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यूपी पुलिस को लगता है कि सिद्दीकी कप्पन की पीएफआई के साथ साजिश साबित करने के लिए कुछ लिंक और व्हाट्सएप चैट पर्याप्त हैं
न्यूज़लॉन्ड्री के द्वारा पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर चल रहे मामले पर आधारित सीरीज का यह दूसरा भाग है, पहला भाग आप यहां पढ़ सकते हैं.
कप्पन व उनके साथ तीन अन्य लोगों को 5 अक्टूबर 2020 को हाथरस जाते हुए मथुरा में टोल प्लाजा पर यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. 7 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार कप्पन के खिलाफ, धारा 124ए (राजद्रोह), 153ए (वैमनस्य फैलाना) और धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) के साथ-साथ यूएपीए और आईटी एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है.
बचाव पक्ष के वकील मधुवन दत्त चतुर्वेदी के द्वारा आरोप पत्र के अवलोकन के आधार पर न्यूज़लॉन्ड्री को पता चला है कि, उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया संस्था के सदस्यों के साथ व्हाट्सएप चैट को सबूत के रूप में प्रस्तुत किया है.
सबूत या इज़ाद?
कोई व्हाट्सएप मैसेज एक इलेक्ट्रॉनिक सबूत के रूप में तभी स्वीकार्य होता है जब वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के अंतर्गत शर्तों पर खरा उतरता है. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन में सीसीजी फेलो कृष्णेश बापट कहते हैं, "व्हाट्सएप मैसेज मान्य हैं इसका मतलब यह नहीं कि अदालत उन्हें साक्ष्य के रूप में बहुत मूल्यवान मानेगी. अदालत उन्हें कितना विश्वसनीय मानती है यह कई चीजों पर निर्भर है, जैसे कि उन्हें किस संदर्भ में भेजा गया और वह किन परिस्थितियों में पुलिस के हाथ लगे."
कप्पन के वकील विल्स मैथ्यूज ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, "एक पत्रकार के तौर पर कप्पन समाज के सभी वर्गों के लोगों से जुड़े हो सकते हैं. जब तक अनियमित आए या किसी और सबूत की बरामदगी नहीं होती, मेरे मुवक्किल पर यूएपीए के अंतर्गत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता."
इस साल अप्रैल में यूपी एसटीएफ के द्वारा दाखिल किए गए लगभग 5,000 पन्नों के आरोप पत्र में कई बार पीएफआई का उल्लेख है. यूपी एसटीएफ ने यह आरोप लगाया है कि कप्पन इस संगठन से जुड़े हैं. 2019 से, उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा अनेक अवसरों पर पीएफआई के ऊपर हिंसा की साजिश और भड़काने को लेकर कई बार आरोप लगाए गए हैं. पिछले साल उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की थी लेकिन केंद्र ने उसे टाल दिया. कप्पन मामले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ के आरोप पत्र में यूपी की एंटी टेरर स्क्वाड या एटीएस के एक अधिकारी ने कहा है कि, पीएफआई "एक उग्रवादी संगठन है जो भारत में इस्लामिक राज्य स्थापित करना चाहता है."
इसी साल, जनवरी में उच्चतम न्यायालय को दिए गए एक ज्ञापन में कप्पन ने पीएफआई से किसी भी संबंध को नकार दिया था.
कप्पन और पीएफआई के सदस्यों के बीच की व्हाट्सएप चैट
आरोपपत्र में अगस्त 2018 से अक्टूबर 2020 के बीच की अनेकों व्हाट्सएप चैट यूपी एसटीएफ के द्वारा आरोप पत्र में सबूत के तौर पर दाखिल की गई हैं. यह सभी कप्पन के मोबाइल फोन से ली गई हैं. उत्तर प्रदेश एसटीएफ के अनुसार कप्पन के व्हाट्सएप मैसेज, उनके तथाकथित पीएफआई से संबंध और "हाथरस में जातीय हिंसा भड़काने" में लिप्त होने को साबित करते हैं. 4 फरवरी 2021 को जांच अधिकारी के द्वारा की गई एक दैनिक डायरी एंट्री, इन व्हाट्सएप बातों को संक्षिप्त रूप से प्रदर्शित करती है.
पीएफआई सदस्य कमल केपी के साथ चैट, तारीख 17 अगस्त 2020:
पीएफआई के राजनैतिक अंग, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) पर प्रस्तावित प्रतिबंध को लेकर मलयालम न्यूज़ वेबसाइट अज़ीमुखम पर कप्पन के एक लेख के छपने के बाद, उन्होंने उसका लिंक पीएफआई के सदस्य कमल केपी को भेजा था.
आरोप पत्र, कप्पन के लेख को "एसडीपीआई पर प्रस्तावित प्रतिबंध के खिलाफ एक कहानी" बताता है. लेकिन लेख का अंग्रेजी अनुवाद (जो कि आरोपपत्र का हिस्सा है) दिखाता है कि कप्पन के लेख में मुस्लिम यूथ लीग (राजनैतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का यूथ विंग) के पीछे फिरोज के वक्तव्य भी शामिल हैं. फिरोज एसडीपीआई के आलोचक हैं और कहते हैं, "एसडीपीआई मुस्लिम समाज में एक अतिवादी गुट है. इसीलिए मुस्लिम लीग को एसडीपीआई की आलोचना आरएसएस के विरोध से ज्यादा करनी पड़ती है."
