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जानिए क्यों दुनिया की सबसे बड़ी चिप्स कंपनी नहीं कर पाएगी किसानों का शोषण
पेप्सिको इंडिया के जरिए आलू किस्म की पैदावार को लेकर किसानों के खिलाफ एफआईआर व धमकी देने के मामले में किसानों की बड़ी जीत हुई है. पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए) ने पेप्सिको इंडिया को आलू की एफएल-2027 किस्म के लिए पौधा किस्म संरक्षण (पीवीपी) प्रमाणपत्र को रद्द करने का फैसला सुनाया है. प्राधिकरण ने अपने फैसले में कहा, "रजिस्टर ब्रीडर को आलू की किस्म एफएल 2027 के लिए 01 फरवरी, 2016 को जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है."
पेप्सिको इंडिया को दिए गए प्रमाण-पत्र को रद्द करने और किसानों के मानवाधिकार के लिए कार्यकर्ता कविता कुरुगंती ने पीपीवीएफआरए में याचिका दाखिल की थी. पेप्सिको इंडिया को दिए गए प्रमाण पत्र को रद्द करने की मांग उठाने वाली इस याचिका को प्राधिकरण ने कई ग्राउंड्स के आधार पर स्वीकार किया. वहीं, करीब 30 महीने की सुनवाई के बाद 03 दिसंबर, 2021 को प्राधिकरण के चेयरपर्सन केवी प्रभु की ओर से यह फैसला दिया गया.
पेप्सिको इंडिया की आलू वेराइटी एफएल-2027 को रद्द करने की याचिका प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वेराइटीज एंड फॉर्मर्स राइट्स, 2001 (पीपीवीएंडएफ एक्ट 2001) की विशिष्ट धारा 34 (जी) का इस्तेमाल करते हुए 11 जून, 2019 को दाखिल की गई गई थी. याचिका में यह तर्क दिया गया था कि पेप्सिको इंडिया के तहत पेप्सिको इंडिया की आलू किस्म को दिया गया बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) प्रावधानों के तहत ठीक नहीं नहीं है. साथ ही यह जनहित के भी विरुद्ध है.
याचिका में कहा गया था कि प्रमाण पत्र कंपनी की तरफ से दी गई गलत सूचनाओं पर आधारित है. कंपनी की तरफ से पीपीवीएंडएफआर एक्ट, 2001 की धारा 34 (ए) के तहत आलू की किस्म के लिए मुहैया कराई गई सूचना गलत बताई गई थी. इसके अलावा ब्रीडर ने पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार को सूचनाएं, दस्तावेज या अन्य जरूरी सामग्री (पीपीवीएंडएफआर एक्ट, 2001 की धारा 34 (सी) के तहत नहीं दी गई. साथ ही जो प्रमाणपत्र जारी किया गया वह सेक्शन 34 (एच) के आधार पर जनहित में नहीं है.
पेप्सिको इंडिया के पास अपने आलू किस्म के लिए पीपीवीएफआरए से हासिल प्रमाण पत्र के तहत वास्तविक पंजीकरण का समय 31 जनवरी, 2022 तक था. वहीं, इसका रीन्यूअल 31 जनवरी, 2031 में होना था. हालांकि अब प्राधिकरण के फैसले के बाद प्रमाण-पत्र रद्द हो चुका है.
कविता कुरुगंती ने कहा कि यह फैसला सभी बीज और खाद्य व्यवसाय करने वाली रजिस्टर्ड कंपनियों के लिए है. यह फैसला एक मिसाल है कि देश के किसानों को हासिल कानूनी अधिकार और उनकी स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता है.
कानूनविद और शोधार्थी शालिनी भूटानी ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है. यह फीपीवी एंड एफआर एक्ट में निहित धारा 39 के तहत किसानों के बीज स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है. इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि बौद्धिक संपदा अधिकार रखने वाली देश की कंपनियां किसानों के अधिकारों को हल्के में नहीं ले सकती हैं. उन्होंने बताया कि आईपी के तमाम कानूनों के जरिए किसानों को भविष्य में परेशान किए जाने से यह फैसला रोकेगा.
पेप्सिको इंडिया ने एफएल-2027 आलू किस्म के लिए 2018 और 2019 में किसानों के खिलाफ कार्रवाई का कदम उठाया था. कंपनी का कहना था कि उनकी किस्म को किसान बिना अनुमित उगा और बेच नहीं सकते.
प्राधिकरण के चेयरपर्सन केवी प्रभु ने 3 दिसंबर, 2021 को अपने फैसले में कहा है कि रजिस्ट्री और प्राधिकरण के लिए पेप्सिको का यह मामला कई सबक सीखने की तरह है. रजिस्ट्रार को आदेश दिया जाता है कि वह कानून, नियम और विनयमों के आधार पर आवेदनों के मूल्यांकन को लेकर एक मानकीय शीट तैयार करें. साथ ही एक समिति का गठन करें जो यह बताए कि भविष्य में ऐसे मामलों का दोहराव न होने पाए.
(साभार- डाउन टू अर्थ)
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