Khabar Baazi
असम: न्यूज़ वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख को लेकर पत्रकार पर देशद्रोह का मामला दर्ज
शनिवार को असम में सिचलर के एक पत्रकार पर पुलिस ने कई धाराओं में मामला दर्ज किया है. पुलिस का कहना है कि असम के सिचलर जिले में बराक बुलेटिन चलाने वाले पत्रकार अनिर्बान रॉय चौधरी पर एक स्थानीय वेबसाइट में नेता प्रदीप दत्ता रॉय पर कथित रूप से एक लेख लिखने के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए) (देशद्रोह) सहित कई आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया. यह कार्रवाई एक व्यवसायी शांतनु सूत्रधर की शिकायत पर की गई है.
कछार के एसपी रमन ढिल्लों ने कहा, "हमें शिकायत मिली थी जिसके बाद हमने मामला दर्ज कर लिया है. आगे की जांच जारी है. चौधरी पर आईपीसी की 153 (ए), और 501/505 (2) धाराएं लगाई गई हैं."
31 वर्षीय पत्रकार ने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि वह पुलिस के साथ जांच में पूरा सहयोग करेंगे. हालांकि बराक बुलेटिन पीछे नहीं हटेगा. बराक बुलेटिन के संस्थापक के रूप में मैं विश्वास दिलाता हूं कि बराक बुलेटिन डरा हुआ नहीं है.
एक दिसंबर को दायर शांतनु सूत्रधर ने शिकायत में आरोप लगाया था कि चौधरी के लेख "असम के बंगाली और असमिया के बीच भाईचारे को बिगाड़ सकते हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि बराक बुलेटिन ने राजनेता प्रदीप दत्ता रॉय के "समर्थन" में लेख प्रकाशित किए, जिन्हें पिछले महीने देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
बता दें कि रॉय डेमोक्रेटिक फ्रंट के संयोजक हैं. उन्हें पुलिस ने 27 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया था. असमिया में लिखे गए एक सरकारी होर्डिंग के संबंध में रॉय ने कथित तौर पर कहा था कि अगर कोविड-19 टीकाकरण अभियान को लेकर लगे होर्डिंग को 48 घंटों के भीतर नहीं हटाया गया, तो उनकी पार्टी सड़कों पर उतरेगी. रॉय को पुलिस ने पुछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था. उनपर धारा 153 ए, 295, 295 ए, 124 ए (देशद्रोह) के तहत आरोप लगाया गया.
शिकायतकर्ता सूत्रधर ऑल असम बंगाली हिंदू एसोसिएशन के सदस्य हैं. वे कहते हैं कि उन्होंने यह शिकायत दर्ज कराई है इससे उनके संगठन का कोई लेना देना नहीं है.
Also Read
-
Mission Vatican in Kashi: The battle between ideology and faith
-
TV Newsance 342 | Arnab wants manners, Sudhir wants you to stop eating
-
‘We’ve lost all faith’: Another NEET fiasco leaves aspiring doctors devastated
-
Norway’s PM took questions. Modi left Indian envoy to face Norwegian media
-
Election soundbites tell us less than we think. That’s the paradox of the modern state