिए विदेशी निवेश हासिल करने में मदद करने का वादा करके 1.15 करोड़ रुपए का चूना लगाया था.
20 साल की उम्र तक चंद्रशेखर वह तंत्र स्थापित कर चुका था जिसे ईडी ने अपनी चार्जशीट में 'क्राइम सिंडिकेट' कहा है. सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद, अपनी त्वरित सोच और सहयोगियों की मदद से चंद्रशेखर बार-बार यह जताने में सफल रहा कि उसके संबंध संभ्रांत लोगों से हैं.
2009 में चंद्रशेखर ने कर्नाटक के तत्कालीन राजस्व मंत्री करुणाकर रेड्डी के बेटे होने का ढोंग किया और एक शिकायतकर्ता से 3,72,500 रुपए ऐंठ लिए. बाद के वर्षों में चंद्रशेखर ने विभिन्न व्यक्तित्वों और चरित्रों को अपनाया, कभी खुद को तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का पोता बताया और कभी बीएस येदियुरप्पा का सचिव. जब वह जैकलीन फर्नांडीज के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा था तब चंद्रशेखर ने उनके मेकअप आर्टिस्ट शान मुथाथिल को फोन किया और कहा कि वह अमित शाह के कार्यालय से बात कर रहा है.
फर्नांडीज एकमात्र अभिनेत्री नहीं हैं जिन्हें चंद्रशेखर ने निशाना बनाया. 2009 में चंद्रशेखर ने दंत चिकित्सक से अभिनेत्री बनी लीना मारिया पॉल से संपर्क किया. 2013 में आई फिल्म मद्रास कैफे में एक तमिल विद्रोही की भूमिका उनका सबसे प्रसिद्ध किरदार है. दोनों में प्रेम संबंध बने और वह साथ मिलकर इन कारनामों को अंजाम देने लगे. उन्होंने 2015 में शादी की. पॉल की उम्र अब 36 साल है.
अधिकारियों का कहना है कि पॉल ने चंद्रशेखर को उन कुछ लोगों से मिलवाया जिन्हें बाद में निशाना बनाया गया, जैसे जोसेफ अलेक्जेंडर जिन्हें छह लाख रुपए का चूना लगाया गया; और एक्ट्रेस-डांसर नोरा फतेही.
2010 में चंद्रशेखर ने 3,50,000 रुपए का घोटाला किया और एक अन्य मामले में उसने कथित तौर पर एक सिनेमा मैनेजर का गला घोंट दिया. चंद्रशेखर को उस सिनेमा हाल में एक नया साउंड सिस्टम लगाने का काम मिला था. वह एडवांस लेकर फरार हो गया, लेकिन कुछ समय बाद मैनेजर ने उसे देखकर पहचान लिया. दोनों में हाथापाई हुई और चंद्रशेखर ने मैनेजर पर हमला कर दिया. जब वह पकड़ा गया तो पुलिस ने उसके पास से 21 घड़ियां, दो कार, एक लैपटाप और एक बड़ी रकम बरामद की.
चंद्रशेखर की महत्वाकांक्षा और उसकी आपराधिक गतिविधियों का दायरा दोनों लगातार बढ़ता गया. 2013 में उसने कर्नाटक सरकार के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी होने का ढोंग करके वेंडिंग मशीनों के लिए सरकारी निविदा दिलाने के बहाने केनरा बैंक को 19 करोड़ रुपए का चूना लगाया. इस मामले में चंद्रशेखर और पॉल दोनों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्हें जमानत मिल गई और बाद में वह मुंबई चले गए.
200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली के प्रयास से पहले, चंद्रशेखर तब चर्चा में आया जब 2017 में उसे केंद्रीय चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. वह कथित तौर पर टीटीवी दिनाकरन के इशारे पर काम कर रहा था जो अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का 'दो पत्तियों' वाला चुनाव चिन्ह अपनी मौसी और जयललिता की सहयोगी वीके शशिकला के नेतृत्व वाले गुट को दिलाना चाहते थे.
तिहाड़ जेल के बादशाह
गल्फ न्यूज के एक कॉलम में पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा है कि चंद्रशेखर के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए एक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म उससे संपर्क कर रहा था. चतुर्वेदी ने कहा, 'चंद्रशेखर जिद कर रहा था कि उसके पसंदीदा अभिनेता रणवीर सिंह उसकी भूमिका निभाएं.'
सूत्रों ने बताया की जेल में चंद्रशेखर का जीवन निश्चित रूप से एक ग्लैमरस एंटी-हीरो की तरह था. ईडी की चार्जशीट के अनुसार चंद्रशेखर उसी जेल परिसर में था जिसमें यूनिटेक के प्रोमोटर संजय और अजय चंद्रा और शिविंदर सिंह जैसे हाई-प्रोफाइल आरोपी थे. (इस तरह चंद्रशेखर को पता लगा कि शिविंदर जमानत पाने के लिए बेचैन हैं). रंगदारी मामले में गिरफ्तार जेल अधिकारी धरम सिंह मीणा ने बताया कि चंद्रशेखर ने जेल कर्मियों को कितने पैसे दिए. उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर सहायक अधीक्षक से ऊपर के अधिकारियों को हर 15 दिन में 50 लाख रुपए और एएस के पद से नीचे 10 लाख रुपए दिया करता था.