लेख समस्त केरला सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन के राज्य के जनरल सेक्रेटरी सथर पंथाल्लूर के हवाले से दूसरी तरफ की दलील भी प्रस्तुत करता है, वे कहते हैं "बेंगलुरु की घटना में एसडीपीआई का कोई रोल है या नहीं यह साबित होना बाकी है. एसडीपीआई या आरएसएस पर प्रतिबंध लगाना हल नहीं है." (यह बात बेंगलुरु में 2010 में हाथ काटने की घटना में कथित तौर पर एसडीआईपीए का हाथ होने के संदर्भ में है)
कमल केपी के साथ चैट, 1 सितंबर 2020 को 6:33 AM पर:
इस बातचीत में कप्पन के द्वारा मलयालम में भेजा गया एक वॉइस मैसेज यानी अपनी आवाज में रिकॉर्ड किया गया संदेश है, इसका निम्नलिखित अनुवाद किया गया:
"कमल साहेब, आपकी योजनाओं का क्या? आपने एक क्लास…. एक व्हाट्सएप का जिक्र किया था. उस बारे में कोई निर्णय हुआ? मेरी 11 तारीख तक दिल्ली वापस जाने की योजना है. क्या वह इससे पहले हो सकता है? क्या आप अपडेट दे सकते हैं. सुनने के बाद इसे डिलीट कर दीजिए."
चार्जशीट के अनुसार, यह वॉइस मैसेज दिखाता है कि कप्पन "एक गुप्त एजेंडा की ओर इशारा कर रहे हैं और इसलिए ऑडियो को डिलीट करने की सलाह दे रहे हैं जिससे जानकारी लीक न हो पाए."
न्यूजलॉन्ड्री ने कमल केपी से कप्पन द्वारा "ऑडियो डिलीट करने के सुझाव" के बारे में पूछने के लिए संपर्क किया.
कमल ने कहा, "चार्जसीट में जिस कथित ऑडियो संदेश का जिक्र है, उसे सुने बिना उस पर टिप्पणी करना असंभव है. इसके इतर, जांच एजेंसियों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से छेड़छाड़ कोई नई बात नहीं है, जिसे अमेरिका में मैसेचूसेट्स की एक डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसलटिंग के द्वारा भीमा कोरेगांव मामले की जांच में उजागर किया जा चुका है. निरंकारी आरोपी रोना विल्सन के लैपटॉप को हैक किया गया और उसमें 10 फंसाने वाली चिट्ठियां प्लांट की गईं. इसलिए 'कथित वॉइस मैसेज को डिलीट करने' की बात अचंभित करने वाली नहीं है, बेगुनाहों को फंसाने के लिए यूपी एसटीएफ की यह मनगढ़ंत कहानी है."
2 अक्टूबर 2020 को कमल के पी के साथ साझा किए गए लिंक
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने उन संदेशों को भी आरोपपत्र में रखा है जिसमें कप्पन ने पीएफआई सदस्य के साथ लिंक साझा किए हैं. इनमें से 2 अक्टूबर 2020 को साझा गया एक लिंक, कप्पन के द्वारा लिए गए उच्चतम न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण के इंटरव्यू का है जो कि न्यूज़ वेबसाइट मुस्लिम मिरर पर प्रकाशित हुआ था. यह स्पष्ट नहीं है कि इस इंटरव्यू को आरोप पत्र में क्यों शामिल किया गया है.
4 अक्टूबर 2020 को कप्पन ने कमल केपी को अपनी इस कहानी का लिंक भेजा, जो कि सीपीआईएम के नेता विजू कृष्णन के हाथरस सामूहिक बलात्कार पीड़िता के परिवार से मिलने को लेकर है. आरोप पत्र में यूपी एसटीएफ सीपीएम के नेता और भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के जिक्र को भी रेखांकित करती है, जो पीड़िता के परिवार से मिले थे. जांच अधिकारी आरोप लगाते हैं कि कप्पन कमल केपी को दलितों और मुसलमानों से जुड़ी रिपोर्ट "पीएफआई के एजेंडा के तहत" भेज रहे थे.
यह स्पष्ट नहीं है कि इन व्हाट्सएप चैट का कप्पन पर लगाए गए "हाथरस में हिंसा भड़काने के आरोप" से क्या संबंध है.
पीएफआई के चेयरमैन ओएमए सलमान के साथ चैट:
14 अगस्त 2020 को कप्पन ने ओएमए सलमान को ज़ी न्यूज़ की एक कहानी का लिंक भेजा, जिसका शीर्षक था "एक्सक्लूसिव: दिल्ली दंगों की योजना जामिया हिंसा के बाद बनाई गई; आरजेडी यूथ विंग की नेता मीरन हैदर का खुलासा: पीएफआई ने फंड उपलब्ध कराए." लिंक भेजने के बाद कप्पन ने एक मैसेज भेजा जिसमें लिखा था, "कृपया तुरंत ध्यान दें." यूपी एसटीएफ का कहना है कि यह संदेश कप्पन की पीएफआई से नज़दीकियों का सबूत है. आरोपपत्र कहता है, "और क्योंकि पीएफआई फंडिंग की खबर बाहर आ चुकी थी वह पीएफआई के चेयरमैन को इसके बारे में चेता रहे थे."
न्यूज़लॉन्ड्री ने पहले रिपोर्ट किया था, कि किस प्रकार यह एक्सक्लूसिव, ज़ी न्यूज़ के द्वारा भ्रमित करने वाली, एकतरफा और बिना किसी आधार की कई कहानियां थीं. इनमें से अधिकतर, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के द्वारा दी गई अपुष्ट जानकारियां चयनित लीकों पर आधारित थीं.
पीएफआई से कप्पन के कथित संबंधों के बारे में पूछने पर, उनके जनरल सेक्रेटरी अनीस अहमद ने कहा, "यह दो लोगों के बीच हुई कथित बातचीत है, इसलिए हम एक संस्था होने के नाते इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते. पीएफआई से किसी लिंक एक राजनीतिक निर्णय का हिस्सा है."
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