मीणा ने कहा कि उन्होंने चंद्रशेखर की ओर से 35 बार अदिति से पैसे लिए और इसके लिए उन्हें 65-75 लाख रुपए मिले.
अधिकांश कैदी जिस अभाव का सामना करते हैं उसके विपरीत कथित तौर पर चंद्रशेखर के पास जेल में कई सुविधाएं थीं. टेलीविजन, एयर कंडीशनिंग और एक छोटी कार के साथ-साथ उसके कमरे में ऐसे परदे लगे थे जिससे सीसीटीवी कैमरों में उसकी गतिविधियां पकड़ी नहीं जाती थीं. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार चंद्रशेखर के सेल में कभी-कभार मेहमान भी आते थे और जब उसे नवंबर 2020 में अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए पैरोल मिली थी उसे 'रहस्यमय परिस्थितियों में' छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था.
चंद्रशेखर के कपड़े और बर्तन दूसरे कैदी धोते थे और रोजमर्रा के कामों में उसकी मदद करते थे. एक सूत्र ने कहा, "कैदियों के लिए वह एक मसीहा की तरह था. सभी जेल अधिकारी उससे लाभान्वित होते थे क्योंकि वह उन्हें बहुत पैसे देता था. उसने एक बार अपने साथी कैदियों के लिए बिरयानी पार्टी भी रखी थी.”
हालांकि जो लोग चंद्रशेखर को जानते हैं वह बताते हैं कि उस पर लगे आरोप उसकी अलग ही छवि बनाते हैं. एक सूत्र ने बताया कि अफवाहों की मानें तो अतीत में चंद्रशेखर ने एक पोंजी स्कीम के तहत उनके घर की नौकरानी से 7-8 लाख रुपए लूट लिए थे. उन्होंने कहा, "वह कोई रॉबिनहुड नहीं है. वह किसी को भी लूट सकता है, चाहे वह उसकी अपनी नौकरानी हो या अदिति सिंह जैसी संपन्न व्यक्ति."
अपराध में भागीदार
ईडी ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि चंद्रशेखर पिछले 10 साल से अपना क्राइम सिंडिकेट चला रहा है. "वह एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चलाता था और अवैध आर्थिक लाभ और अन्य लाभों के लिए अपराध करता था. उसे सात आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया है. एसीपी वीरेंद्र सिंह की जांच के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में सिंडिकेट के खिलाफ दो से अधिक आपराधिक मामले सामने आए हैं जिनमें चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है और अदालत द्वारा संज्ञान लिया गया है जिनमें निर्धारित सजा तीन साल से अधिक है," चार्जशीट में कहा गया है, जिसके अनुसार चंद्रशेखर और पॉल सिंडिकेट के मास्टरमाइंड थे.
पॉल को तीन बार गिरफ्तार किया गया है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वह अपनी फर्म नेल आर्टिस्ट्री के जरिए अपने पति की अवैध कमाई को डायवर्ट करने में सक्रिय रूप से शामिल थी. नेल आर्टिस्ट्री के कार्यालय कोच्चि, चेन्नई और बेंगलुरु में हैं.
ईडी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में नेल आर्टिस्ट्री की कमाई (चेन्नई में 4.79 करोड़ रुपए और कोच्चि में 1.21 करोड़ रुपए) को आपराधिक आय माना जाता है.
200 करोड़ रुपए की उगाही के मामले में दायर की गई चार्जशीट में कुछ और प्रमुख पात्रों की पहचान की गई है. प्रदीप रमनानी और दीपक रमनानी ने चंद्रशेखर की ओर से अदिति से पैसे वसूल किए. दीपक या प्रदीप द्वारा अदिति से वसूली गई हर किस्त के लिए दीपक को 2.5 करोड़ रुपए मिलते थे. अनुमान है कि रमनानी बंधुओं को 120-130 करोड़ रुपए प्राप्त हुए.
इनके अलावा चंद्रशेखर के रैकेट में कमलेश कोठारी, जोएल जोस मैथ्यूज, अरुण मुथु और बी मोहन राज के नाम शामिल हैं. कोठारी एक रियल एस्टेट एजेंट है जिसने चंद्रशेखर और पॉल को चेन्नई में बंगला खरीदने में मदद की. मैथ्यूज को पॉल का मैनेजर बताया गया है और मुथु ने इस जोड़े को लग्जरी कार खरीदने में मदद की.
पेशे से वकील मोहनराज 2014 से चंद्रशेखर को जानता है और कई मामलों में उसकी पैरवी कर चुका है. उसे चंद्रशेखर और पॉल को लग्जरी कार और संपत्ति खरीदने में मदद करने के लिए कमीशन भी मिला.
चंद्रशेखर के सिंडिकेट के सभी सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
चंद्रशेखर के आपराधिक व्यवहार की जांच की जा रही है और वह खुद को 'कॉर्पोरेट लॉबिस्ट' बताता है, लेकिन जो लोग उसे जानते हैं वह उसके लोभी होने पर जोर देते हैं. "उसके लिए केवल एक चीज मायने रखती है और वह है पैसा," एक सूत्र ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया.
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